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पीएम के 6 घंटे से अधिक एवं 18 घंटे से कम समय में हुई मौत

Updated: IST PM over 6 hours and 18 hours less than death news
बिसरा को जांच के लिए भेजा सागरकैदी की मौत मामले की सुनवाई 5 अक्टूबर को

उमरिया। चार सदस्यीय चिकित्सको की टीम ने पीएम रिपोर्ट कलेक्टर को सौंप दी है। बताया जाता है कि पीएम रिपोर्ट के मुताबिक कैदी की मृत्यु पीएम के 6 घंटे से अधिक एवं 18 घंटे से कम समय में हुई है। इसके अलावा और भी कई तथ्य पीएम रिपोर्ट के बाद चिकित्सकों की टीम ने अपनी रिपोर्ट में दी। विदित हो कि रविवार को जेल अभिरक्षा में उपचार के दौरान विचाराधीन कैदी संजय पिता पंजाब सिंह उम्र 25 वर्ष निवासी ग्राम चंसुरा की मौत हो गई थी जिसके बाद तकरीबन 11 घंटे बाद दोपहर 1 बजे शव का पीएम कराया गया था। मौत के बाद पीडि़त परिवारजनों ने इस गंभीर मामले में जमकर हंगामा मचाया था। उनका आरोप था कि कैदी की मौत स्वाभाविक नही है जिस पर कलेक्टर ने मजिस्ट्रटियल जांच के आदेश के साथ-साथ चार सदस्यीय डॉक्टर्स टीम की अगुआई में वीडियो ग्राफी के दौरान पीएम कराने निर्देश दिये थे। गौरतलब है कि शासकीय चिकित्सक डॉ. वीपी पटेल, डॉ. वीके प्रजापति, डॉ. सीपी शाक्य, डॉ. प्रमोद द्विवेदी के द्वारा मृतक कैदी का पीएम कराया गया है। कैदी की मौत के बाद बिसरा को भी जांच के लिए सागर भेजा गया है जिसकी रिपोर्ट आने के बाद इस मामले में कैदी के मौत का मामला और साफ हो सकेगा। बिसरा की जांच के दौरान कैमिकल एनालाईसिस, हिस्ट्रो पैथालॉजिकल एनालाईसिस सहित कई अन्य जांचे की जाती हैं, जिससे मृतक के मृत्यु के कारण स्पष्ट होते हैं।
रेवा खंड ने सौंपा ज्ञापन
बुधवार को जय रेवाखंड ने राज्यपाल के नाम डिप्टी कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा, जिसमें मृतक कैदी की मौत को लेकर उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। ज्ञापन में इस बात का भी उल्लेख है कि जेलर के ऊपर सख्त कार्यवाही की जाए एवं पीडि़त परिजनों को मुआवजा राशि दी जाए। रेवाखंड ने ज्ञापन में यह भी कहा कि इस गंभीर मामले में अगर लापरवाही बरती गई एवं उच्चस्तरीय जांच नही की गई तो प्रदर्शन एवं आन्दोलन किया जाएगा। ज्ञापन के दौरान जय रेवाखंड के अध्यक्ष राहुल द्विवेदी सहित अन्य कार्यकर्ता मौजूद थे।
कैदी के मौत कारणों की जानकारी निष्पक्ष करने को लेकर प्रशासन ने एसडीएम जेपी यादव को मजिस्ट्रीरियल जांच अधिकारी नियुक्त किया है। कलेक्टर अभिषेक ङ्क्षसह ने इस मामले में एसडीएम को निर्देशित किया है कि एक माह की समयावधि में जांच प्रतिवेदन स्पष्ट अभिमत के साथ पेश करें। एसडीएम ने बताया कि जांच की निष्पक्षता को लेकर 5 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई में पीडि़त परिजनों के साथ-साथ अन्य कोई भी व्यक्ति जांच के दौरान शामिल हो सकता है।

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