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जेब पर डाका, धक्के खाने को मजबूर

Updated: IST surat
नोटबंदी के बाद लोग साइबर क्राइम का शिकार हो रहे हैं। किसी के अकाउंट से हजारों तो किसी के अकाउंट से लाखों

सूरत।नोटबंदी के बाद लोग साइबर क्राइम का शिकार हो रहे हैं। किसी के अकाउंट से हजारों तो किसी के अकाउंट से लाखों रुपए पार हो चुके हैं। इन लोगों को अब थाने के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। कइयों ने पुलिस की लाचारी देख कर रुपए वापस मिलने की उम्मीद छोड़ दी है।

राजस्थान पत्रिका ने साइबर क्राइम का शिकार लोगों से बात की। अधिकतर पीडि़तों ने बताया कि जब वह शिकायत दर्ज कराने गए तो उनके साथ पुलिस का रवैया ठीक नहीं था। कुछ मामलों में तो पुलिस ने पीडि़तों से आरोपी जैसा बर्ताव किया, जैसे उन्होंने ही कोई गलत काम कर दिया हो। कुछ मामलों में पुलिस की ओर से जवाब दिया गया- 'अब गए रुपयों को भूल जाओ।Ó

पीडि़तों ने बताया कि अकाउंट से रुपए पार होने के अधिकतर मामलों में पुलिस प्राथमिकी दर्ज करने से इनकार कर देती है। थाने पहुंचने पर पीडि़तों से पुलिस का बर्ताव आरोपी जैसा होता है। पुलिस शिकायत लेने के बजाए पहले काफी खरी-खोटी सुनाती है। इसके बाद कह दिया जाता है कि अर्जी दे जाओ, जांच कर लेंगे। शिकायत दर्ज करने के बाद पीडि़तों की दिक्कतें और बढ़ जाती हैं। पुलिस खुद जांच करने के बजाए पीडि़त को ही बैंक से डिटेल लाने भेजती है। पीडि़त बैंक और थाने के चक्कर काटने को मजबूर हो

जाता है।

प्राथमिकी में आनाकानी

साइबर क्राइम सुलझाने में फिसड्डी साबित हो रही शहर पुलिस अपनी साख बचाने के लिए इस तरह के मामलों में प्राथमिकी दर्ज नहीं करती। बताया जा रहा है कि जो मामले दर्ज होते हैं, उनसे दुगुने मामलों में पुलिस प्राथमिकी दर्ज करने के बजाए सिर्फ अर्जी लेकर पीडि़तों को लौटा देती है, ताकि आला अधिकारियों के समक्ष बताया जा सके कि उनके थाना क्षेत्र में क्राइम रेट कम है।

पुलिस से उम्मीद नहीं

& पुलिस ने अकाउंट से रुपए पार होने की शिकायत तो दर्ज कर ली है, लेकिन मामला सुलझ पाएगा, इसकी उम्मीद नहीं है।

जब मैं शिकायत दर्ज कराने गया, तभी पुलिस ने कह दिया कि रुपए दुबई के अकाउंट में ट्रांसफर किए गए हैं। हम इसकी जांच नहीं कर पाएंगे। एक पुलिसकर्मी ने तो यह तक कह दिया कि इसमें आपकी ही गलती है। बैंक में आवेदन कर इंश्योरेंस के लिए गुहार लगाई है। विक्रम जैन, पीडि़त

वकील के जरिए दर्ज करानी पड़ी शिकायत

& अकाउंट से रुपए पार होने के बाद जब शिकायत दर्ज कराने थाने पहुंचा तो पुलिस ने शिकायत लेने से इनकार कर दिया। अर्जी देने के लिए कहा गया। इसके बाद वकील के जरिए प्राथमिकी दर्ज करवाई। शिकायत दर्ज हुए 25 दिन से अधिक समय हो गया है, लेकिन पुलिस जांच आगे नहीं बढ़ पाई है। मैंने रुपए वापस मिलने की उम्मीद छोड़ दी है।

कृपाल कपुरिया, पीडि़त

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