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नसबंदी के बाद ठहरा गर्भ तो दो तीस हजार हर्जाना

Updated: IST Tikamgarh news in hindi, madhya pradesh news in hi
बीमा कंपनी के साथ सीएमएचओ एवं बीएमओ को भी देना होगा हर्जाना

टीकमगढ़.़ नसबंदी फेल होने के मामले में जिला उपभोक्ता प्रतितोषण फोरम द्वारा पीडि़त महिला को न्याय दिलाते हुए हर्जाने की राशि जमा कराने के आदेश दिए है। इस आदेश में फोरम ने बीमा कंपनी के साथ ही मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी एवं बीएमओ को भी जुर्माना अदा कराने के आदेश दिए है। नसबंदी फेल होने के केस में यह पहला मामला है, जब सीएमएचओ एवं बीएमओं पर भी जुर्माना लगाया गया है।

अधिवक्ता बीएन शर्माने बताया कि ममता पत्नी नरेश विश्वकर्मा निवासी लिधोरा द्वारा जिला नसबंदी का आपरेशन कराया गया था। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा उन्हें प्रमाण-पत्र भी प्रदान किया गया था। लेकिन इसके बाद भी वह 21 जुलाई 2012 को गर्भवती हो गई थी। गर्भधारण की जानकारी देरी से होने पर उनके द्वारा अनचाहे बच्चें के भरण-पोषण के लिए 30 हजार रूपए की क्षतिपूर्ति की राशि के लिए आवेदन दिया गया था। लेकिन बीमा कंपनी और स्वास्थ्य विभाग ने इसे नियमानुसार आवेदन न करने एवं हितग्राही की ही कमी बता कर क्षतिपूर्ति देने से इंकार कर दिया था। हितग्राही महिला ममता ने सहायता नहीं मिलने से उपभोक्ता फोरम की शरण ली।

इस मामले में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, विकासखण्ड चिकित्सा अधिकारी एवं आईसीआईसीआई लोम्बार्ड कंपनी की गलती मानते हुए इन सभी को क्षतिपूर्ति राशि प्रदान करने के आदेश दिए है। फोरम के अध्यक्ष देवनारायण मिश्रा, सदस्य हरिहर यादव एवं प्रीति परमार ने इन तीनों को क्षतिपूर्ति की राशि 30 हजार रुपए तथा इस राशि पर वाद प्रस्तुत करने के तारीख से 9 प्रतिशत ब्याज, सेवा में कमी के लिए 2 हजार रूपए एवं परिवाद व्यय के 3 हजार रूपए देने का आदेश दिया है।

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