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UP Election 2017

आखिर पूर्वांचल के दिग्गज सपाइयों को क्यों है पांच नवंबर का इंतजार, बड़े बगावत की सुगबुगाहट

Updated: IST Akhilesh Yadav and Samajwadi Party
अखिलेश की युवा टीम पार्टी की सिल्वर जुबली के लिए बना रही कुछ अलग ही रणनीति। जानिये क्या है चल रहा अंदर खाने...

डॉ. अजय कृष्ण चतुर्वेदी

वाराणसी. आखिर क्या है पांच नवंबर को। क्यों युवा सपाइयों को है इस दिन का बेसब्री से इंतजार। खासतौर पर पूर्वांचल के युवा क्यों हैं बेचैन। क्या होना है। ऐसा कौन सा बड़ा धमाका होना है उस दिन जो सपा सुप्रीमों के संसदीय क्षेत्र आजमगढ़ से लेकर समूचे पूर्वी उत्तर प्रदेश के युवा दम साधे उस दिन का इंतजार कर रही है। राजनीतिक गलियारों में इसे लेकर गहन मंथन चल रहा है सियासत के जानकारों के बीच। राजनीतिक विश्लेषक मान रहे हैं कि पांच नवंबर को कुछ बड़ा होने जा रहा है यूपी की सियासत में। और इस बड़ी घटना को सरअंजाम देंगे सीएम की अखिलेश यादव की टीम के साथी।

टीम अखिलेश किसी समझौते को तैयार नहीं

टीम अखिलेश ने ठान लिया है वे किसी समझौते को तैयार नहीं। उन्हें चाहिए सीएम के रूप में अखिलेश यादव का चेहरा। उन्हें चाहिए उन सभी युवाओं की बाइज्जत वापसी जिन्होंने संकट की घड़ी में पार्टी के लिए अपना सब कुछ कुर्बान कर दिया। वे कहते हैं ऐसे युवा जिन्होंने बसपा सरकार को जड़ समेत उखाड़ फेकने और भैया अखिलेश को भारी बहुमत से यूपी की सियासत का सरताज बनाने में अहम भूमिका निभाई वे गद्दार कैसे हो सकते हैं पार्टी के लिए। ऐसे युवाओं पर ऐसा आरोप वह भी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष कैसे लगा सकते हैं। वे कहते हैं आगामी विधानसभा चुनाव में कौन कहां से प्रत्याशी होगा इसके फैसले का हक सीएम अखिलेश को ही मिलना चाहिए। वे इससे कम पर किसी समझौते के लिए तैयार नहीं हैं। इस युवा टीम ने विद्रोह का मन तक बना लिया है। रणनीति तैयार है। बस एक इशारे भर की देर है। सूत्र बताते हैं कि वह दिन और कोई नहीं, बल्कि की समाजवादी पार्टी का स्थापना दिवस होगा। जब पूरी पार्टी, आलाकमान से लगायात सारे बंधु-बांधव पार्टी की सिल्वर जुबली मनाने में व्यस्त होंगे तभी टीम अखिलेश एक नई पार्टी की घोषणा कर उस बंधन से खुद को अलग कर लेंगे।

इस नई टीम को लीड करेंगे अखिलेश, सलाहकार होंगे रामगोपाल

पार्टी सूत्रों की मानें तो पांच नवंबर को पिता मुलायम सिंह यादव, चचा शिवपाल यादव से अलग हो कर नई पार्टी का गठन हो सकता है। इस नई पार्टी को लीड करेंगे सीएम अखिलेश यादव। उनके प्रमुख सलाहकार होंगे चाचा प्रो. रामगोपाल यादव। टीम में सीएम की सांसद पत्नी डिंपल यादव की होगी प्रमुख भूमिका। साथ ही अखिलेश के भाई धर्मेंद्र यादव का भी मिलेगा साथ। बताया तो यहां तक जा रहा है कि रामगोपाल यादव ने प्रदेश की सभी 403 सीटों के प्रत्याशियों की सूची तैयार कर रखी है। बस नई टीम की घोषणा भर होनी है। उसके तत्काल बाद निर्वाचन आयोग में कराया जाएगा पंजीकरण और पार्टी उतर आएगी जंग-ए-मैदान में। इस पूरे संघर्ष में पूर्वांचल के युवाओं का होगा बड़ा योगदान। उन युवाओं का जिन्होंने न केवल पिछले विधानसभा चुनाव में पार्टी के लिए अपना सब कुछ दांव पर लगा दिया बल्कि 2014 के लोकसभा चुनाव में जब पूरे प्रदेश में नरेंद्र मोदी की लहर चल रही थी तब आजमगढ़ संसदीय सीट पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष की झोली में डाल दी।

