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पार्किंग खाली-खाली, दैनिक आय प्रभावित

Updated: IST surat
पुलिस प्रशासन के सख्त रवैये का असर कपड़ा बाजार में महानगरपालिका सुलभ पार्किंग के अलावा विभिन्न टैक्सटाइल

सूरत।पुलिस प्रशासन के सख्त रवैये का असर कपड़ा बाजार में महानगरपालिका सुलभ पार्किंग के अलावा विभिन्न टैक्सटाइल मार्केट परिसर की पार्किंग पर भी इन दिनों पड़ रहा है। अब यहां पहले जैसे वाहनों की रेलमपेल नहीं है और इससे दैनिक आय भी प्रभावित हुई है।

कपड़ा बाजार में ग्रे ताकों की ढुलाई जब से बंद हुई है तब से क्षेत्र में मालवाहक वाहनों की संख्या में भी काफी कमी दर्ज की गई है। अब पहले जैसी चहल-पहल कपड़ा बाजार में नहीं दिख रही। उधर, इसका विपरीत असर क्षेत्र की ही महानगरपालिका सुलभ पार्किंग के अलावा मार्केट परिसर की पार्किंग में भी पड़ रहा है। महानगरपालिका ने क्षेत्रीय यातायात का दबाव कम करने के लिए रिंगरोड फ्लाइओवर ब्रिज के नीचे पार्किंग, अभिषेक मार्केट के पास मल्टीलेयर पार्किंग व खुली पार्किंग, सागर टैक्सटाइल मार्केट व रघुकुल मार्केट के पास खुली पार्किंग की पे एंड यूज की सुविधा मुहैया करवाई है।

इसके अलावा कपड़ा बाजार के कई टैक्सटाइल मार्केट परिसर में भी पार्किंग सुविधा सशुल्क है। पाबंदी से पहले तक यहां रोजाना सैकड़ों वाहनों की आवा-जाही रहती थी और इससे अच्छी आवक भी होती थी, मगर ग्रे ताकों से लदे वाहनों की कपड़ा बाजार क्षेत्र में प्रवेश पर पाबंदी के बाद से यहां के हालात बदल गए है।

अब यहां मनपा सुलभ व मार्केट परिसर की पार्किंग शाम के समय में भी खाली-खाली देखी जा सकती है।

निर्धारित समय का शुल्क

कपड़ा बाजार क्षेत्र की सभी पार्किंग में समय निर्धारित शुल्क है और यह बड़ी गाड़ी का एक घंटे में 60 से 150 रुपए तक है। इसके अलावा रिंगरोड फ्लाइओवर ब्रिज, मल्टीलेयर पार्किंग में 4-5 वाहनों का मासिक किराया 35 हजार तक होता है। वहीं, परवत पाटिया, सारोली, गोडादरा , पुणा बीआरटीएस रूट आदि में मात्र 5 हजार रुपए महीने में पार्किंग की सुविधा मिल रही है।

कागजों पर जागे संगठन

ग्रे ढुलाई की समस्या से जूझ रहे हजारों कपड़ा व्यापारियों की अगुवाई का दावा करने वाले कपड़ा बाजार में करीब दर्जनभर संगठन है, लेकिन मौजूदा मामले में वे फिलहाल कागजों में ही दम भरते प्रतीत हो रहे हैं। ग्रे माल कपड़ा बाजार में नहीं पहुंचने से कपड़ा व्यापारी कई समस्या का सामना पिछले पंद्रह दिन से कर रहे हैं और संगठन अभी भी कागजी घोड़े ही दौड़ाने में व्यस्त है।

समय और पैसे की बचत

ग्रे-फिनिश डिलीवरी टैम्पो कॉन्ट्रेक्टर वेलफेयर एसोसिएशन के प्रमुख संजय पाटिल, उपाध्यक्ष सुरेंद्र नियोल, ट्रस्टी हवासिंह निर्बान आदि ने बताया कि कपड़ा बाजार में समय और पैसे दोनों की मार पड़ती है, जबकि यहां दोनों में ही उन्हें सुविधा महसूस हो रही है। नई व्यवस्था के लिए एसोसिएशन ने शहर पुलिस आयुक्त व टै्रफिक पुलिस का आभार भी माना है।

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