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रेडियो सुनकर करते हैं खेती, जानिए कैसे ? 

Updated: IST farmer news
रेडियो किसान दिवस पर किया नई व पुरानी कृषि पद्धति पर चिन्तन

शहडोल
संभागीय मुख्यालय के समीपी ग्राम कल्याणपुर स्थित कृषि विज्ञान केन्द्र में बुधवार को रेडियो किसान दिवस मनाया गया। इस अवसर पर एक संगोष्ठी का आयोजन कर उत्कृष्ट कृषकों, वैज्ञानिकों, कम्पीयरों, अधिकारियों एवं शोधकर्ताओं को प्रशस्ति-पत्र वितरित किया गया। संगोष्ठी में पुरानी व नई कृषि पद्धति पर विचार विमर्श कर भविष्य की कृषि नीति बनाने पर बल दिया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कृषि विज्ञान केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. मृगेन्द्र प्रताप सिंह रहे। अध्यक्षता आकाशवाणी के उपनिदेशक कार्यक्रम रत्नाकर भारती ने की। मुख्य अतिथि ने कहा कि किसानों तक आधुनिक कृषि पद्धति की जानकारी संप्रेषित करने में आकाशवाणी शहडोल की महती भूमिका है। जिसे वह पिछले पच्चीस वर्षों से निभा रहा है। आकाशवाणी ही एक ऐसा सशक्त माध्यम है जिससे कृषि वैज्ञानिक अपनी जानकारी किसानों तक पहुंचा पाते है। रेडियो आज भी सस्ता और सुलभ उपाय है। दूर दराज के किसान आज इतने जागरूक हो चुके है कि रेडियो में दी गई कृषि संबंधित जानकारी को सुनने के बाद उसे अमल में भी ला रहें हैं। वर्तमान में रेडियो किसान और समाज का भला करने वाला महत्वपूर्ण उपकरण बन गया है। अध्यक्षता कर रहे उपनिदेशक कार्यक्रम रत्नाकर भारती ने कहा कि आकाशवाणी किसानों के हित में अच्छी से अच्छी जानकारी देने के लिए कृत संकल्पित है और इसके लिए सभी का सहयोग भी मिल रहा है। गृह वैज्ञानिक अल्पना शर्मा ने कहा कि शासन की मंशानुरूप किसानों को ज्यादा से ज्यादा लाभ देने पर ज्यादा बल दिया जा रहा है। इसके लिए किसानों के अतिरिक्त आय पर भी चिंतन किया जा रहा है। मृदा वैज्ञानिक बीएन त्रिपाठी ने कहा कि बेहतर फसल उत्पादन में बीज की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसलिए उसका प्रमाणीकरण कराना जरूरी होता है। बीज का जेनेटिक गुण अच्छा और उसका अंकुरण प्रतिशत बेहतर होना चाहिए। बीज में नमी नहीं होनी चाहिए। कृषक को अपनी धरा के स्वभाव से वाकिफ होना चाहिए। वर्तमान में तापमान बढऩे से मिट्टी की नमी जा रही है। जो बेहतर फसल उत्पादन के लिए ठीक नहीं है। इसके लिए कृषकों का आर्गनिक खाद का इस्तेमाल कर उवर्रक प्रबंधन पर विशेष ध्यान देना चाहिए। इस अवसर पर उन्नत कृषक यूनूस खान, आकाशवाणी के प्रशांत परमार, अंजलि श्रीवास्तव, इंद्रा वर्मा, सरिता श्रीवास्तव, विजया पाण्डेय, अजीत सिंह पटेल, राजेश सोंधिया, शिवशंकर मिश्रा सहित अन्य कई किसानों व अधिकारी व कर्मचारियों ने अपने-अपने विचार व्यक्त किया और कहा कि रेडियो से जानकारी लेकर जिले के किसान विकास की मुख्य धारा से जुड चुके हैं। कार्यक्रम का संचालन रमेश त्रिपाठी ने किया और प्रसारण निष्पादक प्रशांत परमार ने अतिथियों से प्रशस्त्रि-पत्रों का वितरण कराया।

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