सीएम अखिलेश का युवा टीम को संदेश भी दे रहा यही संकेत

पारिवारिक कलह से ऊबे सीएम अखिलेश ने अपनी टीम को जहां सारा ध्यान चुनाव पर लगाने का संकेत दिया। वहीं उन्होंने उनसे विकास योजनाओं को जल्द से जल्द मुकाम तक पहुचाने का संदेश दिया। यहां तक कहा कि आप लोग अपने-अपने क्षेत्र के कार्यों को जल्द से जल्द स्वीकृत करा लें। इसके बाद से सारे के सारे युवा मौन साध कर अपने-अपने इलाके में चुनाव अभियान में जुट गए हैं। विकास कार्यों की लिस्ट तैयार कर रहे हैं। कुछ ने तो अपनी सूची सीएम को सौंप भी दी है। हाल के एक हफ्ते की गतिविधियों पर नजर डालें तो पूर्वांचल के युवा सपाइयों ने टिकट की दावेदारी तक करनी छोड़ दी है। वे किसी उलझन में नहीं क्योंकि उन्हें साफ संदेश मिल चुका है, नो हल्ला, थोड़ा सब्र करो, सब्र का फल मीठा होगा।

बनारस के युवाओं ने साधी चुप्पी

एक तरफ जहां सपा के युवा संगठनों, प्रकोष्ठों के नेताओं ने बैठक कर पार्टी के रजत जयंती समारोह के बहिष्कार की घोषणी की है तो वहीं दूसरी तरफ बनारस के युवा सपाइयों पूरे घटनाक्रम पर चुप्पी साध ली है। बहुत कुरेदने पर भी वो इतना ही कहते हैं कि अभी हम लोगों को अपने नेता की ओर से बगावत जैसा को संकेत नहीं मिला है। युवा नेता प्रदीप जायसवाल कहते हैं की जिन लोगों ने भी रजत जयंती समारोह के बहिष्कार की बात की है वह उनके अपने नेता के प्रति प्यार और समर्पण का द्योतक है। हम उनका भी सम्मान करते हैं पर जब तक नेतृत्व की ओर से स्पष्ट दिशा निर्देश नहीं मिलता हम कोई कदम नहीं उठाने जा रहे। समाजवादी छात्र सभा के बीएचयू इकाई के अध्यक्ष आशुतोष सिंह कहते हैं हम सभी सीएम अखिलेश के साथ हैं। जैसे ही जो संकेत मिलेगा हम उसके लिए तैयार हैं।

टीम अखिलेश के रुख से मुलायम, शिवपाल खेमे में चिंता की लकीरें

उधर टीम अखिलेश के आक्रामक और शांत दोनों ही रूख ने पार्टी मुखिया मुलायम सिंह यादव और प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल यादव के पेशानी पर बल ला दिया है। खुफिया रिपोर्ट ने मुलायम और शिवपाल को अपने पुराने स्टैंड को बदलने के लिए विवश किया। जिस मुलायम ने पहले सीएम के रूप में अखिलेश को प्रोजेक्ट न करने की बात कही उन्हीं मुलायम को अगले ही दिन बयान बदलना पड़ा। शिवपाल भी जगह-जगह यह कहते नजर आने लगे कि अखिलेश ही होंगे सीएम चेहरा। लेकिन इस बीच जिस तरह से रामगोपाल और मुलायम के बीच तल्ख बातचीत होती है, रामगोपाल का मुलायम को कड़ा पत्र लिखना भी यही संकेत दे रहा है कि अंदरखाने कुछ न कुछ तो पक रहा है। जिसका इंतजार सभी को है। हालांकि कुछ लोग यह भी तर्क देने लगे हैं कि ये सारा मुलायम सिंह का रचा बसा था। वह अपने मकसद में सफल रहे। अखिलेश सरकार की खामियों पर मीडिया में चर्चा बंद है। अब मौका आया है और सब मिल कर एक साथ चुनाव लड़ेंगे। एक साथ मंच पर दिखेंगे। सभी निष्कासितों की वापसी जल्द होगी। अखिलेश को ही प्रत्याशी तय करने का अधिकार होगा। यह सब पांच नवंबर को फाइनल रूप में सामने आ जाएगा। अंतिम परिणति चाहे जो हो, ऊंट चाहे जिस करवट बैठे पर हर समाजवादी को पांच नवंबर का इंतजार तो है और वह भी बेसब्री से।

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