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हेरीटेज होटल के लुक में आया कूनो रेस्ट हाउस

Updated: IST kuno rest house
रियासतकालीन रेस्ट हाउस को पर्यटन विभाग ने दिया नया लुक, जीर्णोद्धार भी कराया

श्योपुर । कूनो नदी के सुरम्य तट पर स्थित रियासतकालीन कूनो रेस्ट हाउस अब नए लुक में नजर आ रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि पीडब्ल्यूडी विभाग से पर्यटन विकास निगम को हस्तांतरित होने के बाद पर्यटन विभाग ने रेस्ट हाउस को न केवल जीर्णोद्धार कराया है, बल्कि कुछ कमरे नए भी बनाए हैं। यही वजह है कि कूनो रेस्ट हाउस अब हेरीटेज होटल के रूप में नजर आता है।

उल्लेखनीय है कि लोक निर्माण विभाग द्वारा सेसईपुरा में कूनो नदी किनारे बने कूनो रेस्टहाउस को तीन साल पहले मध्यप्रदेश पर्यटन विकास निगम को दे दिया। चूंकि पहले रेस्ट हाउस में दो कमरे और एक नैरोगेज की बोगी का डायइनिंग हॉल था, जिसका तो निगम ने रेनोवेट करा दिया है, साथ ही छह नए कमरे भी बनाए हैं। पर्यटन विकास निगम ने लगभग दो करोड़ की लागत से रेस्ट हाउस को होटल में तब्दील कर दिया है। यही वजह है कि अभी तक शासकीय विश्रामस्थल के रूप में पहचाने जाने वाला रेस्ट हाउस कूनो अभयारण्य में आने वाले पर्यटकों को भी एक अच्छा स्थल ठहरने के लिए मिल सकेगा। यही नहीं कूनो अभयारण्य के निकट ही एक अच्छा होटल होने से अभयारण्य में भी पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी।

सिंधिया रियासत का था शिकारगाह

श्योपुर-शिवपुरी हाईवे पर जिले के ग्राम सेसईपुरा के निकट बह रही कूनो नदी के किनारे बना ऐतिहासिक रेस्ट हाउस (विश्राम गृह) सिंधिया रियासतकाल के दौरान बनाया गया था। पुरातत्ववेत्ता कैलाश पाराशर के मुताबिक ग्वालियर के जीवाजी राव सिंधिया द्वारा इसका निर्माण कराया गया था। आजादी के पूर्व यह रेस्टहाउस सिंधिया रियासत की शिकारगाह हुआ करता था। श्योपुर जिले के जंगल में शिकार के लिए आने वाले सिंधिया रियासत के शासक और उनके मित्रगण यहां ठहरा करते थे। आजादी के बाद रियासतों के भारत में विलय के बाद कूनो नदी किनारे बना यह शिकारगाह भवन लोक निर्माण विभाग के अधीन आ गया, जिसे अब पर्यटन विभाग ने डवलप कर दिया है।

रेस्ट हाउस को हमने नया लुक दे दिया है और अब इसमें आठ कमरे हो गए हैं। जल्द ही मुख्यालयस्तर से इस होटल के संचालन के संबंध में भी निर्देश जारी हो जाएंगे।

एमएस डंडोतिया, ईई, मध्यप्रदेश पर्यटन विकास निगम ग्वालियर

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