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ईसीजी मशीन बंद, मरीज परेशान

Updated: IST surat
न्यू सिविल अस्पताल के ट्रोमा सेंटर में गुरुवार को इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम (ईसीजी) मशीन बंद होने से श्वास में

सूरत।न्यू सिविल अस्पताल के ट्रोमा सेंटर में गुरुवार को इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम (ईसीजी) मशीन बंद होने से श्वास में तकलीफ वाले दो मरीजों को पौन घंटे तक परेशानी झेलनी पड़ी। परिचारिकाओं ने इधर-उधर पूछताछ कर इमरजेंसी वार्ड से ईसीजी मशीन मंगवाई तो मरीजों का ईसीजी हुआ। पहले भी ट्रोमा में ईसीजी मशीन बंद होने के मामले सामने आए हैं। रेजिडेंट डॉक्टरों का कहना है कि बार-बार अधिकारियों को कहने के बाद भी नई मशीन नहीं लाई गई है।

दक्षिण गुजरात के सबसे बड़े सरकारी न्यू सिविल अस्पताल में मरीजों के लिए जरूरी सुविधाओं का अभाव है। मरीज को स्ट्रेचर और व्हीलचेयर नहीं मिलने के कारण बुधवार को दो मरीजों को परिजन गोद में तथा पीठ पर उठाते ले जाते दिखाई दिए थे। गुरुवार को ट्रोमा सेंटर में मरीजों को ईसीजी के लिए करीब पौन घंटे तक इंतजार करना पड़ा।

अडाजण बोरडी विस्तार शीतला चार रास्ता बापूनगर निवासी शांताबाई शंभुभाई (65) को उसका जमाई अशोक बाबू शर्मा गुरुवार सुबह ग्यारह बजे न्यू सिविल अस्पताल लेकर आया था। ट्रोमा सेंटर में मेडिकल ऑफिसर ने उसकी जांच की और मेडिसिन विभाग में रैफर कर दिया। उसे ब्लड प्रेशर और श्वास लेने में तकलीफ समेत अन्य बीमारी थी। कुछ देर बाद मेडिसिन विभाग के रेजिडेंट डॉक्टर ने केस पेपर पर मरीज की फाइंडिंग लिखी और ईसीजी के लिए मशीन लेने चला गया, लेकिन मशीन बंद थी। रेजिडेंट डॉक्टर ने दूसरी मशीन मंगवाई। वह भी बंद थी। रेजिडेंट डॉक्टर ने परिचारिकाओं को कहीं से ईसीजी मशीन लाने को कहा। परिचारिका मेडिकल ऑफिसर के पास शिकायत लेकर पहुंची। मेडिकल ऑफिसर ने उसे आवेदन लिखकर किसी वार्ड से ईसीजी मशीन मंगवाने की सलाह दी। परिचारिका ने दो-चार वार्डों में फोन घुमा कर ईसीजी मशीन की जानकारी निकाली। किसी ने बताया कि इमरजेंसी मेडिसिन विभाग में एक ईसीजी मशीन चालू है।

इसके बाद ईसीजी मशीन लाई गई और शांताबाई का ईसीजी किया गया। इसी तरह चौर्यासी तहसील के हजीरा दामका गांव निवासी चिमन गोविंद पटेल (65) को उसकी पत्नी नर्मदा ट्रोमा सेंटर में लेकर आई थी। उसे भी ईसीजी की जरूरत थी। मशीन बंद होने के कारण इस मरीज को भी करीब एक घंटे तक इंतजार करना पड़ा। पहले भी ट्रोमा सेंटर में ईसीजी मशीन बंद होने से मरीजों को परेशानी होती रही है। अस्पताल अधीक्षक द्वारा समय-समय पर नई मशीन मंगवाने का आश्वासन दिया जाता है, लेकिन ट्रोमा सेंटर की व्यवस्थाओं में सुधार नहीं हो रहा है।

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