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योग से दी बीमारी को मात, अब लोगों के जीवन में भर रहे खुशियों के रंग,

Updated: IST Overcoming the disease given by yoga, now the colo
शाजापुर. आज अंतरराष्ट्रीय योग दिवस है। हर किसी के जीवन में योग का महत्व है। जीवनशैली सुधारने व समस्याओं-बीमारियों से बचने में योग कारगर है। गंभीर से गंभीर बीमारियों में भी योग के काफी अच्छे परिणाम रहे हैं।

अनीस खान. शाजापुर. आज अंतरराष्ट्रीय योग दिवस है। हर किसी के जीवन में योग का महत्व है। जीवनशैली सुधारने व समस्याओं-बीमारियों से बचने में योग कारगर है। गंभीर से गंभीर बीमारियों में भी योग के काफी अच्छे परिणाम रहे हैं। बहुत से ऐसे लोग हैं जो जिंदगी की उम्मीद से हार चुके थे, निराश हो गए थे, उनको योग ने नया जीवन दिया।

पहले तो लोगों ने स्वयं की बीमारी को दूर करने के लिए योग सीखा और अपनी बीमारी दूर की ।इसके बाद अब लोगों को योग के लिए प्रति जागरूक कर रहे हंै। साथ ही प्रशिक्षण भी दे रहे हैं। शाजापुर में किसी ने योग के माध्यम से कैंसर जैसी बीमारी को मात दी तो हॉट व लकवा पेसेंट ने योग से अपनी बीमारी को दूर भगाया। अब लोगों को योग के लिए प्रशिक्षण दे रहे हैं।

पहले खुद हुए स्वस्थ, फिर बने योग गुरु

शहर के इंद्रानगर कॉलोनी निवासी यशपाल शर्मा हार्ट पेसेंट थे। इन्हें लकवा भी हुआ था। योग के माध्यम से इन्होंने अपनी सारी बीमारी दूर कर ली और अब लोगों को योग कराकर निरोग बना रहे हैं। यशपाल शर्मा ने बताया कि वर्ष2001 में उनके हार्ट का आपे्रशन हुआ था, जिसमें वॉल्व बदला था। इसके बाद 2004 में लकवा हो गया। लगतार एलोपैथिक उपचार कराया लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। 2005 में टीवी पर बाबा रामदेच का प्रोग्राम को देखने के बाद स्वयं ने योग शुरू किया। उन्हें एक माह में ही फर्क पडऩे लगा था, जिसके बाद वे लगातार योग करते गए और अपनी सभी बीमारियों से निजात पा ली। उन्होंने योग का साथ नहीं छोड़ा और योग गुरु बन गए। शर्मा ने योग में डिप्लोमा में हासिल किया है। अब शर्मा बीमार व परेशान लोगों को योग सिखाते हैं। शर्मा डाइबिटीज, जोड़ों का दर्द, पीठ का दर्द, सिर दर्द,हृदय रोग, ब्लडप्रेसर, थायराइड, मोटापा, केंसर रोग, किडनी रोग, स्त्री रोग संबंधित, निसंतान दंपति आदि समस्याओं को योग से दूर करने का प्रशिक्षण दे रहे हैं।

कैंसर को मात

शहर के बेरछा रोड़ स्थित निवासी रामकृष्ण गोठी की पत्नी मधु गोठी ने योग के माध्यम से अपनी सारी बीमारी दूर की और अब निरोगी जीवन जी रही है। मधु गोठी प्रतिदिन सवा घंटा योग करती हैं। पति रामकृष्ण गोठी ने बताया कि 2012 में उनकी पत्नी मधु गोठी को लीवर में गठाने हो गई थीं, जिससे उन्होंने खाना पीना बंद कर दिया था। इस दौरान चिकित्सकों से चेकअप कराया, जिसमें बताया कि इनका आपरेशन होगा, साथ ही गठान में कैंसर की शंका भी जाहिर की थी। लेकिन आपरेशन न कराते हुए उन्होंने दिल्ली स्थिति आयुर्वेदिक बाबा बालक नाथ का पता मिला। यहां बाबा ने दवाई के साथ प्रतिदिन दो घंटे योग करने की सलाह दी। इसके बाद पूरे साथ साल तक मधु गोठी ने दो घंटे योग किया और बीमारी धीरे-धीरे समाप्त होगी गई। गिरीराज जी की परिक्रमा भी कर ली। मधु गोठी आज भी सुबह 6 बजे उठकर प्रतिदिन सवा घंटे योग करतीं हैं।

9 साल से नि:शुल्क योग प्रशिक्षण दे रहे

शहर के विजयनगर निवासी मुकेश सक्सेना पिछले 9 सालों से शहरवासियों को नि:शुल्क योग का प्रशिक्षण दे रहे हैं। पहले प्राच्य विद्यापीठ पर योग की क्लास लगाई थी। इसके बाद महिला मंडल सहित बेरछा, पनवाड़ी, सुंदरसी, दुपाड़ा सहित अन्य गांवों में नि:शुल्क योग प्रशिक्षण शिविर लगा चुके हैं। उन्होंने बताय कि जीवाजी क्लब में 11 दिवसीय योग प्रशिक्षण शुरू होने वाला है।योग के बारे में बताते हुए कहा कि योग कोई व्यायाम नहीं है बल्कि यह जीवन जीने का तरीका है। आध्यात्मिक दृष्टिकोण से मनुष्य और परमात्मा का जोड़, स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से शरीर और मानसिक का तालमेल योग है। जबकि लोग आसनों और प्राणयाम को योग मानते है, योग एक बहुत विस्तृत विषय है जिसका छोटा का हिस्सा आसन है जो शरीर को स्वस्थ्य और निरोग रखने के लिए किया जाता है।

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