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महाभारत काल का है यह मंदिर, कुंती के लिए अर्जुन इंद्र से लाए थे ऐरावत

Updated: IST Gaja Lakshmi Temple in ujjain
श्राद्ध पक्ष की हाथी अष्टमी पर उज्जैन के गज लक्ष्मी मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ जुटेगी। बताया जाता है कि यह मंदिर महाभारत काल का है और अर्जुन अपनी माता के लिए इंद्र से ऐरावत हाथी मांगकर लाए थे।

उज्जैन. श्राद्ध पक्ष की हाथी अष्टमी पर उज्जैन के गज लक्ष्मी मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ जुटेगी। बताया जाता है कि यह मंदिर महाभारत काल का है और अर्जुन अपनी माता के लिए इंद्र से ऐरावत हाथी मांगकर लाए थे। यह प्रतीमा उसी का प्रतीक स्वरूप है। श्राद्ध पक्ष की अष्टमी पर यहां सौभाग्यवती महिलाएं यहां दर्शन-पूजन करने आती हैं।

महालक्ष्मी की पूजा
श्राद्ध पक्ष की अष्टमी पर शुक्रवार को गज महालक्ष्मी की पूजा की जाएगी। नईपेठ स्थित अति प्राचीन मंदिर में गज पर विराजित महालक्ष्मी का पूजन अर्चन किया जाएगा। मंदिर के पुजारी पं. राजेश शर्मा ने बताया शुक्रवार को सुहागन महिलाएं गजलक्ष्मी का आह्वान कर आवभगत करेंगी।

यह है रोचक कथा
हर साल कौरव व पांडवों की माता भी गज लक्ष्मी का पूजन करती थीं, एक बार ऐसा हुआ कि पांडव अपना सारा राजपाट जुएं में हार गए और दीन हीन होकर जंगलों में रहने लगे। उधर कौरवों को घमंड आया कि लक्ष्मी हमारे ऊपर प्रसन्न है। उन्होंने पूजन की जोर-शोर से तैयारी कर नगर में मिट्टी का विशाल हाथी बनाकर खड़ा किया। इधर, पांडव अपनी माता कुंती के लिए समय पर हाथी नहीं बना सके, तो अर्जुन ने बाण द्वारा चिट्ठी अपने धर्म पिता को भेजी और हाथी का प्रबंध करने को कहा। इंद्रदेव ने स्थिति जान स्वर्ग से सफेद ऐरावत को पृथ्वी पर उतारा। तभी इंद्र ने कौरवों का घमंड चूर करने के लिए वर्षा शुरू कर दी, जिससे उनका मिट्टी का हाथी गल गया।

मिट्टी से बने हाथी पर लक्ष्मी
इस दिन मिट्टी से बने हाथी पर लक्ष्मी की प्रतिमा विराजित कर विधि विधान से पूजन अर्चन किया जाएगा। माता को बेसन एवं आटे से बने गहने अर्पण कर विशेष पूजन किया जाएगा। शर्मा ने बताया इस अवसर पर सुबह 8 बजे से 11 बजे तक नईपेठ स्थित मंदिर में गजमहालक्ष्मी का दुग्धाभिषेक किया जाएगा। इसके बाद शाम को महिलाएं मंगल गीत गाकर मां लक्ष्मी को प्रसन्न कर सुख समृद्धि की कामना करेंगी। मंदिर के पुजारी परिवार की ओर से खीर प्रसाद का वितरण किया जाएगा।

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