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MP में शिशु मृत्यु दर की स्थिति गंभीर, दो नवजात रोजाना तोड़ रहे दम

Updated: IST Baby
683 नवजातों की एक साल में मौत, जन्म के 24 घंटे के अंदर एक सैकड़ा से ज्यादा की मौत, 318 शिशुओं की कुपोषण से मौत होने की जताई जा रही आशंका।

सीधी। शिशु मृत्युदर कम करने की कावायद जिले में कागजी साबित हो रही है। विभागीय आंकड़े बताते हैं कि यहां औसतन दो नवजात रोजाना दम तोड़ रहे हैं। फिर भी अफसर बेपरवाह बने हुए हैं। बीते एक वर्ष में 683 नवजात शिशुओं की मौत हो चुकी है। जिसमें जन्म लेने के 24 घंटे के अंदर 110 शिशुओं की मौत हुई है।

यह आकड़े सिर्फ प्रसव के लिए चिकित्सालयों मे भर्ती होने वाले मृत शिशुओं की है। जबकि घरेलू व निजी चिकित्सालयों में प्रसव के दौरान शिशुओं की मौत के आकड़ो को एकत्रित किया जाए तो वर्ष भर में हजार से भी ज्यादा शिशु काल के गाल में समा रहे हैं।

गर्भ की जांच कराने में गुरेज

मालूम हो कि गर्भावस्था के दौरान महिलाओं के द्वारा समय-समय पर गर्भ की जांच कराने में गुरेज बरता जाता है। वहीं पौष्टिक आहार भी महिलाओं को नहीं नसीब हो पाता। जिसके कारण गर्भवती महिलाएं एनीमियां की शिकार तो होती है वहीं पेट मे पल रहे बच्चे पर भी गंभीर प्रभाव पड़ता है। चिकित्सक विशेषज्ञ बताते हैं कि गर्भ में आने के बाद शिशु का स्वास्थ्य मांता के पोषण आहार पर निर्भर करता है।

318 शिशुओं की मौत

आहार में लापरवाही बरतने के कारण बच्चे कुपोषित जनम लेते हैं, और जन्म लेने के दौरान या कुछ दिनों मे उनकी मौत हो जाती है। आकड़े की बात माने तो पिछले वर्ष जन्म के एक माह से पांच वर्ष के अंदर उम्र के 318 शिशुओं की मौत हुई है। जिस पर कुपोषण से मौत होने की आशंका व्यक्त की जा रही है। यह संख्या विभाग को चौकाने वाली है किंतु विभागीय अमले पर कोई असर नहीं पड़ रहा है। और शिशु मृत्यु दर कम करने को लेकर किसी भी तरह की चिंता नहीं जताई जा रही है।

शहरी क्षेत्र में बच्चों की हो रही ज्यादा मौतें

आंकड़ों की मानें तो ग्रामीण अंचल की अपेक्षा शहरी क्षेत्र में शिशुओं की मौत के आकड़े ज्यादा सामने आ रहे है। जहां शहरी क्षेत्र में जन्म से 24 घंटे के अंदर 19, एक सप्ताह के अंदर 89, एक से 4 सप्ताह के बीच 18, एक माह से 5 वर्ष तक 104 एवं शहरी क्षेत्र में कुल 230 शिशुओं की मौत एक वर्ष में हुई।

फैक्ट फाइल

- 110 शिशुओं की हुई मौत हुई 24 घंटे के अंदर।

- 157 शिशुओं की मौत 01 सप्ताह के अंदर।

- 98 बच्चों ने 4 सप्ताह के अंदर तोड़ा दम।

- 318 बच्चों की मौत हुई 01 माह से 5 वर्ष के अंदर।

- 286 शिशुओं की मौत हुई घरेलू प्रसव के दौरान।

- 683 शिशुओं की मौत अप्रैल 2016 से मार्च 2017 तक।

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