Patrika Hindi News

आग बुझाने में फायर ब्रिगेड का निकल रहा दम

Updated: IST Fire brigade does not control  fire, due to axcess
जिले भर में इन दिनों आग लगने की घटनाएं लगातार हो रही है। कहीं नरवाई के कारण आग लग रही है तो कहीं पर खड़ी फसल जल रही है। जिले के कुल 623 ग्रामों में से हर दिन किसी ने किसी जगह पर अग्निकांड हो रहा है।

पीयूष भावसार. शाजापुर. जिले भर में इन दिनों आग लगने की घटनाएं लगातार हो रही है। कहीं नरवाई के कारण आग लग रही है तो कहीं पर खड़ी फसल जल रही है। जिले के कुल 623 ग्रामों में से हर दिन किसी ने किसी जगह पर अग्निकांड हो रहा है। इन सभी स्थानों पर आग पर काबू पाने के लिए कुल मिलाकर 10 फायर ब्रिगेड ही है। पिछले 20 दिनों की बात की जाए तो करीब 100 से ज्यादा स्थानों पर आग लगने की घटनाएं हो चुकी है। इस स्थिति में हर जगह फायर ब्रिगेड का पहुंचना मुश्किल होने से लोगों को स्वयं ही जतन करके आग पर काबू पाना पड़ता है।

जिले में इन दिनों भीषण गर्मी का दौर चल रहा है। इससे आग लगने की घटनाएं आम हो चुकी हैं। हर दिन कहीं न कहीं घटनाएं हो रही हैं। आग लगने की सूचना सबसे पहले पुलिस कंट्रोल रूम को दी जाती है। कंट्रोल रूम से फायर ब्रिगेड को सूचना देकर मौके पर भेजा जाता है। एक दिन में 8 -10 स्थानों पर भी आग लगने की घटनाएं इस माह हो चुकी है। सभी जगह पर फायर ब्रिगेड का पहुंचना मुमकिन नहीं होने से लोगों को स्वयं ही आग बुझाने के लिए मशक्कत करना पड़ती है। हालांकि फायर ब्रिगेड की कम संख्या होने से ये स्थिति बन रही है। यदि जिले के प्रत्येक थाना क्षेत्र में दमकल वाहन रहें तो जरूरत पडऩे पर आग लगने की घटना को तत्काल रोका जा सकता है।

यहां नहीं है फायर ब्रिगेड

पुलिस कंट्रोल रूम से मिली जानकारी के अनुसार जिले के मोहन बड़ोदिया, बेरछा, सुंदरसी, सलसलाई, सुनेरा में एक भी फायर ब्रिगेड नहीं है। इन क्षेत्रों और इनके आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में यदि आग लग जाती है तो दूसरे स्थान से फायर ब्रिगेड को बुलवाना पड़ता है। कई बार फायर ब्रिगेड वाले क्षेत्र में भी आग लगी होने पर लोगों को ही अपने स्तर से आग को बुझाना पड़ता है।

टैंकरों और ट्यूबवेल का सहारा

जिले के प्रत्येक गांव जहां पर आग लगने की घटनाएं होती है, वहां पर कभी व्यस्तता के कारण तो कभी दूरी अधिक होने के कारण समय पर फायर ब्रिगेड नहीं पहुंच पाती है। इस स्थिति में संबंधित क्षेत्र में टैंकर, कुएं, ट्यूबवेल आदि के माध्यम से आग पर काबू पाने के प्रयास होते है। जिले के मोहन बड़ोदिया और उसके आसपास बड़ा ग्रामीण क्षेत्र है। इसके बाद भी यहां पर फायर ब्रिगेड नहीं होने से सबसे ज्यादा परेशानी होती है। किसी भी जगह आग लगने पर आगर जिले के कानड़ या फिर शाजापुर से फायर ब्रिगेड को मौके पर पहुंचना पड़ता है।

6 माह बाद ठीक होकर मिली फायर ब्रिगेड

नगर पालिका शाजापुर के पास तीन फायर ब्रिगेड थी। इसमें से एक फायर ब्रिगेड खराब रहती थी। इसके चलते उक्त फायर ब्रिगेड को ठीक करवाने के लिए करीब 6 माह पहले भोपाल भेजा गया था। इस कारण से कहीं पर भी आग लगने की दशा में दो फायर ब्रिगेड से काम चलाना पड़ रहा था। शुक्रवार को भोपाल से उक्त फायर ब्रिगेड ठीक होकर शाजापुर पहुंच गई। जानकारी के अनुसार आसपास के क्षेत्र में यदि कहीं आग लगती है तो एक फायर ब्रिगेड को जिला मुख्यालय के लिए छोड़कर शेष को मौके पर भेज दिया जाता है। अभी तक एक फायर ब्रिगेड को यहां रखने से एक ही वाहन दूसरी जगह आग बुझाने पहुंच पाता था।

आपदा प्रबंधन से इस संबंध में आवंटन की मांग की गई है। सभी क्षेत्रों में नगर पालिका और नगर परिषद की ये व्यवस्थाएं अलाटमेंट के आधार पर रहती है। अलाटमेंट आने पर ही इस संबंध में कार्रवाई की जाएगी।

अलका श्रीवास्तव, कलेक्टर-शाजापुर

&नगर पालिका के पास दो फायर ब्रिगेड चालू हालत में और एक में बार-बार खराबी आ रही थी। जिसे पूरी तरह से ठीक करवाने के लिए भोपाल भेजा गया था। शुक्रवार को वो भी पूरी तरह से दुरुस्त होकर हमें प्राप्त हो चुकी है। कई बार तो 10-20 किमी दूर तक भी आग बुझाने के लिए फायर ब्रिगेड को जाना पड़ता है।

शीतल भट्ट, नपाध्यक्ष-शाजापुर

अपने विवाह के सपने को भारत मैट्रीमोनी पर साकार करे।- निःशुल्क रजिस्ट्रेशन करे!
LIVE CRICKET SCORE
Patrika.com

लेटेस्ट ख़बरें ई-मेल पर पाने के लिए सब्सक्राइब करें

Dus ka Dum
Ad Block is Banned Click here to refresh the page

???? ??????? ?? ??? ???? ????? ???