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नोटबंदी: ग्रामीण क्षेत्रों में पैसे के लिए मची हाहाकार  

Updated: IST note ban
बैंकों के बन्द एटीएम भी बढ़ा रहे लोगों की मुसीबत, नोट के लिए बैंकों की लाइन में जारी है जद्दोजहद...

सिद्धार्थनगर.नोटबंदी के 21 दिनों के बाद नोट के लिए लोगों की जद्दोजहद कम नहीं हो पाई। रोज की तरह मंगलवार को भी सभी बैंक की शाखाओं पर लोग अपने ही हजार दो हजार रूपए के लिए बैंकों पर लगी लाइन में जद्दोजहद करते रहे। रोज की तरह मंगलवार को भी बैंकों के खुलने से पहले ही लोगों की लम्बी लाइन लग गई।

बैंकों में नोट नहीं होने के कारण लोगों को जरूरत भर का भी पैसा नहीं मिल पा रहा है। जिसके चलते लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है। मंगलवार को रोज की तरह भारतीय स्टेट बैंक की मुख्य शाखा पर बैंक के खुलने से पहले ही सुबह आठ बजे ही लोगों की लम्बी लाइन लग गई।

एक लाइन बैंक में प्रवेश करने के लिए लगी तो दूसरी लाइन एटीएम से पैसा निकालने के लिए ऐसे में बैंक लोगों की लाइन से घिरा हुआ था। बैंक कर्मचारियों को भी बैंक के अन्दर तक पहुंचने के लिए परेशानी के दौर से गुजरना पड़ा। मंगलवार को सभी बैंक की शाखाओं पर भीड़ देखकर हर कोई हैरत में था। कोई एटीएम के चक्कर लगा रहा था तो कोई बैंक की शाखाओ से पैसा निकालने की जुगत लगा रहा था। बैंको में नोट कम होने के कारण लोगो को जरूरत भर का पैसा नहीं मिल पा रहा है।

जिसको लेकर लोगों में रोष है। हजार दो हजार रूपयों के लिए लाइन में लगने वालों का कहना है कि आज अपने ही पैसों के लिए जद्दोजहद करनी पड़ रही है। यह कैसा इंतजाम है कि अपने ही पैसों के लिए पूरे दिन लाइन में लगकर बिताना पड़ रहा है। मंगलवार को भारतीय स्टेट बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, एचडीएफसी बैंक, सेन्ट्रल बैंक ऑफ इण्डिया, केनरा बैंक में पैसा आने के कारण यहां पर भी पैसा निकालने वालों की लम्बी लाइन लगी रही।

बुजुर्गों को झेलनी पड़ रही दुश्वारियां
अपने ही पैसों के लिए लोगों को दुश्वारियां झेलनी पड़ रही है। सबसे अधिक परेशानी बुजुर्गों को हो रही है। जो लाइन में खडे खडे थक जाने के बाद वहीं लाइन में ही बैठ जा रहे है। वह कब तक काउंटर तक पहुंचेगे इसका भी अन्दाजा उन्हे नहीं रहता है। भारतीय स्टेट बैंक कृषि विकास शाखा पर बुजुर्ग भी लाइन में खडे रहे। जब तक थक गए तो वहीं लाइन में ही बैठ गए ताकि कोई भी लाइन से अलग न कर सके। इस तरह का नजारा बैंकों पर प्रतिदिन देखने को मिल रहा है। बैंकों में पैसा नहीं होने के कारण कई बार निराश होकर वापस भी लौटना पड़ा। बैंक के अधिकारियों द्वारा पैसों के सम्बंध में कोई जानकारी नहीं दिए जाने के कारण भी लोगों की दुश्वारियां कम नहीं हो रही है।

बैंकों में नहीं हो पा रहा कोई और काम
पैसों के लिए बैंकों पर जुटने वाली भारी भीड़ के चलते बैंक कर्मचारी कोई और काम नहीं कर पा रहे है। पूरे दिन भीड़ से बैंक के पटे रहने के कारण कर्मचारियों को भी दुश्वारियां झेलनी पड़ रही है। बैंक खुलने से पहले ही लगने वाली भीड़ के बीच से बैंक खोलने से लेकर बैंक के अन्दर प्रवेश के लिए भी परेशानी उठानी पड़ रही है। लाइन से आगे जाने वाले को भीड़ के गुस्से का शिकार होना पड़ रहा है। ऐसे में बैंक कर्मचारी भी अगर आगे जा रहे है तो उन्हें भी बताना पड़ रहा है।

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