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गणतंत्र दिवस स्पेशल: वो हमारे सुरक्षित कल के लिए अपना आज कुर्बान कर देते हैं

Updated: IST Republic Day special
देश आज 68वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। देश के समस्त नागरिकों के लिए आज एक सम्मान का दिन है। लेकिन आज जो हम गणतंत्र दोवास मना रहे हैं, स्वतंत्र होने का एहसास कर रहे हैं, वो कहीं न कहीं कुछ लोगों की कुर्बानी से हमें हासिल हुई है...

नई दिल्ली: देश आज 68वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। देश के समस्त नागरिकों के लिए आज एक सम्मान का दिन है। लेकिन आज जो हम गणतंत्र दोवास मना रहे हैं, स्वतंत्र होने का एहसास कर रहे हैं, वो कहीं न कहीं कुछ लोगों की कुर्बानी से हमें हासिल हुई है। देश की सेवा में हमारे जांबाज सैनिक अपनी जान देकर भी देश की रक्षा करते हैं। ऐसे ही बहादुर सैनिकों को आज गणतंत्र दिवस के मौके पर बहादुरी पुरस्कार से भी सम्मनित किया गया. हवलदार हंगपन दादा को मरणोपरांत अशोक चक्र से नवाजा गया।

वैसे हमारे देश में बहादुर जवानों के अलावा कुछ और लोग भी हैं जो हमें आज़ादी का एहसास दिलाने में अपना पूरा प्रयास करते हैं, हमें आज़ादी और निश्चितता से रहने के लिए वो अपने आज को कुर्बान कर देते हैं। वो दिन रात अपना खून और पसीना बहाते हैं ताकि हम सुकून की नींद ले सकें।

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देश की सरहद पर तैनात सैनिक, गाड़ियों की सांय-सांय और रफ्तार के बीच हमें सहूलियत प्रदान करते ट्रैफिक कर्मी, देश का किसान, गलियों में रेहड़ी पटरी और सड़कों पर तेज धूप में खड़े प्यासे फेरी वाले और न जाने कौन कौन! ये वो जांबाज हैं जो सिर्फ इसलिए खड़े रहते हैं ताकि हम और हमारा देश चैन से सो सके।

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एक तरफ आकाश में सूरज 44 डिग्री सेल्सियस के तापमान साथ अपने आवेग में रहता है, दूसरी तरफ धरती भी हमें तपाने की साजिश करती है। ऐसे में ज़िंदगी की रफ़्तार हमें अहसास कराती है कि रुकना मना है, थकना मना है। अपनी मंज़िल को पाने के लिए हम आगे बढ़ते हैं। कभी गाड़ियों से तो कभी पैदल, मगर हम आगे बढ़ते हैं। तमाम उपाय कर के हम गर्मी के प्रकोप से ख़ुद को बचा लेते हैं। लेकिन कुछ लोगों के लिए यही गर्मी ज़िंदगी है और उनके सपने भी। वे हमारे लिए दिन-भर धूप में खड़े रहते हैं, काम करते हैं, ताकि हमें परेशानी न हो। ये आर्टिकल उन लोगों को समर्पित करना चाहता हूं, जिनकी वजह से हमारा हिन्दुस्तान चल रहा है।

Image result for farmer deathपसीने से लथपथ, सड़क पर, रेलवे ट्रैक पर, गलियों में और चौक पर, आपको ऐसे लोग ज़रूर मिल जाएंगे, जिन्हें न तो आप पहचानते हैं और न ही वो पहचानते हैं। बस फ़र्क इतना होता है कि आप उन्हें ताकते हैं, लेकिन वो आपको नहीं ताकते होंगे। वो अपने काम में इतने रमे होते हैं कि उनको पसीने भी सुबह की ओस की बूंद की तरह लगते हैं। न खाने की फिकर और न ही पानी पीने की। बस ज़िंदगी के कड़वे सच को लेकर आगे बढ़ रहे हैं। हालांकि उनका भी परिवार होता है और उनकी भी ज़िंदगी होती है। हमारी तरह वो भी सांस लेते हैं, मगर हमारी सांसों का ज़्यादा ख़्याल रखते हैं।

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सीमा और हमारी सुरक्षा के लिए तत्पर रहते ये 'जांबाज़'-

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चौराहों पर बेगानों को अपना बनाती ये 'ट्रैफिक पुलिस'-

Image result for ट्रैफिक पुलिसकरोड़ों भारतीयों को आपस में जोड़ते ये 'ट्रैकमैन'-

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सड़कों पर प्यासे 'रेहड़ी वाले'-

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भूखा किसान, जो हमारी भूख मिटाने के लिए हैं-

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समय से पहले आता 'डिलिवरी बॉय'-

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ख़ुशियों को टोकरी में छिपाए हुए 'फेरीवाले'-

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