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नीतीश कुमार के सबसे बड़े फैसले पर BJP के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार ने लगाई थी मुहर 

Updated: IST nitish
क्या अब नीतीश कुमार देंगे रामनाथ कोविंद का साथ

वाराणसी. बिहार के राज्यपाल रामनाथ कोविंद का नाम एनडीए ने भारत के अगले राष्ट्रपति के लिए घोषित कर दिया है। वैसे तो तो रामनाथ कोविंद के बारे में सभी जानते हैं कि ये वकालत पेशे कैरियर की शुरूआत करने वाले कोविंद एक बेहतरीन वकील के साथ ही एक अच्छे चिंतक रहे हैं। भाजपा में दलित समाज के लोगों के उत्थान के लिए इन्होने बहुत काम किया है।

नीतीश की शराब बंदी में रामनाथ कोविंद की थी सहमति

राज्यपाल रामनाथ कोविंद ने एक सभा को संबोधित करते हुए कहा था कि शराबबंदी कानून लागू करने में मेरी भी भूमिका है। मुख्यमंत्री के इस ऐतिहासिक कदम को मैंने भी सहमति दी। शराबबंदी बिल को राज्यपाल की सहमति देनी थी। विभिन्न क्षेत्रों के लोग इस पर सहमत नहीं थे। कुछ ने इसे तानाशाही कानून बताया। लेकिन मैंने लोगों के कल्याणकारी इस बिल को तत्काल ही सहमति दे दी।

सभी तरह के नशे पर पाबंद लगाने के पक्षधर हैं कोविंद

बतादें कि शराबबंदी की फैसला का असर ये रहा कि बिहार में गरीब तबके के लोगों में इस फैसले से काफी लाभ मिल रहा है। शराब बंदी से जहां लोगों के परिवार में आर्थिक व्यवस्य़ा सुदृढ़ हो रही है वहीं पारिवारिक कलह से भी लोग बच रहे हैं। कोविंद सभी तरह के नशे को बंद करने के पक्षधर हैं।

सत्ता, पद, प्रतिष्ठा, धन-संसाधन, संपन्नता का नशा समाज के लिए ठीक नहीं

एक सभा को संबोधित करते हुए बिहार के राज्यपाल और एनडीए के राष्ट्रपति के उम्मीदवार रामनाथ कोविंद ने कहा था कि नशा कई तरह के होते हैं। सत्ता, पद, प्रतिष्ठा, धन-संसाधन, संपन्नता का नशा भी होता है। परंतु ये नशा लोगों में अहंकार के रूप में मौजूद रहते हैं। सामाजिक पतन के लिए ये नशा प्रमुख हैं। उन्होंने कहा कि जब यह पूर्ण शराबबंदी कानून विधानमंडल से पास होने के बाद अंतिम अनुमोदन के लिए आया था। तब कई लोगों ने इसका विरोध करते हुए कहा था कि यह तानाशाही कानून है, लोगों के मौलिक अधिकार का हनन है। पर हमने इस फैसले के लिए नीतीश कुमार का पूरा साथ दिया था। बतादें कि 2016 में बिहार सरकार ने शराबबंदी का फैसला किया था और पूरे राज्य में शराब का बिक्री-खरीद पर रोक लगा दी थी। बतादें कि 2015 में रामनाथ कोविंद को बिहार का राज्यपाल बनाया गया था।

क्या साथ देंगे नीतीश कुमार

अब जब नीतीश कुमार भाजपा से दूर और एनडीए से अलग हैं तो एेसे में उनके लिए ये फैसला लेना बड़ी बात होगी कि आखिर वो साथ दें तो किसका। जहां एक तरफ उनके साथ काम करने वाले कोविंद प्रत्याशी हैं तो दूसरी तरफ भाजपा विरोधी है। ऐसे में नीतीश किसका साथ देंगें ये बड़ी बात होगी।

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