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सावन मास पर विशेष: मेलेश्वेर महादेव मंदिर की पावन भूमि पर भीम के पुत्र ने 1200 वर्ष तक किया था यज्ञ

Updated: IST mp news, patrika new, month of sawan, religion, wo
आलोट जागीर में मेलेश्वर महादेव का प्राचीन भव्य शिव मंदिर है। श्रावण मास में यहां अखण्ड रुद्राभिषेक का आयोजन होता है। इस पावन अवसर पर भगवान शिव के पूजन अभिषेक व श्रृगंार के साथ ही ग्रामीण क्षेत्र के श्रद्धालु भजन व कीर्तन करते हैं।

उन्हेल. यहां से 13 किमी दूर आलोट जागीर में मेलेश्वर महादेव का प्राचीन भव्य शिव मंदिर है। श्रावण मास में यहां अखण्ड रुद्राभिषेक का आयोजन होता है। इस पावन अवसर पर भगवान शिव के पूजन अभिषेक व श्रृगंार के साथ ही ग्रामीण क्षेत्र के श्रद्धालु भजन व कीर्तन करते हैं।

किवदंति के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण के पाण्डव, युधिष्ठिर, अर्जुन, भीम, नकुल एवं सहदेव भक्त थे। श्री कृष्ण की कृपा से ही पाण्डवों ने कुरुक्षैत्र के मैदान मे कौरव सेना के सेनापतियों को परास्त किया था। पांडवों में भीम के पुत्र ने 1200 वर्ष तक मेलेश्वर महादेव के यहां पर यज्ञ किया था। यज्ञ की भस्म के टीले पर यह भव्य शिव मंंिदर है। यहां स्थित टीले पर जब खुदाई की जाती है तो यज्ञ की भस्म मिलती है। भस्म मस्तक पर लगाने पर चंदन सी शीतलता प्राप्त होती है। मंदिर के समीप ही नवग्रह का मंदिर स्थित है। त्रिवेणी संगम शिप्रा, गंम्भीर, व फाल्गु नदी गुप्त है। विगत बारह वर्षों से मेलेश्वर महादेव पंचकोशी यात्रा का आयोजन हो रहा है। यात्रा रात्रि पडाव ऐतिहासिक महत्व के साथ-साथ दर्शनीय भी धुलेट के यहां भगवान भोलेनाथ के दर्शन करने के लिए राजा विक्रमादित्य पधारते थे। धन्वंतरि ने इसी स्थान पर तपस्या की थी। बिलकेश्वर महादेव यह स्थान साधु संतों की तपस्थली के साथ ही गंगी नदी के उद्गम का भी स्थान है। नारायणा- कृष्णा सुदामा धाम के नाम से यह स्थान प्रसिद्ध है। भगवान इस गांव में अपने सखा सुदामाजी के साथ गुरु पत्नी के कहने पर भोजन बनाने के लिए लकड़ी लेने के लिए आए थे। आज भी यहां पर भगवान श्री कृष्ण व सुदामा जी की लकड़ी के अलग-अलग पेड़ है। भारत वर्ष में कृष्ण, सुदामा का यह अद्भुत मंदिर है जो मित्रता की प्रेरणा देता है। श्रावण मास में उन्हेल से मेलेश्वर महादेव की पैदल यात्रा निकाली जाती है, जिसमें हजारों श्रद्धालु शरीक होते हैं। मंदिर के चहुंओर का वातावरण मन को आनंदित करता है। एक और जहां त्रिवेणी संगम का अद्भुत दृश्य देखकर मन प्रसन्न होता है। मेवाड़ क्षेत्र के पं. चुन्नीलाल शर्मा ने घोर परिश्रम करके इसकी कीर्ति में चार चांद लगाए। मेलेश्वर महादेव का वर्णन महाकवि कालिदास ने भी किया है।

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