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गांधी जयंती पर टीचर ने लड़की का किया था रेप, अब मिली सलाखों की सजा

Updated: IST the school teacher did Rape
बडऩगर के सरकारी स्कूल में पढऩे वाली सातवीं कक्षा की छात्रा के साथ गांधी जयंती पर शिक्षक ने गंदा काम किया। मैदान में खेल रही छात्रा को सरस्वती जी की मूर्ति साफ करने के बहाने स्कूल के कमरे में बुलाया।

उज्जैन. बडऩगर के सरकारी स्कूल में पढऩे वाली सातवीं कक्षा की छात्रा के साथ गांधी जयंती पर शिक्षक ने गंदा काम किया। मैदान में खेल रही छात्रा को सरस्वती जी की मूर्ति साफ करने के बहाने स्कूल के कमरे में बुलाया। बच्ची के साथ गलत काम किया, वह चीखी भी, लेकिन दशहत मन में इतनी भर गई थी कि दो-तीन तो किसी को कुछ बता ही नहीं सकी। स्कूल की शिक्षिका ने बच्ची के मुरझाए चेहरे को पढ़ सच्चाई पता लगा परिजनों को बुलवा रिपोर्ट दर्ज करवाई। कोर्ट ने भी शिक्षक को दस साल की सजा सुनाते हुए फैसले में लिखा कि असहाय बालिका के साथ यह कृत्य घृणित अपराध है, जिसमें नरम रुख अपनाया नहीं जा सकता है।

10 वर्ष की सजा
बडऩगर क्षेत्र के असलावदा का यह प्रकरण है, जिसमें अपर सत्र न्यायाधीश बडऩगर एसके जोशी ने आरोपी शिक्षक नियाज पिता सलीम खान निवासी असलावदा को 10 वर्ष की सजा सुनाई। साथ ही पांच हजार रुपए के अर्थदंड से भी दंडित किया। अपर सत्र न्यायाधीश जोशी ने फैसले के 48 वीं बिंदु में लिखा कि अभियुक्त का यह प्रथम अपराध है और वह शिक्षक है, परंतु अभियुक्त के द्वारा एक असहाय विद्यार्थी के साथ बलात्संग का घृणित अपराध उसे स्कूल के कमरे में बंद करके किया गया है। अपराध की प्रकृति गंभीर है। अत: इस अपराध में किसी भी तरह से नरम रुख अपनाया जाना उचित नहीं है। इस प्रकरण में शासन की आेर से पक्ष समर्थन अतिरिक्ति लोक अभियोजक आरएल मिश्रा व एडीपीओ केलकर ने किया।

the school teacher did Rape

यह था मामला
2 अक्टूबर 2015 को गांधी जयंती के दिन बालिका गांव की लड़कियों के साथ खेल रही थी। शिक्षक नियाज खान ने स्कूल में मूर्ति सफाई के बहाने तीन लड़कियों को बुलवाया। दो को थाली धोने का बोल स्कूल के बाहर भेज दिया। उन्हें कहा कि बाहर ही खड़े रहना व कोई आए तो आवाज लगा देना। एक बालिका को अंदर ही तस्वीर साफ करने के बहाने रोक लिया। उसे ऑफिस लेकर गया व गंदा काम किया।

बालिका स्कूल से रोते हुए बाहर निकली
बाहर खड़ी दोनों छात्राओं के सामने बालिका स्कूल के अंदर से रोते हुए बाहर निकली और घर की आेर दौड़ लगा दी। दस दिन बाद स्कूल शिक्षिका ने बालिका की मायूसी देख उससे अकेले में बात की तो घटना का पता चला, इसी के बाद उसके परिजनों को फोन कर बुलवा इंगोरिया थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाई। पुलिस ने भी उक्त केस में ठोस सबूत एकत्रित कर कोर्ट में प्रस्तुत किए और आरोपी को कड़ी सजा हुई।

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