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Photo Icon 'राम सर्किट में शामिल होने से अंतर्राष्ट्रीय मानचित्र में आया परियर' 

Updated: IST kanpur
जनपद में जानकीकुंड परियर का पौराणिक व एतिहासिक महत्व है।

उन्नाव। जनपद में जानकीकुंड परियर का पौराणिक व एतिहासिक महत्व है। उन्नाव-हरदोई मार्ग पर स्थित चकलवंशी से लगभग 10 किलोमीटर दूर परियर मार्ग पर स्थित वाल्मीक आश्रम में आस-पास से ही नहीं दूर दराज क्षेत्रों से देवी भक्त माता के दरबार में हाजिरी लगाने आते हैं। माता सबकी मुरादें पूरी करती हैं। मंदिर परिसर में वह स्थान भी है जहां पर लव-कुश ने मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के द्वारा छोड़े गए अश्वमेध यज्ञ के श्वेत घोड़े को पकड़ कर वटवृक्ष में बांधा था। यह वटवृक्ष आज भी परिसर में आने वाले भक्तों को छाया प्रदान करता है।

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जानकी कुंड कूप की भक्ति भाव से होती है पूजा अर्चना

माता जानकी ने जिस स्थान पर भू-समाधि ली थी, उस स्थान पर पाताल तोड़ कुआं स्थित है। मान्यता के अनुसार पाताल तोड़ कुएं से ही निकली मां जानकी की अष्टधातु की मूर्ति आज भी पुत्र लव कुश के साथ मंदिर में स्थापित है। इसके साथ ही नवाबगंज वर्क उसे हिंदी में जानकी पुत्र लव कुश के द्वारा मां दुर्गा व कुशहरी देवी का मंदिर भी स्थापित है। जानकी कुंड परिवार का महत्व उस समय और बढ़ गया। जब केंद्र सरकार द्वारा बनाए जा रहे राम सर्किट में परियर को भी स्थान दिया गया, इसलिए क्षेत्र में के लोगों में काफी उत्साह है।

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मुख्यालय से 27 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है जानकी कुंड परियर

जानकीकुंड को केंद्र सरकार द्वारा बनाए जा रहे राम सर्किट में शामिल करने से मंदिर प्रबंधन के साथ साथ क्षेत्र के लोगों में भी उत्साह है। त्रेतायुग में स्थापित सिद्धपीठ जानकी माता मंदिर जनपद मुख्यालय से लगभग 27 किलोमीटर दूर स्थित हैै। इसमें मां जानकी व पुत्र लव-कुश की मूर्तियां स्थापित हैं। श्री राम द्वारा धोबी की बातों में आकर मां जानकी का परित्याग कर दिया था। छोटे भाई लक्ष्मण के द्वारा गर्भावस्था में जंगल में माता जानकी को छोड़ दिया गया था। जहां महर्षि वाल्मीकि ने मैया सीता को अपने आश्रम में उन्हें आश्रय दिया। गंगा तट के किनारे स्थित महर्षि वाल्मीक का वही आश्रम है जहां माता जानकी ने लव व कुश को जन्म दिया। वीर पुत्र लव-कुश कि शिक्षा दीक्षा महर्षि वाल्मीक की देख रेख में पूरी हुई। जहां उन्होंने अस्त्र-शस्त्र चलाने की भी शिक्षा ग्रहण की।

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वट वृक्ष आज भी भक्तों को दे रहा छाया

इसी बीच मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम द्वारा अश्वमेध यज्ञ का आयोजन किया गया। अश्वमेध यज्ञ के लिए छोड़े गए श्वेतघोड़े को लव-कुश ने पकड़कर वटवृक्ष में बांध दिया। अश्वमेध यज्ञ के घोड़े को मुक्त कराने के लिए अयोध्या से लंकापति रावण पर विजय प्राप्त करने वाले सभी वीर योद्धा भेजे गए। परंतु लव व कुश की वीरता के आगे उनकी एक न चली। सभी पराजित हुए। लव कुश ने संकट मोचन हनुमान को वट बृक्ष में ही बांध दिया। अश्वमेघ यज्ञ के घोड़े को पकड़े जाने और वीर सैनिकों की पराजय का संदेश मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम स्वयं मैदान में उतरे। जहां उनका सामना लव-कुश से हुआ।
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महर्षि वाल्मीक व मैया जानकी ने श्रीराम से कराया लव-कुश का परिचय

इसके पहले कि कोई अनहोनी होती महर्षि वाल्मीकि और माता जानकी ने आकर लव-कुश का परिचय श्रीराम से कराया। तत्पश्चात श्री राम ने माता जानकी को अयोध्या वापस चलने को कहा। परंतु मां जानकी ने अयोध्या न जाकर परियर स्थित आश्रम में धरती माता से प्रार्थना कर उनकी गोद में समा गई। जहां आज भी पाताल तोड़ कुआं जानकीकुंड कूप के रूप में स्थापित है।

केंद्र सरकार द्वारा पर्यटन स्थल घोषित किया गया

शासन द्वारा जानकी कुंड परियर को पर्यटक स्थल घोषित कर दिया गया है इससे यहां का चौमुखी विकास किया जा रहा है। मां त्रेतायुगी सिद्ध शक्ति पीठ मैं मां जानकी अधिष्ठात्री देवी के रूप में स्थापित है। माता के दर्शन के लिए दूर दूर से लोग आते हैं। केन्द्र सरकार द्वारा पर्यटन स्थल घोषित करने के बाद जानकी कुंड परिसर में सत्संग भवन व धर्मशाला का निर्माण कराया जा रहा है। वही भक्तों द्वारा 51 फुट की विशालकाय संकट मोचन हनुमान की मूर्ति की स्थापना की जा रही है। जिसके शीघ्र ही पूरा होने का अनुमान है। मंदिर परिसर में पूरे वर्ष धार्मिक आयोजन के कार्यक्रम चला करते हैं। मांगलिक कार्यक्रम भी संपन्न होते हैं।

जानकी जयंती पर होता है कन्या भोज व विशाल भंडारे का आयोजन

वैशाख शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को सीता जयंती धूमधाम से मनाई जाती है। जिसमें अखंड रामायण, पूजा-पाठ के साथ कन्या भोज व विशाल भंडारे का भी आयोजन किया जाता है। जिसमें बड़ी संख्या में साधनों से कन्याओं को लाया जाता है। मंदिर के व्यवस्थापक व मुख्य पुजारी रमाकांत त्रिपाठी जानकी कुंड परिवार को राम सर्किट में शामिल करने इसे उत्साहित है। उन्होंने बताया कि राम सर्किट में जानकीकुंड को शामिल करने से क्षेत्र में पर्यटन के और भी अवसर उपलब्ध होंगे। मुख्य पुजारी ने बताया कि मंदिर परिसर में के बगल में एक भव्य मंदिर का निर्माण कराया जा रहा है। जिसमें राम दरबार, भोले बाबा, मैया की भव्य प्रतिमा स्थापित किया गया है।

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