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Video Icon 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान हुए 'तेल के खेल' का खुलासा

Updated: IST District Supply Office
तत्कालीन जिला आपूर्ति अधिकारी अपनी तैनाती के दौरान दफ्तर में घूस लेते भी पकड़े गये थे।

शाहजहांपुर। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में खर्च हुए डीजल और पेट्रोल में शाहजहांपुर के तत्कालीन जिला पूर्ति अधिकारी और उनके अधीनस्थों ने जमकर खेल किया। इसका खुलासा मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय से हुई जांच के बाद हुआ। जिसके बाद पूर्व जिला पूर्ति अधिकारी सहित दो और अधिकारियों की गर्दन फंस चुकी है। फिलहाल जिलाधिकारी रामगणेश ने नोटिस जारी कर पूर्व जिला पूर्ति अधिकारी से एक सप्ताह में जवाब के साथ ही वसूली और एफआईआर की भी कार्रवाई शुरू कर दी है।

क्या है पूरा मामला

लोकसभा चुनाव में लगे सरकारी और गैर सरकारी वाहनों को डीजल-पेट्रोल आवंटित करने में शाहजहांपुर के तत्कालीन जिला पूर्ति अधिकारी और उनके दो मातहतों की भूमिका रही थी। इस प्रकरण के बाबत शाहजहांपुर के जिलाधिकारी ने जांच के बाद अब पूर्व जिला पूर्ति अधिकारी सहित कार्यालय के ही के दो अन्य अधिकारियों को नोटिस जारी किया है। नोटिस जारी होने के बाद जिला पूर्ति कार्यालय में खलबली मच गई है। दरअसल, वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव चुनाव संपन्न कराने के लिए ड्यूटी में लगाए गए वाहनों में डीजल-पेट्रोल खर्च करने के मानकों को ताक पर रख दिया गया था। जिसमें जिले की सभी छह विधानसभाओं में 24 लाख रुपए का डीजल-पेट्रोल खर्च किया जाना चाहिए था। मगर यह खर्च 5000000 रुपए से भी अधिक का हुआ था। संदेह होने पर मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने ऑडिट टीम को जांच के निर्देश दिए थे। तब 17 लाख रुपए के खर्च का कोई भी दस्तावेज नहीं मिला।

आरोपी अधिकारियों पर कार्रवाई शुरू

शाहजहांपुर में लोकसभा चुनाव के दौरान तैनात रहे जिला पूर्ति अधिकारी बृजेश कुमार शुक्ला की भूमिका पूरी तरीके से संदेह के घेरे में आ गई। बृजेश शुक्ला को दस्तावेज उपलब्ध कराने के लिए कई बार जिलाधिकारी ने चिट्ठी लिखी, लेकिन दबंग पूर्व जिला पूर्ति अधिकारी बृजेश कुमार शुक्ला ने कोई जवाब नहीं दिया। जिस पर मंगलवार को डीएम रामगणेश ने बृजेश कुमार शुक्ला की तैनाती स्थल पर एक सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के लिए नोटिस भेज दिया है। इसके अलावा डीएम ने जिला पूर्ति अधिकारी सहित उनका साथ देने वाले दो और अधिकारियों से 2014 में हुए लोकसभा चुनाव के दौरान तेल में खेल करने वाले दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई शुरू कर दी है।

घूस लेते भी पकड़ा जा चुका ये अफसर

बता दें कि यही ब्रजेश शुक्ला अपने दफ्तर में रंगेहाथ पांच लाख रुपये की घूस लेते पकड़े गए थे। जिसमे विजलेंस टीम ने एक पेट्रोल पंप के लाइसेंस के नाम पर रिश्वत लेते गिरफ्तार कर जेल भेजा था। लेकिन अपनी पहुंच के चलते जिला पूर्ति अधिकारी अपने काले कारनामों पर पर्दा डालने में कामयाब रहा और एक बार फिर दूसरे जिले में तैनाती पा ली।

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