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निर्भीक बचपन: खाकी सुरक्षा और मदद जरूर करेगी, आप बस पहल तो करें

Updated: IST patrika nirbhik bachpan campaign at kalidas montes
आपके स्कूल से सौ कदम की दूरी पर ही पुलिस कंट्रोल रूम और महिला थाना है, बस आवाज भी लगा दोगे तो मदद के लिए दौड़े चले आएंगे। खाकी तो आपकी सुरक्षा के लिए 24 घंटे मुस्तैद है।

उज्जैन. आपके स्कूल से सौ कदम की दूरी पर ही पुलिस कंट्रोल रूम और महिला थाना है, बस आवाज भी लगा दोगे तो मदद के लिए दौड़े चले आएंगे। खाकी तो आपकी सुरक्षा के लिए 24 घंटे मुस्तैद है बस आप समस्या को अपराध का रूप लेने से पहले ही बता देंगे तो उसे समय पर रोक पाएंगे।

छात्राओं से सुरक्षा को लेकर बात की
शुक्रवार को पुलिस कंट्रोल रूम के समीप दशहरा मैदान मार्ग स्थित कालिदास मांटेसरी हायर सेकंडरी स्कूल में छात्राओं से सुरक्षा को लेकर बात की गई। पत्रिका के निर्भीक बचपन अभियान की कड़ी में महिला थाना की सहायक उपनिरीक्षक जुबेदा शैख,एसपी आफिस की शिकायत शाखा से रीता तिवारी व दीक्षा पांडे ने छात्राओं को जागरुक किया। सहायक उपनिरीक्षक शेख ने छात्राओं से कहा कि अगर आपके मन में कोई डर है सबसे पहले उसे निकाल दीजिए। पुलिस को देखकर जेहन में हमेशा यह बात रखें कि उससे आपको मदद ही मिलेगी। दूसरी महत्वपूर्ण बात जो लड़कियों को अक्सर सभी कहते हैं कि वह परिवार में माता-पिता व स्कूल में टीचर से हर बात शेयर करें जो जरूरी है। बतौर उदाहरण आपको स्कूल के बाहर कोई लगातार वॉच कर रहा है तो समझ लीजिए कि वह सही नहीं है। उसका साहस अपराध के लिए बढ़े इससे पहले ही हमें बता दें ताकि सही ढंग से इलाज कर सके। कार्यक्रम में प्राचार्य शर्मिला केकरे, साधना बेनर्जी, कल्पना सेठी, अपर्णा मिश्रा, सुधा भटनागर, सुषमा पुरकर, रश्मि पंडित सहित अन्य शिक्षिकाएं मौजूद रहीं।

लड़की चुप रही इसलिए परेशानी में आ गई
एक प्रकरण का हवाला देते हुए शेख ने कहा कि एक लड़की इसी तरह की घटना का शिकार बनी। वह चुप रही, स्कूल व घर में किसी को कुछ इसलिए नहीं बताया कि क्या होगा। उसके चुप रहने के कारण वह मुसीबत में और फंस गई, लेकिन बाद में मदद के लिए पुलिस के पास ही आना पड़ा। वह लड़की शुरुआत में ही सबकुछ बता पुलिस के पास आ जाती तो शायद तकलीफ व डिप्रेशन नहीं सहना पड़ता।

प्रलोभन देने वाले बहुत मिलेंगे
पुलिस कंट्रोल की शिकायत शाखा अधिकारी रीता तिवारी व दीक्षा पांडे ने छात्राओं से कहा आपको प्रलोभन देने वाले बहुत मिलेंगे। परिचित भी हो सकते हैं। आपको यही समझना है कि क्या सही है और क्या गलत। किसी के बहकावे में न आएं। परिचित आपका फायदा उठाने की कोशिश करें तो सबसे पहले माता-पिता को बताएं।

मैं डंडा लेकर निकलती हूं
स्कूल की वरिष्ठ शिक्षिका शीला पाठक ने बताया कि 12 वीं कक्षा की बड़ी लड़कियां स्कूल में पढ़ती हैं। स्कूल के बाहर कोई रोज बेवजह खड़ा मिलता है तो मैं उसे रौबदार आवाज में चलता कर देती हूं। अगर लड़कियों के बारे में पता चलता है स्कूल की छुट्टी के बाद वे कोठी रोड पर कहीं रुक गई है तो मैं खुद डंडा लेकर जाती हूं। कहीं रास्ते में लड़कियों को देखती हूं तो डांटते हुए घर भेजती हूं।

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