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पटाखा दुकानों को लेकर गरमाई छात्र राजनीति, एक विरोध में तो दूसरे को कोई दिक्कत नहीं

Updated: IST protest by NSUI
एनएसयूआई के विरोध को पीजी कॉलेज अध्यक्ष ने बताया अशोभनीय, छात्र संगठनों व प्रशासनिक अधिकारियों के बीच चर्चा के बाद इस वर्ष पीजी कॉलेज मैदान में ही पटाखा दुकानें लगाने का लिया गया निर्णय

अंबिकापुर. पीजी कॉलेज मैदान में एक बार फिर से पटाखा दुकान लगाए जाने का विरोध छात्र संगठन द्वारा शुरू कर दिया गया है। विरोध को लेकर छात्र संगठनों में दो गुट हो गया है। एक पक्ष पटाखा दुकान लगाने का समर्थन कर रहा है। जबकि दूसरा पक्ष दुकान लगाने का विरोध कर रहा है। दुकान के लिए मार्किंग करने पहुंची निगम की टीम को एनएसयूआई का विरोध झेलना पड़ा।

विरोध को देखते हुए निगम अमले ने मार्किंग बंद कर दी और मामले की जानकारी कलक्टर को सौंप दी। दीपावली से चंद दिनों पूर्व छात्र संगठन का विरोध अधिकारियों व शहर के लोगों की समझ से परे है। छात्र संगठन से प्रशासनिक अधिकारियों की चर्चा के बाद इस वर्ष पटाखा दुकानें पीजी कॉलेज मैदान में ही लगाने का निर्णय लिया गया है।

दीपावली पर पीजी कॉलेज मैदान में लगने वाले पटाखा दुकान का एक बार फिर से छात्र संगठन एनएसयूआई द्वारा विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया गया है। पीजी कॉलेज के पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष सतीश बारी व वर्तमान सचिव साक्षी जिन्दल ने पूर्व में पीजी कॉलेज प्रबंधन द्वारा लिए गए निर्णय का हवाला देते हुए मैदान में लगने वाले पटाखा दुकान का विरोध प्रदर्शन शुरू किया गया।

मंगलवार को नगर निगम अमले द्वारा पटाखा दुकानों के लिए मार्किंग की जानी थी। मार्किंग करने पहुंची टीम को एनएसयूआई पदाधिकारियों का विरोध झेलना पड़ा। इस दौरान कुछ देर के लिए गहमा-गहमी की स्थिति भी निर्मित हो गई थी और पटाखा व्यवसायी भी दीपावली नजदीक होने की वजह से कहीं और दुकान लगाने को तैयार नहीं थे।

विरोध को देखते हुए निगम अमले द्वारा पटाखा दुकान के लिए मार्किंग नहीं की गई। इसी दौरान विरोध की जानकारी पीजी कॉलेज के अध्यक्ष उपेन्द्र पाण्डेय व अभाविप के पदाधिकारियों को हुई तो वे भी कॉलेज मैदान पहुंच गए और उन्होंने कहा कि जब कॉलेज मैदान को सुरक्षित रखते हुए कॉलेज को पटाखा दुकान लगाए जाने से आय होती है तो दुकान मैदान में लगनी चाहिए। इसे लेकर अनावश्यक राजनीति नहीं की जानी चाहिए।

कॉलेज गेट पर जमकर की नारेबाजी

पीजी कॉलेज मैदान में पटाखा व्यवसायियों के दुकान लगाने को लेकर एनएसयूआई के पदाधिकारियों के साथ सचिव साक्षी जिन्दल ने प्रशासन व कॉलेज प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इसकी वजह से पटाखा को कड़ा विरोध भी झेलना पड़ा।

विरोध के दौरान मैदान पहुंचे कॉलेज के प्राचार्य डॉ. एसके त्रिपाठी के समक्ष छात्र नेता दुकान नहीं लगाने की जिद पर अड़े हुए थे। छात्रों के विरोध को देखते हुए पटाखा व्यवसायी कलक्टर से मिलने पहुंचे। लेकिन कलक्टर के बैठक में होने की वजह से अपर कलक्टर ने लोगों की समस्या सुनी।

दीपावली से 12 दिन पूर्व कैसा विरोध

एनएसयूआई छात्रसंघ को यह पता था कि पिछले वर्ष कॉलेज प्रबंधन व प्रशासन द्वारा कॉलेज मैदान में पटाखा दुकान नहीं लगाए जाने की बात कही गई थी। लेकिन इस वर्ष फिर से दीपावली के 12 दिन पूर्व जब निगम अमले द्वारा दुकानों के लिए चिन्हांकन का काम शुरू किया गया तब छात्रसंघ पदाधिकारियों को पटाखा दुकानों का विरोध करने का ध्यान आया। जबकि छात्रसंघ द्वारा दो माह पूर्व प्रशासन के सामने अपने विरोध को जताया जाता तो शायद पटाखा दुकान अन्यत्र लगाए जाने पर प्रशासन द्वारा विचार भी किया जाता।

देर शाम हुई बैठक में लिया गया निर्णय

कलक्टर के निर्देश पर अपर कलक्टर एसएन राम द्वारा विरोध करने वाले छात्र संगठन के पदाधिकारियों व पटाखा व्यवसायियों के साथ बैठक की गई। बैठक में पीजी कॉलेज के प्राचार्य डा. एसके त्रिपाठी, एडिशनल एसपी रामकृष्ण साहू, छात्र संघ अध्यक्ष, सचिव व पूर्व अध्यक्ष सतीश बारी भी उपस्थित थे।

देर शाम तक अपर कलक्टर द्वारा छात्र संगठन के पदाधिकारियों को समझाइश दी गई। अंत में यह निर्णय लिया गया कि इस वर्ष पीजी कॉलेज मैदान में पटाखा दुकान लगाया जाएगा, अगले वर्ष इस संबंध में उचित निर्णय लिया जाएगा।

अध्यक्ष ने दुकान लगाने का किया समर्थन

जहां एनएसयूआई द्वारा पीजी कॉलेज मैदान में पटाखा दुकान लगाए जाने का विरोध किया जा रहा था। वहीं पीजी कॉलेज के वर्तमान अध्यक्ष उपेन्द्र पाण्डेय ने मैदान में पटाखा दुकान लगाए जाने का समर्थन किया। उपेन्द्र पाण्डेय ने कहा कि कहा अगर हमारा खेल मैदान प्रभावित न हो साथ ही हॉस्टल व प्रोफेसर कॉलोनी को देखते हुए उपयुक्त सुरक्षा व्यवस्था की जाए तो पटाखा दूकान से छात्रों को कोई परेशानी नहीं है । उन्होंने दुकान लगाए जाने का समर्थन भी किया।

उपेंद्र पाण्डेय ने कहा कि पटाखा दुकान से जो राशि कॉलेज प्रबंधन को मिलती है, उसका उपयोग महाविद्यालय के विभिन्न विकास कार्यों में लगाई जाती है। इससे छात्रों को व महाविद्यालय को कोई नुकसान नहीं है। जिन संगठनों द्वारा इसका विरोध किया जा रहा है। वह अशोभनीय व छात्र हित के विरोध में है।

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