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बनारस के मुस्लिमों ने कहा कि राष्ट्रभावना को थिएटर से न जोड़ें

Updated: IST Public
बोली जनता, सिनेमा घर मनोरंजन के लिए होता है, वहां राष्ट्रगान बजाने से होगा इसका अपमान

वाराणसी. सिनेमा थिएटरों में फिल्म से पहले राष्टगान बजाने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश का बनारस के मुस्लिमों ने विरोध किया। सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय पर पत्रिका ने मुस्लिम बंधुओं कस विचार जाना, जिसमें अधिकतर का कहना है कि राष्ट्रभावना को थिएटर से नहीं जोड़ना चाहिए। लोगों ने कहा कि जनता सिनेमा घरों में मनोरंजन के लिए जाती है, वहां पर राष्ट्रगान नहीं बजाना चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा सिनेमा घरों में राष्ट्रगान बजाना सही नहीं है और कहीं न कहीं इससे राष्ट्रगान का अपमान ही होगा।

वारीस खान ने पत्रिका से कहा कि सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय गलत है। उन्होंने कहा कि आज-कल की फिल्मों पर अश्लीलता ज्यादा होती है, ऐसे में वहां राष्ट्रगान बजाना सही नहीं होगा। उन्होंने इस नियम का सख्त विरोध व्यक्त किया।

मोहम्मद जावेद ने कहा कि यह निर्णय सही नहीं है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रभावना को सिनेमा घरों से नहीं जोड़ना नहीं चाहिए। राष्ट्रगान को सिनेमा घरों में नहीं बजाना चाहिए। सिनेमा घरों में राष्ट्रगान बजाने से उसके सम्मान के साथ खिलवाड़ है।

रेहान सिद्दकी ने कहा कि सभी सिनेमा घरों में यह निर्णय नहीं लागू होना चाहिए। उन्होंने कहा कि बनारस में ही कई ऐसे सिनेमा घर हैं, जहां सी ग्रेड की फिल्म दिखाई जाती है। ऐसे में वहां राष्ट्रगान बजाना सही नहीं होगा।

वारीस अंसारी ने कहा कि राष्ट्रगान के लिए सिनेमा घर सही जगह नहीं है। राष्ट्रगान स्कूलों व काॅलेजों में ही होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सिनेमा घरों में राष्ट्रगान का अपमान होगा।

मुमताज अली ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय बिल्कुल सही है। उन्होंने कहा कि यह राष्ट्र के प्रति लोगों का सम्मान दिखाएगा। कहा कि लोग स्कूल के बाद राष्ट्रगान नहीं गाते हैं और अधिकतर लोग तो भूल भी जाते हैं। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट का यह एक बेहतरीन कदम है।

परवेज ने कहा कि सिनेमा घरों में राष्ट्रगान बजाना उचित नहीं है। लोग सिनेमा घरों में मनोरंजन करने जाते हैं, वहां राष्ट्रगान बजाना सही नहीं होगा। इससे राष्ट्रगान का अपमान बढ़ेगा।

रिजवाना ने कहा कि फिल्म के समय राष्ट्रगान सही नहीं है। सभी मूवी सही नहीं होती है और लोगों को माइंड भी उस समय फिल्म के अनुसार ही होता है, ऐसे हर फिल्म से पहले राष्ट्रगान बजाना सही निर्णय नहीं है।

वहीं एकलाख ने कहा कि फिल्म के हिसाब से राष्ट्रगान बजना चाहिए। हर फिल्म से पहले ऐसा करना सही नहीं होगा। उन्होंने कहा कि किसी के साथ जबरदस्ती नहीं करना चाहिए। राष्ट्रगान के समय सबको खड़ा होना अनिवार्य है और सिनेमा घरों में सब लोग खड़े नहीं होंगे तो राष्ट्रगान का अपमान होगा।

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