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Video Icon Video>>जानिए क्यों निकलती है महाकाल की सवारी...

Updated: IST Know out why Mahakal palki rides in city
श्रावण-भादौ मास में भगवान महाकाल की सवारी निकाली जाने की परंपरा वर्षों से चली आ रही है। चांदी की पालकी में भगवान महाकाल के स्वरूप को विराजित कर भक्तों को दर्शन देने निकलते हैं।

उज्जैन. श्रावण-भादौ मास में भगवान महाकाल की सवारी निकाली जाने की परंपरा वर्षों से चली आ रही है। चांदी की पालकी में भगवान महाकाल के स्वरूप को विराजित कर भक्तों को दर्शन देने निकलते हैं। भक्त भी इन विभिन्न रूपों की एक झलक पाकर धन्य हो जाते हैं। शहर भ्रमण के बाद रात में महाकाल की पालकी वापस मंदिर लौटती है।

ताकि भक्त तक पहुंच सकें भगवान
माना जाता है कि श्री महाकाल की सवारी इसलिए निकाली जाती है ताकि भगवान हर भक्त तक सभी रूपों में पहुंच सकें। सवारी से पहले पुजारी मुघौटै सामने रख महाकाल से इनमें विराजित होने का आह्वान करते हैं। ऐसा इसलिए ताकि हर रूप में भक्त भगवान के दर्शन कर सके। खासकर वे जो किसी कारण से मंदिर नहीं आ सकते।

Know out why Mahakal palki rides in city

पालकी में भगवान का नगर भ्रमण
यह परंपरा अनादिकाल से मानी गई है। यही वजह है कि श्रावण-भादौ मास में जब तक सवारी लौटकर नहीं आती, महाकाल की संध्या आरती नहीं होती। ऐसा माना जाता है कि प्रभु मुखौटे में विराजित हो नगर भ्रमण पर गए हैं। उज्जैन में भगवान शिव राजा के रूप में विराजमान हैं। श्रावण मास में वे अपनी प्रजा का हालचाल जानने के लिए नगर भ्रमण पर निकलते हैं।

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