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200 साल पुरानी परम्परा - एक जैसी वेशभूषा महिलाएं, अपनी पत्नी को पहचान उडे़ला रंग 

Updated: IST Women of the same costume, Identify your wife Flyi
पत्नी को पहचान पति ने उड़ेला रंग,दो सौ सालों से चली आ रहीपरंपरा,समाज की गेर भी निकाली

उज्जैन. माली समाज द्वारा होली के सातवें दिन अनोखी होली खेली जाती है। इसमें पति को घंूघट में खड़ी पत्नी को पहचान कर रंग लगाया जाता है। रविवार को उर्दूपूरा में पति-पत्नी धणी-लुगाई की अनूठी होली का आयोजन किया गया। इसके लिए दो बड़े कड़ाव रंग भर कर रखा गया था। क्षत्रिय मारवाड़ी माली समाज की महिला परंपरागत वेशभूषा में घंूघट में खड़ी हो, पति को पहचान के लिए सांकेतिक सूचना दे रही थी। इस आधार पर पति द्वारा पत्नी का रंग डाल जा रहा था। होली के इस क्रम में गलत महिला पर रंग डालने की स्थिति में हंसी के फव्वारे भी चलते रहे।

वर्षों से चली आ रही परंपरा
वर्षों से चली आ रही परंपरा को निभाते हुए समाज द्वारा सीतला सप्तमी की शाम को उर्दूपुरा स्थित समाज की धर्मशाला के सामने पति-पत्नी ने कड़ाव होली खेली। इस दौरान समाज के दंपत्तियों ने बारी-बारी से एक-दूसरे पर रंग डाला। यह परंपरा लगभग दो सौ सालों से चली आ रही हैं जिसमें अब युवा भी बढ़चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं। इस आयोजन में समाजजन बड़ी संख्या में शामिल हुए। वहीं इस अवसर समाज की गेर भी निकाली गई।होली के सातवे दिन यानि सीतला सप्तमी पर वर्षों से चली आ रही परम्परा को निभाते हुए क्षत्रिय मारवाड़ी माली समाज द्वारा इस वर्ष भी सीतला सप्तमी की शाम को कढ़ाव होली खेली गई।

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