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अमेरिकी गुप्त रिपोर्ट में हिन्दुस्तानी दलितों के बारे में रामनाथ कोविंद ने जो कहा था

Updated: IST wikileaks, ram nath kovind, president of india, bj
अमेरिकी गुप्त रिपोर्ट में हिन्दुस्तानी दलितों के बारे में रामनाथ कोविंद ने जो कहा था

आवेश तिवारी
वाराणसी। 22 जून 2005 को दिल्ली स्थित अमेरिकन काउंसलेट ने सरकार को हिंदुस्तान के दलितों की स्थिति के बारे में एक गुप्त रिपोर्ट भेजी थी। इस रिपोर्ट में भाजपा के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार जो कि उस वक्त भाजपा के राज्यसभा सांसद थे का भी विस्तार से उल्लेख था। इस रिपोर्ट में काउंसलेट जनरल से राम नाथ कोविंद और अन्य दलित नेताओं ने जो बातचीत की थी उसे बाद में विकिलीक्स ने लीक कर दिया। हम आपको उस रिपोर्ट में राम नाथ कोविंद द्वारा कही गई बातों को ज्यों का त्यों प्रस्तुत कर रहे हैं । इससे दलितों के बारे में उनके दृष्टिकोण को जानने में मदद मिलेगी। रामनाथ ने उस बातचीत में निजी क्षेत्र में आरक्षण पर भाजपा की सहमति जताई थी और कहा था कि उनकी पार्टी यूपीए सरकार पर निजी क्षेत्र में आरक्षण को लेकर दबाव बनाने की कोशिश करेगी।

रामनाथ कोविंद ने अमेरिकन काउंसलेट जनरल को कहा था कि मुझे लगता है कि हिंदुस्तान में जातिवादी व्यवस्था अगले 50-100 सालों तक रहेंगी । उन्होंने कहा कि यूरोप में रंगभेद की तुलना में चूँकि हिन्दू धर्म जातिवाद तो ऐसे में भारत सरकार को जातिगत भेदभाव करने के लम्बा वक्त लगेगा। क्योंकि हिन्दू धर्म के भीतर जातिप्रथा निहित है।

रामनाथ कोविंद ने कहा कि पिछले एक दशक के दौरान हिन्दुस्तान में दलितों के साथ भेदभाव की घटनाओं में उल्लेखनीय गिरावट आई है। वही ऐसे लोगों की संख्या में बढ़ोत्तरी हुई है जो दलितों की वास्तविक तौर पर मदद करना चाहते हैं। रामनाथ कोविंद ने यह भी कहा कि घरेलु मोर्चे पर निश्चित तौर पर यह भेदभाव मौजूद है लेकिन रोजगार के मुद्दे पर हर दलित अपना निर्णय लेने को स्वतंत्र है ।

रामनाथ कोविंद ने कहा कि हमारी पार्टी दलितों की मदद के लिए प्रतिबद्ध है और इस छवि से बाहर आना चाहती है कि वो केवल सवर्णों की पार्टी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भाजपा ही केवल एक ऐसी राष्ट्रीय पार्टी है जो दलितों के साथ भेदभाव को ख़त्म कर सकती है । उनका कहना था कि हिन्दुस्तान तब तक विश्वशक्ति नहीं बन सकता जब तक दलितों और छोटी जातियों को शेष समाज के कद के बराबर लाकर नहीं खड़ा कर दिया जाता ।

रामनाथ कोविंद ने लगभग 13 वर्ष पूर्व अमेरिकन काउंसलेट आफिस से हुई बातचीत में माना कि देश के मौजूदा कानून दलित हितों की रक्षा करने में बड़े पैमाने पर सफल रहे हैं । लेकिन अभी भी जातिगत भेदभाव को ख़त्म करने में हमें बहुत कुछ करना होगा। दलितों को प्राथमिक शिक्षा देकर इस दिशा में पहला कदम उठाया जा सकता है।

रामनाथ कोविंद ने काउंसलेट जनरल से कहा कि दलितों के साथ भेदभाव की जो वजह है वो ज्यादातर आर्थिक है । जिसके पास धन है और जिसके पास नहीं है वो पहले वाले के साथ भेदभाव शिकार हो जाते हैं । उनका कहाँ था कि जातिगत व्यवस्था में व्यक्ति के कार्य का निर्धारण उसके जन्म के साथ ही हो जाता है। लेकिन अगर उसमे क्षमता है तो वो दूसरी नौकरियां कर सकता है । उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान में जातिवादी व्यवस्था का इस्तेमाल अन्य किसी काम के बजाय रोजगार की सुरक्षा और जीवन यापन में किया जा रहा है ।

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