Patrika Hindi News

दुग्धेश्वरनाथ महादेव, यहां जमीन से प्रकट हुए थे शिव, अश्वतथामा रात में करता है पूजा

Updated: IST Dudheshwarnath mahadev temple
रूद्रपुर के दुग्धेश्वरनाथ मंदिर को पुराणों में दूसरी काशी के रूप में जाना जाता है

रूद्रपुर के दुग्धेश्वरनाथ मंदिर को पुराणों में दूसरी काशी के रूप में जाना जाता है। यहां शिवलिंग को महाकालेश्वर उज्जैन का उप ज्योतिर्लिंग माना जाता है। यह शिवलिंग काले पत्थर नीसक पत्थर (कसौटी) का बना है। मान्यता है कि स्पर्श मात्र से मनुष्यों के पापों का नाश हो जाता है और मन्नतें पूरी होती हैं। भारत में वैसे तो अनेकानेक मंदिर शिवालय हैं परन्तु 11वीं सदी में अष्टकोण में बने प्रसिद्ध दुग्धेश्वरनाथ मंदिर में स्थापित शिवलिंग अपनी अनूठी विशेषता के लिए प्रसिद्ध है। स्कन्दपुराण में भी इस मंदिर का वर्णन है तथा इसे द्वाद्वश लिंग की भांति महत्वपूर्ण बताया गया है।

यह भी पढें: ऐसे करें भैरव की पूजा तो हर काम में मिलेगी तुरंत सफलता

यह भी पढें: आज है कालभैरव अष्टमी, पूजा से पूर्ण होंगी सभी मनोकामनाएं

मान्यता है कि कभी यह स्थान घने जंगल से घिरा था और चरवाहे अपनी गायों को चराने के लिये आते तथा कुछ दिनों तक रहते भी थे। बताया जाता है एक गाय ब्रह्म बेला में एक टीले के समीप खड़ी हो जाती थी और उसके स्तनों से स्वत: दूध की धारा टीले पर गिरनी शुरू हो जाती थी। इस बात की जानकारी जब सतासी नरेश को हुई तो उन्होंने उस टीले की खुदाई करानी शुरू करा दी। ज्यों ज्यों खुदाई होती गयी यहां का शिवलिंग नीचे धंसता गया और राजा ने खुदाई बन्द कराकर वहां एक मंदिर का निर्माण कराया। जिसका नाम दुग्धेश्वरनाथ रखा गया।

यह भी पढें: यहां शिवलिंग के निकली थी दूध की धार, दर्शन मात्र से दूर होते हैं सब संकट और पाप

यह भी पढें: भूल कर भी गिफ्ट में न दें ये 5 चीजें वरना तुरंत रूठ जाएगी किस्मत

यहां का शिवलिंग पाताल गामी है। महाशिवरात्रि में यहां भक्तों का तांता लगा रहता है। सलेमपुर क्षेत्र में स्थित दीर्घेश्वरनाथ मंदिर के बारे में मान्यता है कि यहां का शिवलिंग स्वयं-भू है। इस मंदिर में वैसे तो पूरे वर्षभर भक्तों का जमावड़ा लगा रहता है लेकिन शिवरात्रि, श्रावण मास और अधिकमास में मन्नत पूरी होने की आस लेकर आने वाले श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या में भीड़ उमड़ पड़ती है।

यह भी पढें: रात को सोते समय भूल कर भी न करें ये गलतियां, सब चौपट हो जाएगा

यह भी पढें: अगर आपको सुबह-सुबह दिखें ये चीजें तो आप जल्दी करोड़पति बनने वाले हैं

यह भी पढें: शरीर के इन अंगों पर गिरे छिपकली तो बनते हैं करोड़पति

मंदिर के बारे में मान्यता है कि यहां शिवलिंग स्वयं-भू है। अधिकमास में यहां एक महीने मेला जैसा रहता है। कहा जाता है कि महाभारत काल के अश्वत्थामा की यह तपोस्थली है। भक्तों को दीर्घायु को होने का आशीर्वाद देने के कारण इस मंदिर को दीर्घेश्वरनाथ के नाम से जाना जाता है। मान्यता है कि अश्वत्थामा इस मंदिर मे रात के तीसरे पहर पूजा करने आते है। रात में मंदिर बन्द हो जाता है और जब सुबह मंदिर का कपाट खुलता है तो शिवलिंग पर पूजन सामग्री चढ़ी मिलती है।

यह भी पढ़े :
अपने विवाह के सपने को भारत मैट्रीमोनी पर साकार करे।- निःशुल्क रजिस्ट्रेशन करे!
LIVE CRICKET SCORE

लेटेस्ट ख़बरें ई-मेल पर पाने के लिए सब्सक्राइब करें

Patrika.com

लेटेस्ट ख़बरें ई-मेल पर पाने के लिए सब्सक्राइब करें

Dus ka Dum
Ad Block is Banned Click here to refresh the page

???? ??????? ?? ??? ???? ????? ???