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भवन की मांग को लेकर ग्रामीणों ने स्कूल में जड़ा ताला

Updated: IST loacked primary school
बड़ौदा क्षेत्र के ग्राम राड़ेप में नहीं है सरकारी स्कूल का भवन, ग्रामीणों द्वारा दान की गई पांच कमरे की बिल्डिंग में चल रहे चार स्कूल

श्योपुर । . गांव में चार सरकारी स्कूल संचालित हैं, लेकिन एक के लिए भी भवन नहीं बना है। यही वजह है कि गांव के चारों स्कूल ग्रामीणों द्वारा 56 साल पूर्व दान किए गए एक पांच कमरों के भवन में चल रहे हैं। इसी बात से आक्रोशित ग्रामीणों ने गुरुवार को विरोध स्वरूप स्कूल की तालाबंदी कर दी। हालांकि लगभग एक घंटे तक स्कूल की तालाबंदी किए जाने के बाद ग्रामीणों ने प्राचार्य के आश्वासन के बाद ताला खोल दिया, लेकिन चेतावनी भी दे दी कि अगले शिक्षण सत्र से पूर्व यहां भवन नहीं बना तो विद्यालय खुलने ही नहीं दिया जाएगा।

बताया गया है कि राड़ेप में वर्तमान में प्राथमिक, कन्या प्राथमिक, मिडिल और हाईस्कूल संचालित हैं, लेकिन इन चारों स्कूलों के लिए आज तक सरकारी स्कूल भवन नहीं बन पाया है। बताया गया है कि भवन न होने के कारण वर्ष 1960 में ग्रामीणों ने जनसहयोग से एक भवन बनाकर प्राथमिक और मिडिल स्कूल के लिए दान किया, तभी से विद्यालय में इसमें चल रहे हैं।

चूंकि वर्ष 2007 में मिडिल स्कूल का उन्नयन होकर हाईस्कूल में तब्दील हो गया, लेकिन भवन नहीं बना। यही वजह है कि चार स्कूलों के लगभग साढ़े तीन सैकड़ा छात्र महज पांच कमरों के दान किए गए भवन में चल रहा है। हालांकि ग्रामीण कई बार भवन की मांग कर चुके हैं, लेकिन अभी तक भवन नहीं बना, लिहाजा ग्रामीणों ने गुरुवार को तालाबंदी की, ताकि प्रशासन को कानों तक बात पहुंचे। दोपहर 12 बजे ग्रामीणों ने हंगामा करते हुए स्कूल की तालाबंदी, जिसके चलते छात्र-छात्राएं और स्टॉफ भीतर ही कैद हो गया। लगभग एक घंटे तक ताला रहने के बाद विद्यालय के प्राचार्य महेश शर्मा ने संकुल प्राचार्य और डीईओ से ग्रामीणों की बात कराई, जिसके बाद ग्रामीण माने और दोपहर 1 बजे ताला खोला।

जमीन के अभाव में लटका है भवन

बताया गया है कि राड़ेप में मिडिल स्कूल के लिए आठ लाख की लागत से वर्ष 2007 में भवन स्वीकृत हुआ था, लेकिन ग्राम पंचायत की लापरवाही से वो अधूरा पड़ा है। उसके बाद हाईस्कूल के लिए भी लगभग 55 लाख रुपए की लागत से भवन मंजूर हो गया है, लेकिन वो भी जमीन के अभाव में लटका हुआ है। बताया गया है कि हाईस्कूल की चिह्नित जमीन पर अतिक्रमण है, जिसे प्रशासन हटा नहीं पा रहा है, लिहाजा भवन अधर में है।

ग्रामीणों ने स्कूल की तालाबंदी की थी, जिसके बाद हमने डीईओ और संकुल प्राचार्य से बात कराई, तब ग्रामीणों ने ताला खोला। चूंकि विद्यालय के लिए भवन स्वीकृत है, लेकिन जमीन के चलते भवन नहीं बन पा रहा है।
महेश शर्मा, प्राचार्य, हाईस्कूल राड़ेप

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