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देखें वीडियो...सज रहे भोले बाबा...निराले दूल्हे में...महाकाल में शिवरात्रि उत्सव

Updated: IST made it groom mahakal in shiv navratri festival
शिवनवरात्रि की शुरुआत के साथ ही हल्दी, सुगंधित उबटन लगाने के बाद शृंगार कर बाबा महाकाल दूल्हा बने। भगवान का नौ दिन तक अलग-अलग शृंगार होगा।

उज्जैन.बाबा महाकाल के दरबार में गुरुवार से शिवरात्रि उत्सव आरंभ हुआ। देश का एकमात्र ऐसा ज्योतिर्लिंग है, जहां नौ दिनों तक शिवरात्रि उत्सव मनाया जाता है। इसे शिव नवरात्रि भी कहा जाता है। प्रथम दिन बाबा को सुगंधित द्रव्यों से स्नान के बाद नवीन वस्त्र धारण कराए गए।

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हल्दी, सुगंधित उबटन

बाद में भांग शृंगार कर उन्हें दूल्हा स्वरूप में सजाया गया। शिवनवरात्रि की शुरुआत के साथ ही हल्दी, सुगंधित उबटन लगाने के बाद शृंगार कर बाबा महाकाल दूल्हा बने। भगवान का नौ दिन तक अलग-अलग शृंगार होगा। गर्भगृह में प्रतिदिन तीन घंटे अभिषेक होगा। इसके चलते तड़के से दोपहर तक गर्भगृह में प्रवेश बंद रहेगा।

महाकाल मंदिर में नौ दिनी शिवनवरात्रि पर्व
महाकाल मंदिर में नौ दिनी शिवनवरात्रि पर्व गुरुवार से शुरू हुआ। हल्दी, चंदन, सुगंधित उबटन स्नान के बाद राजा महाकाल को दूल्हा बनाया गया। दिन में बाबा का आकर्षक शृंगार हुआ। भगवान महाकाल को कटरा, मेखला, दुपट्टा, मुकुट, मुंडमाल छत्र आदि से शृंगारित कराया गया।

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महाकाल को नए वस्त्र
शाम को बाबा महाकाल को नए वस्त्र धारण कराए गए। इसके पूर्व आरती बाद नैवेद्य कक्ष में चंद्रमौलेश्वर, कोटितीर्थ कुंड पर कोटेश्वर, रामेश्वर महादेव की पूजा से पर्व की शुरुआत की गई। 11 पंडित ने गर्भगृह में अभिषेक प्रारंभ किया। प्रतिदिन सुबह तीन घंटे अभिषेक होगा। यह क्रम नवरात्रि के नौ दिनों तक चलेगा। 25 फरवरी तक पर्व के चलते गर्भगृह में तड़के चार बजे भस्मारती के बाद से दोपहर तक तो प्रवेश बंद रहेगा। शाम को नित-नए शृंगार होंगे व मौजूदा भीड़ अनुसार प्रवेश निषेध की व्यवस्था तय की जाएगी।

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एक ही बार हल्दी
मान्यता के अनुसार भगवान महाकाल को हल्दी अर्पित नहीं की जाती है। दरअसल हल्दी स्त्री सौंदर्य प्रसाधन में प्रयोग होती है। इसके अलावा हल्दी की तासीर गर्म होती है। महाकाल को शीतल पदार्थ अर्पित किए जाते हैं। ऐसे में सिर्फ वर्ष में एक बार शिवनवरात्रि के दौरान जिस तरह विवाह में दूल्हे को हल्दी लगाई जाती है, उसी प्रकार भगवान महाकाल को हल्दी लगाई जाती है। इसके साथ ही केसर, चंदन, इत्र और अन्य सुगंधित पदार्थ का उबटन लगाया जाता है।

महाकाल का कब कौन सा शृंगार
17 फरवरी शेषनाग
18 फरवरी घटाटोप
19 फरवरी छबीना
20 फरवरी होलकर
21 फरवरी मनमहेश
22 फरवरी उमामहेश
23 फरवरी शिवतांडव
24 फरवरी महाशिवरात्रि
25 फरवरी सप्तधान, सेहरा

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