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एलएचबी कोच में असुविधा को लेकर रेल प्रशासन हरकत में

Updated: IST surat
पश्चिम रेलवे द्वारा बान्द्रा टर्मिनस-पटना एक्सप्रेस में एलएचबी कोच लगाए जाने के बाद राजस्थान पत्रिका ने उधना

सूरत।पश्चिम रेलवे द्वारा बान्द्रा टर्मिनस-पटना एक्सप्रेस में एलएचबी कोच लगाए जाने के बाद राजस्थान पत्रिका ने उधना स्टेशन पर रेलवे के सुविधा के दावों की पोल खोल रिपोर्ट प्रकाशित की थी। ट्विटर पर शिकायत के बाद रेलमंत्रालय ने मुम्बई डीआरएम और भुसावल रेल मंडल को कोच अटेन्ड कर एस-2 कोच में लाइट व पंखे चालू करने के निर्देश दिए।

बान्द्रा टर्मिनस से बिहार में पटना और राजस्थान में भगत की कोठी जाने वाली दो ट्रेनों को पश्चिम रेलवे ने परम्परागत रैक के स्थान पर अस्थायी रूप से एलएचबी रैक में परिवर्तितकर चलाने की व्यवस्था की है। बांद्रा टर्मिनस-पटना साप्ताहिक एक्सप्रेस में बांद्रा टर्मिनस से 17 अप्रेल से 26 जून तक अस्थायी तौर पर एलएचबी रैक लगाया जाएगा। उधना रेलवे स्टेशन पर सोमवार रात 8.33 बजे 19049 बान्द्रा टर्मिनस-पटना एक्सप्रेस पहुंची।

राजस्थान पत्रिका ने इस ट्रेन में रेलवे द्वारा सुविधा देने के दावे की पड़ताल की। इसमें यात्रियों ने कुछ कोच में बिजली सप्लाई नहीं होने के कारण लाइट एवं पंखे नहीं चलने की शिकायत की थी। परंपरागत पुराने रैक के मुकाबले इस ट्रेन की रैक एकदम नई थी। कोच के अंदर सीट समेत दूसरी सुविधाएं भी अच्छी थी, लेकिन फिर भी इस नई एलएचबी रैक में सफर करने वाले यात्री नाखुश थे। राजस्थान पत्रिका में 18 अप्रेल को यह खबर प्रकाशित होने के बाद रेलवे प्रशासन हरकत में आ गया। इलेक्ट्रिक विभाग के अधिकारियों ने राजस्थान पत्रिका को बताया कि एस-2 कोच को रेलवे कर्मचारियों ने अटेन्ड किया था।

इसमें कोच के नीचे की साइड में लगा फ्यूज उड़ा हुआ मिला था। रेलवे कर्मचारियों ने फ्यूज को ठीक कर बिजली सप्लाई चालू कर दी। इतना ही नहीं रेलमंत्रालय के द्वारा भुसावल रेल मंडल को भी इस ट्रेन को अटेन्ड करने के निर्देश दिए गए थे। उल्लेखनीय है कि, साप्ताहिक ट्रेन तथा ग्रीष्मावकाश शुरू होने के चलते ट्रेन के सभी कोच यात्रियों से खचाखच भरे हुए थे। एक डिब्बे में करीब डेढ़-दौ सौ यात्री सफर करने को मजबूर हैं। डिब्बे में पैसेज से लेकर दरवाजे और शौचालय तक यात्री भरे हुए थे और कुछ लड़के दरवाजे पर बैठकर यात्रा कर रहे थे। वहीं बिजली सप्लाई बाधित होने के चलते महिला, बच्चे, वृद्ध बिना लाइट व पंखे के सफर कर रहे थे।

एलएचबी कोच में लगा है नया सिस्टम

परंपरागत कोचों में बिजली की सप्लाई बैटरी से होती है। यह बैटरी प्रत्येक कोच के नीचे लगी होती है जो ट्रेन चलने पर रिचार्ज भी होती है। वहीं नए एलएचबी कोच में साउन्ड और एयर पॉल्यूशन को कम करने के लिए नई तकनीक का उपयोग किया गया है। इसमें हेड ऑन जनरेशन तकनीक है। इंजन में ओवर हेड इलेक्ट्रिक वायर से सप्लाई मिलती है जो ट्रांसफार्मर में पहुंचने के बाद 750 और कोच में पहुंचने के बाद 415 और बाद में 110 वोल्ट में कन्वर्ट हो जाती है। इसी से कोच के पंखे व लाइट चलते हैं। एलएचबी रैक में पावर कार्ड भी है, लेकिन बान्द्रा-पटना एक्सप्रेस में कुछ कोच में बिजली की सप्लाई पावर कार्ड और कुछ कोचों में सीधे इंजन से एचओजी के जरिए दी गई थी। इसलिए उधना स्टेशन पर इंजन को रैक से हटाते ही ज्यादातर कोच में बिजली चली गई थी।

सूरत स्टेशन को नहीं दी थी सूचना

सूरत रेलवे स्टेशन के अधिकारियों ने बताया कि बान्द्रा टर्मिनस-पटना एक्सप्रेस का रख-रखाव बान्द्रा में ही होता है। इस ट्रेन के रैक में परिवर्तन कर एलएचबी के नए रैक लगाने की जानकारी सूरत स्टेशन को नहीं दी गई थी। उधना स्टेशन पर कोच में बिजली सप्लाई बाधित होने की शिकायत मिलने पर तैनात रेलवे कर्मचारी कोच के पास पहुंचा। नया रैक देखकर उसे भी समझ में नहीं आया कि आखिर सप्लाई कहां से बंद हुई है। रेलवे कर्मचारी ने अधिकारी को फोन करके जानकारी ली और बाद में एस-2 का फ्यूज ठीक कर ट्रेन को रवाना किया।

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