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बंजारा डैम रीता तो घट जाता है शहर का भू-जलस्तर

Updated: IST banzara dam
पांच साल पहले हुआ था डैम का गहरीकरण, उसके बाद नहीं ली गई सुध

श्योपुर । लगभग 75 किलोमीटर की लंबाई में बह रही सीप नदी यूं तो एक सैकड़ा गांव की जीवनदायिनी है, लेकिन शहर का भूजलस्तर पूरी तरह सीप नदी पर ही निर्भर है, इसमें सबसे बड़ी भूमिका बंजारा डैम की है। यही वजह है कि जब भी डैम का पानी रीतता है तो शहर का भूजलस्तर गड़बड़ा जाता है, जो गत वर्ष देख भी चुके हैं। बाजवूद इसके डैम के गहरीकरण और संरक्षण की दिशा मे आज तक कोई खास प्रयास नहीं हुए। हालांकि पांच साल पूर्व श्रमदान के साथ बांध का थोड़ा बहुत गहरीकरण हुआ, लेकिन उसके बाद किसी ने झांककर नहीं देखा। यही कारण है कि इस बार भी धीरे-धीरे बांध का पानी नीचे जा रहा है।

उल्लेखनीय है कि लगभग पांच सौ साल पूर्व एक लक्खी बंजारा ने शहर के निकट बंजारा डैम बनवाया, तभी से ये डैम शहर के भूजलस्तर को स्थिर रखने का मुख्य स्रोत है। हालांकि वर्षाकाल में डैम ओवरफ्लो होकर बहता है, लेकिन बाद में इसमें मलपुरा के आगे तक पानी भरा रहता है, जिसके कारण शहर का भूजलस्तर बरकरार रहता लेकिन समय के साथ अतिक्रमण, मिट्टी क्षरण आदि की समस्या के कारण बांध की गहराई कम होती जा रही है, लिहाजा बांध में गर्मियों में पानी कम हो जाता है। यही वजह है कि बंजारा डैम के अप स्ट्रीम में सीप नदी में गहरीकरण की आवश्यकता काफी समय से महसूस की जा रही है, बावजूद इसके अभी तक किसी ने ध्यान नहीं दिया है।

गत वर्ष आई थी काफी दिक्कत

बंजारा डैम सीप नदी में गत वर्ष जून माह में पानी काफी कम हो गया, यही वजह है कि शहर का भूजलस्तर 30-40 फीट कम हो गया। जिसके चलते शहर में कई ट्यूबवेल बंद हो गए, जिनमें पाइप बढ़ाने पड़े। ऐसे में यदि समय रहते नहीं चेते तो वो दिन दूर नहीं जब बंजारा डैम हर साल रीतने लगेगा और श्योपुर शहर में पेयजल की किल्लत होने लगेगी।

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