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UP Election 2017

अखिलेश-मुलायम के बीच घमासान में फंसे 'बदलू', BJP-BSP की भी नजर

Updated: IST akhilesh
समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच होने वाले समझौते का असर भी जनपद की 6 सीटों पर पड़ने वाला है।

उन्नाव। बांगरमऊ विधानसभा जनपद की राजनीति में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। जनपद में व्यापार व कृषि उद्योग के रूप में पहचाने जाने वाले विधानसभा में सबसे ज्यादा मुस्लिम मतदाता हैं। आजादी के बाद से अब तक हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने सबसे ज्यादा पांच बार सीट पर कब्जा किया है। समाजवादी पार्टी ने तीन बार जीत हासिल की। जबकि बहुजन समाज पार्टी में दो बार जीत का स्वाद चखा है। भारतीय जनता पार्टी के जीत का खाता अभी तक नहीं खुला है। विधानसभा की प्रमुख समस्याओं में बाढ़, बिजली, स्वास्थ्य, के साथ कच्ची शराब की बहुतायत बड़ी समस्याओं में से है। विगत विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी बदलू खान ने बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी इरशाद खान को हराकर जीत हासिल की थी।

तीन जनपद की सीमाओं से सटा है बांगरमऊ विधानसभा

लखनऊ-कानपुर-हरदोई तीन जनपदों से सटी बांगरमऊ विधानसभा कृषि यंत्र के लिये क्षेत्र में ही नहीं आस पास के जिलों में भी विख्यात हैं। दूर-दूर से किसान कृषि यंत्र खरीदने के लिए यहां आते हैं। जनपद का एकमात्र पुलिस ट्रेनिंग सेंटर बांगरमऊ विधानसभा क्षेत्र के काली मिट्टी में स्थापित किया गया है। इसके साथ ही जनपद का एकमात्र नवोदय विद्यालय होने का सौभाग्य भी बांगरमऊ विधानसभा को ही मिला है फ्लोर मिल, राइस मिल के साथ काफी बड़ी गल्लामंडी भी संचालित है। इस गल्ला मंडी में आस पास के जिलों के भी लोग व्यापार करने के दृष्टिकोण से आते हैं। एक मायने में देखा जाए तो बांगरमऊ विधानसभा जनपद की व्यवसायिक वह आर्थिक गतिविधियों वाला केंद्र है।

थर्ड जेंडर के रूप में 23 मतदाताओं ने कराई उपस्थिति दर्ज

आबादी के हिसाब से बांगरमऊ विधानसभा में की जनसंख्या 527050 है। जबकि कुल मतदाता की संख्या 337 303 है। जिसमें पुरुष मतदाता 184 804 व महिला मतदाता 152 476 है। थर्ड जेंडर के रूप में 23 मतदाताओं ने अपनी उपस्थिति दर्ज दर्ज कराई है। विधानसभा का सेक्स रेशियो 823 व साक्षरता का प्रतिशत चौसठ है।

विधानसभा में मतदाताओं के अनुमानित जातिगत आंकड़े

मुस्लिम 58 हजार, पाल 38 हजार, कुरील 34 हजार, लोध / निषाद 32 हजार, पासी 26 हजार, काछी 24 हजार, ब्राह्मण 22 हजार, यादव 20 हजार, ठाकुर 17 हजार है।

अस्पताल तो है पर डॉक्टरों की सुविधा नहीं

अस्पताल में डॉक्टर भले ही ना आते हो परंतु विधानसभा क्षेत्र में बड़ी संख्या में स्वास्थ्य केंद्र के अलीशान बिल्डिंग खड़ी हैं। बांगरमऊ में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अतिरिक्त प्रसवोत्तर केंद्र, राजकीय महिला चिकित्सालय, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सहित लगभग एक दर्जन स्वास्थ्य केंद्र स्थापित है। जहां पर आए दिन मरीजों के साथ आए तीमारदार डॉक्टर व स्वास्थ्य कर्मियों की उपेक्षित व्यवहार से खिन्न होकर विरोध के स्वर बोलते हैं। परंतु स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी प्रकार का सुधार नहीं हो पाता है। बांगरमऊ के अतिरिक्त जगत नगर, गोरिया कला, गंज मुरादाबाद, जोगी कोट, ब्यौली इस्लामाबाद, असायरा आदि क्षेत्रों में स्वास्थ्य केंद्र स्थापित है।

समाजवादी पार्टी ने तीन बार हासिल की जीत

विगत विधानसभा चुनाव में नजर डाला जाए तो बांगरमऊ विधानसभा सीट से सबसे ज्यादा कांग्रेस के प्रत्याशी गोपीनाथ दीक्षित से में सफलता हासिल की है। जिन्होंने बांगरमऊ विधानसभा क्षेत्र से चार बार कांग्रेस का परचम लहराया है। भारतीय जनता पार्टी को अभी जीत का इंतजार है। विगत दो चुनावों से लगातार यह सीट समाजवादी पार्टी के कब्जे में है। 2007 में समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी कुलदीप सिंह सेंगर और 2012 में बदलू खान ने जीत हासिल की। इसके पूर्व बहुजन समाज पार्टी के राम शंकर पाल ने 1996 और 2002 में लगातार दो बार जीत हासिल की। विगत विधानसभा चुनाव में मतदान का प्रतिशत 60.29 था। विजय प्रत्याशियों में अशोक कुमार सिंह बेबी का भी महत्वपूर्ण स्थान है जिन्होंने बांगरमऊ विधानसभा सीट पर दो बार विजय हासिल की।

प्रत्याशियों पर अनिश्चितता के बादल बरकरार

विधानसभा 2017 के चुनाव में पार्टी वाइज प्रत्याशियों पर नजर डाली जाए तो यह बात साफ हो जाती है कि बसपा को छोड़ किसी भी पार्टी का उम्मीदवार अपने आपको पार्टी उम्मीदवार नहीं बता सकता है। समाजवादी पार्टी द्वारा घोषित बदलू खां के ऊपर पार्टी के अंदर मचे घमासान की तलवार लटकी है। सपा के निवर्तमान विधायक बदलू खान किस तरफ जाते हैं, यह तो समय बताएगा। इस संबंध में बदलू खां से संपर्क करने का प्रयास किया गया परंतु बातचीत नहीं हो पाई। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच होने वाले समझौते का असर भी जनपद की 6 सीटों पर पड़ने वाला है। वही बहुजन समाज पार्टी ने पूर्व प्रत्याशी मोहम्मद इरशाद खान पर एक बार फिर दांव लगाया है। जबकि कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी ने अभी अपने पत्ते नहीं खोले हैं।

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