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बिलेश्वर महादेव में दूर-दूर से भक्त आते हैं दर्शन के लिए

Updated: IST sawan
मान्यता है कि श्रीकृष्ण ने अपने हाथ से शिवलिंग बनाकर पूजा अर्चना की थी।

उन्नाव। सावन के दूसरे सोमवार को शिवालयों में भक्तों की भीड़ उमड़ी। भक्तों की भक्ति पूजा अर्चना में साफ झलक रही थी। शिवलिंग का जलाभिषेक करके भक्तगण भोले को मनाने का प्रयास कर रहे थे। शिवालय के चारों तरफ भोले को प्रिय पूजन सामग्री की दुकानें सजी थीं। मंदिर व्यवस्थापक के साथ पुलिस प्रशासन ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए तमाम उपाय किए थे। कई मंदिरों में बैरीकेटिंग की व्यवस्था की गई थी।

सावन के दूसरे सोमवार पर विभिन्न स्थानों पर भंडारा आदि की भी व्यवस्था की गई। शहर के विभिन्न क्षेत्रों में भगवत कथा का भी आयोजन किया जा रहा है। जिसमें बड़ी संख्या में श्रोतागण पहुंच पुण्य के भागी बन रहे हैं। वहीं विभिन्न स्थानों पर उमड़ रही भक्तों की भीड़ को देखते हुए व्यापारियों ने रोजमर्रा की जरूरतों के लिए दुकानें सजा रखी हैं और मंदिर परिसर में मेले स्वरूप ले लिया है।

धनुषाकार जलस्रोत आज भी आस्था का केंद्र है
जनपद मुख्यालय से लगभग 35 किलोमीटर दूर पुरवा तहसील में स्थित बिलेश्वर महादेव विशाल प्रांगण में विराजमान हैं। बिलेश्वर महादेव मंदिर का इतिहास महाभारत से जुड़ा है। मान्यता है कि भगवान श्री कृष्ण ने स्वयं मिट्टी का शिवलिंग बनाकर यहां पर पूजन किया था। बिलेश्वर महादेव मंदिर के विषय में विख्यात है कि महाभारत युद्ध शुरू होने से पूर्व भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन के साथ मोरध्वज की नगरी जा रहे थे। इस दौरान उन्होंने कन्हैया ने धनुर्धर अर्जुन के साथ यहां पर रात्रि निवास किया था।

रात्रि निवास के दौरान प्यास लगने पर धनुर्धर अर्जुन ने तीर मारकर जल का स्रोत बना दिया, जिससे उन्होंने प्यास बुझाई। बिलेश्वर मंदिर के सामने जलस्रोत आज उन्हीं घटनाओं का प्रमाण है, जिसके लिए वह विख्यात है। जो धनुष आकार का जल स्रोत आज भी विद्यमान है। धनुर्धर अर्जुन ने जल स्रोत की सुरक्षा और जल को बचाने के लिए उन्होंने धनुष रख दिया था। जिससे जलस्रोत का आकार धनुषाकार हो गया। यह जलस्रोत आज भी क्षेत्र वासियों के लिए आस्था का केंद्र है। दूर-दूर से लोग आकर शिवलिंग का जलाभिषेक करते हैं।

भगवान शिव जलाभिषेक से ही प्रसन्न हो जाते हैं
सावन मास में शिव आराधना का विशेष महत्व है। संसार की अलौकिक शक्ति के रूप में देवों के देव महादेव कल्याणकारी देवता के रूप में विराजमान है। जो अपने भक्तों पर जलाभिषेक से ही प्रसन्न हो जाते हैं। फिर चाहे आप दूध, दही, मक्खन, शहद के साथ बेल पत्र, धतूरा सहित अन्य सामग्री भी भोले को प्रिय है। सावन के पावन अवसर पर मंदिर परिसर में आने वाले भक्तों की भीड़ को देखते हुए मंदिर प्रशासन द्वारा बड़ी व्यवस्था की जाती है। भक्तों को किसी प्रकार से असुविधा ना हो इसके लिए कतारबद्ध ढंग से उन्हें भोले के दर्शन कराने की व्यवस्था की जाती है। इस मौके पर भंडारे का भी आयोजन किया जाता है। इसके साथ ही पेयजल की भी व्यवस्था की जाती है। मंदिर की सफाई व्यवस्था का भी ध्यान रखा जाता है।

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