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Mainpat में मृतकों को जारी Check मामले में दोषियों को छोड़ महिला पटवारी पर कार्रवाई की तैयारी

Updated: IST land acquisition
मैनपाट में बाक्साइट उत्खनन के लिए सीएमडीसी ने मृत व्यक्ति के नाम से भूमि अधिग्रहण का जारी किया था चेक

अंबिकापुर. मैनपाट में बाक्साइट उत्खनन के लिए सीएमडीसी ने वर्ष 2015 में भूमि अधिग्रहण किया था। मुआवजे का चेक मृत व्यक्ति के नाम जारी किए जाने के बाद मामला प्रकाश में आया था। इसके बाद तात्कालीन कलक्टर के आदेश पर एसडीएम व अपर कलक्टर द्वारा जांच तो की गई, लेकिन मामले में गड़बड़ी करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई करने की बजाय वर्तमान पटवारी के खिलाफ नोटिस जारी कर गाज गिराने की तैयारी कर ली गई है।

राजस्व विभाग की लापरवाही से मैनपाट के ग्राम पंचायत बरिमा में सीएमडीसी द्वारा मृत व्यक्तियों के नाम की भूमि को अधिग्रहित कर चेक वितरण किए जाने का मामला सामने आया था। मामले की शिकायत ग्रामीणों द्वारा तात्कालीन कलक्टर ऋतु सैन से की गई थी।

तात्कालीन कलक्टर ऋतु सैन द्वारा पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए अपर कलक्टर व एसडीएम सीतापुर को जांच के आदेश दिए थे। गड़बड़ी के मामले को पत्रिका ने 14 मई के अंक में 'राजस्व रिकार्ड में गड़बड़ी, सीएमडीसी अब मृतकों को बांटेगा मुआवजाÓ शीर्षक से समाचार का प्रकाशन प्रमुखता से किया था।

समाचार प्रकाशित होने के बाद प्रशासनिक अमला हरकत में आया और मामले की जांच भी शुरू की गई। मामले में जांच अधिकारी द्वारा जिस महिला पटवारी को नोटिस जारी कर उससे जवाब मांगा गया, वह भूमि अधिग्रहण के दौरान मैनपाट में पदस्थ ही नहीं थी। इस पूरे मामले में जांच कर रहे अधिकारियों द्वारा कुछ बड़े अधिकारियों को बचाया जा रहा है।

इसके साथ ही मैनपाट में वर्ष 2014-15 में पदस्थ पटवारी को भी क्लीन चीट देने की तैयारी कर ली गई है। इससे पूरी जांच महज एक औपचारिकता बन कर रह गई है। जांच को लेकर ग्रामीणों में भी काफी आक्रोश है। मामले को लेकर एक बार फिर से ग्रामीणों द्वारा एसडीएम से शिकायत की गई है।

नोटिस में पत्रिका की खबर पर लगी मुहर

कलक्टर कार्यालय से जो नोटिस वर्तमान पटवारी रीता कुजूर को जारी किया गया है। उसमें जो जांच के बिन्दू तय किए गए थे, उन सभी प्वाइंट को पत्रिका ने अपने समाचार में प्रमुखता से उठाया था। नोटिस में वास्तविक किसान की जमीन का मुआवजा दूसरे व्यक्ति के नाम पर बनाए जाने का उल्लेख समाचार में किया गया था। इसके साथ ही संयुक्त खाते की जमीन में केवल एक ही किसान के नाम पर मुआवजा बनाए जाने, मुख्य खातेदार के साथ दूसरे लोगों का नाम दिए जाने, जिन किसानों की मृत्यु 5 वर्ष पूर्व हो चुकी है, उनके नाम से मुआवजा बना दिया गया है,

मुआवजा अत्यंत गोपनीय तरीके से बनाया गया तथा आदिवासी व किसानों को इसकी जानकारी नहीं है, इसका उल्लेख भी नोटिस में किया गया है। इन सभी मुद्दों को पत्रिका ने 14 मई को प्रकाशित समाचार पत्र में प्रमुखता से उठाया था। जांच में अधिकारियों द्वारा करने के बाद गड़बड़ी भी मानी गई, लेकिन इसके बावजूद गड़बड़ी करने वाले अधिकारी व पटवारी पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।

बेशकीमती भूमि का जारी कर दिया पट्टा

राजस्व अधिकारियों द्वारा मिलीभगत कर मैनपाट के ग्राम पंचायत केसरा में वन विभाग द्वारा वर्ष 1990 में 200 एकड़ भूमि पर किए गए प्लांटेशन क्षेत्र का पट्टा फर्जीवाड़े तरीके से जारी कर दिया गया है। इसकी वजह से शासन की बेशकीमती भूमि आज अवैध रूप से कब्जा कर लिया गया है। इसकी वजह से ग्राम बरिमा व केसरा की भूमि पर बनने वाला आलू अनुसंधान केंद्र का काम शुरू तक नहीं हो सका है। शासकीय भूमि पर आज भी दबंगों द्वारा आलू की खेती की जा रही है।

2014 में हो चुकी थी भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया

बाक्साइट उत्खनन के लिए सीएमडीसी द्वारा भूमि अधिग्रहण का काम दिसंबर 2014 में पूरा कर लिया गया था। इसके लिए तात्कालीन राजस्व अधिकारियों व पटवारी द्वारा भूमि अधिग्रहण के लिए सभी राजस्व रिकार्ड उपलब्ध कराए थे और उनके द्वारा ही पूरी प्रक्रिया को संपन्न कराया गया था।

2015 में जमा हो गई थी मुआवजे की रकम

रिकार्ड के अनुसार सीएमडीसी द्वारा मार्च 2015 में ही मुआवजे की रकम राजस्व विभाग में जमा करा दिया गया था। इसके साथ ही प्रभावितों की जो सूची राजस्व विभाग द्वारा दी गई थी, उसकी चेक भी जारी कर दी गई थी। लेकिन इस बीच की गई गड़बड़ी में जांच के दौरान तात्कालीन रेवन्यू अधिकारियों के खिलाफ न तो नोटिस जारी किया गया है और न ही कोई जांच का उल्लेख किया गया है।

वर्तमान पटवारी को किया गया निलंबित

तात्कालीन कलक्टर ने मामले की गंभीरता को देखते हुए वहां के पटवारी को हटा दिया था। इसके साथ ही मामले में संलिप्त अधिकारियों का स्थानांतरण भी हो गया था। लेकिन 14 अक्टूबर 2015 को पटवारी का पदभार ग्रहण करने वाली पटवारी रीता कुजूर को जांच अधिकारी द्वारा 10 बिन्दू पर नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया और उन्हें निलंबित कर तहसील कार्यालय सीतापुर में अटैच कर दिया गया।

जबकि जिनके द्वारा गड़बड़ी की गई उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर क्लीन चिट देने की तैयारी कर ली गई है। पटवारी को निलंबित करने के बाद जांच को बंद करने की भी बात सामने आ रही है।

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