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Photo Icon क्या आप भूल गए 29 खरब रुपए का खजाना? एक 'सपना' जो सच न हुआ!

Updated: IST Daundia Khera
तीन साल पहले एक बाबा के सपने ने उड़ा दी थी केन्द्र और राज्य सरकार की नींद!

- रोहित घोष

उन्नाव। आज से ठीक तीन साल पहले देश ही नहीं अंतरराष्ट्रीय मीडिया की नज़र भी उन्नाव ज़िले में गंगा किनारे बसे एक छोटे से गाँव डौंडियाखेड़ा पर टिकी थी। हज़ारों लोगों की मौजूदगी के कारण गाँव में एक बड़े मेले जैसा नज़ारा था। लेकिन आज आपको डौंडियाखेड़ा में सुनाई देगा सिर्फ चिड़ियों का चहकना, गंगा की लहरों का किनारों से टकराना और हवा का शोर। गाँव का कोई आदमी शायद ही दिखे। लगता है डौंडियाखेड़ा ऊंघ रहा है।

29 खरब का था खजाना

डौंडियाखेड़ा सुर्ख़ियों में तब आया जब कानपुर में रहने वाले एक बाबा, शोभन सरकार ने सपने में देखा की गांव में ज़मींदोज़ हो चुके एक किले के नीचे 1000 टन सोना दफ़न है। बाबा ने 1000 टन सोने की बात की थी। आज की तारीख में 22 कैरेट के सोने की कीमत बाजार में 29 हजार रुपए प्रति दस ग्राम है।उस हिसाब से डोंडियाखेड़े के कुल खजाने की कीमत हुई 2900000000000 रुपए यानि करीब 29 खरब रुपए।

सपने में खुला था राज

किला कभी डौंडियाखेड़ा और आस-पास के गाँवों पर राज करने वाले स्थानीय राजा राम बक्श सिंह का हुआ करता था। 1857 के आज़ादी के संग्राम के बाद अंग्रेजों ने राम बक्श सिंह को फाँसी दे दी थी। शोभन सरकार ने दावा किया था कि राम बक्श सिंह उन्हें सपने में दिखे थे और उन्होंने बाबा को किले के नीचे सोना दबा होने की बात बताई।

सोनिया-मनमोहन तक पहुंची थी बात

शोभन सरकार के भक्तों में कई मंत्री और नेता शामिल थे और हैं। बाबा के एक शिष्य ने इस सपने के बारे में केंद्रीय मंत्री चरण दास महंत को बताया था। इसके बाद चरण दास महंत ने इस कथित खजाने की बात कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी और तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को बताई।

अचानक फेमस हो गया था डौंडियाखेड़ा

केंद्र सरकार ने भारतीय पुरातत्व विभाग को आदेश दिया की डौंडियाखेड़ा में खुदाई करवाये और देखें की किले के नीचे सोना दबा है या नहीं। इसके बाद डौंडियाखेड़ा सुर्ख़ियों में आ गया। लोगों की नज़र एक गाँव पे थम गयी जिसमें करीब 25 - 30 कच्चे पक्के मकान, करीब 300 की आबादी, खंडहरनुमा किले, प्राचीन शिव मंदिर, पीले सरसों के खेत और बबूल की कटीली झाड़ियों के अलावा कुछ भी नहीं है।

18 अक्टूबर को शुरू हुई थी खुदाई

सोने की खुदाई का काम 18 अक्टूबर, 2013 को शुरू हुआ था। उस दिन कौतूहलवश हज़ारों की भीड़ डौंडियाखेड़ा पहुँच गयी थी। कानून व्यवस्था रखने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। खुदाई का काम महीने भर तक चला पर मिली कुछ लोहे की कीलें, दो मिट्टी की चूल्हे और चूड़ियाँ के टुकड़े। हताश होकर खुदाई का काम बंद कर दिया गया। जिस जगह खोदा गया था वहां फिर से मिट्टी पाट दी गई और उसके ऊपर एक काले रंग के प्लास्टिक की चादर बिछा दी गयी। उसके ऊपर फिर मिट्टी डाल दी गयी।

पहले थी हाई-सिक्योरिटी अब कोई पूछने वाला नहीं

भारतीय पुरातत्व विभाग के अधिकारी डौंडियाखेड़ा से वापस लखनऊ चले गए। पुलिस दल को भी धीरे-धीरे वहां से हटा दिया गया। अब लगता है डौंडियाखेड़ा फिर से गहरी नींद में चला गया है। जब खुदाई शुरू हुयी थी तो आलम ये था की खुदाई वाली जगह तक पहुंचना तो दूर की बात, उस जगह देखने की भी इजाज़त नहीं थी। लेकिन अब आप ठीक खुदाई वाली जगह के ऊपर खड़े हो कर सेल्फी खींच सकते हैं।

अखिलेश सरकार बदल रही डौंडियाखेड़ा की तस्वीर

खुदाई बंद होने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने फैसला लिया की डौंडियाखेड़ा को एक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा। पर्यटन विभाग 2.5 करोड़ रु. खर्च करके के गंगा किनारे घाट और दुकानें बनवा रहा है। डौंडियाखेड़ा तक पहुँचने के लिए पक्की सड़क भी बनवाई जा रही है। गाँव में बिजली नहीं है, बिजली पहुँचाने का काम भी किया जा रहा है।हालांकि सभी काम बहुत सुस्त गति से चल रहे हैं। पर्यटन विभाग के अधिकारी ने कहा की डौंडियाखेड़ा को इस लिए विकसित किया जा रहा है क्योंकि उस जगह का एक ऐतिहासिक महत्व है।

बाबा को अभी भी आते हैं 'सोने के सपने'

डौंडियाखेड़ा से 70 किलोमीटर दूर, कानपुर के शिवली गाँव के एक आश्रम में रहने वाले बाबा, शोभन सरकार अभी भी कई जगह सोना दबे होने का सपना देखते रहते हैं। शोभन सरकार पिछले कई दिनों से ध्यान में लीन हैं लेकिन उनके एक करीबी शिष्य हरी सरणं पाण्डेय ने कहा की शोभन सरकार ने सपने में देखा है की भारी मात्रा में सोना कानपुर में या उसके आसपास कहीं दबा है।

Daundia Khera

इसलिए हाथ नहीं आया खजाना

पाण्डेय कहते हैं, 'डौंडियाखेड़ा में सोना इसलिए नहीं निकला क्यों कि खुदाई शोभन सरकार के बताये तरीके से नहीं हुयी। मशीनों का इस्तेमाल हुआ था। अगर बाबा की निगरानी और उनके बताये तरीके से खुदाई हुई होती तो सोना अवश्य निकलता और आगे भी निकलेगा।'

शोभन सरकार के सपनों के बारे में उनके शिष्यों ने ज़िला प्रशासन के अधिकारियों को बताया है पर अधिकारियों ने कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई।

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