Patrika Hindi News
Bhoot desktop

ठेकेदार से विधायक बनते ही विरोधियों की आंखों की किरकिरी बन गए थे उमाशंकर सिंह

Updated: IST
बसपा विधायक उमाशंकर सिंह की सदस्य राज्यपाल ने रद्द कर दी। विधायक पर विधायकी के साथ ही सरकारी ठेके लेने का भी था आरोप।

वाराणसी/बलिया. मायावती के सबसे खास सिपह सालारों में से एक और बसपा के कद्दावर नेता रसड़ा विधायक उमाशंकर सिंह अब एमएलए नहीं रहे। यूपी के राज्यपाल राम नाइक ने उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त कर दी है। उनके खिलाफ आरोप था कि वह विधायक रहने के साथ ही सरकारी ठेके लेकर सड़क बनाने का काम भी करते रहे। हालांकि इसके खिलाफ उमाशंकर सिंह हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक गए पर दोनों जगह से फैसला उनके खिलाफ ही आया। लोकायुक्त और चुनाव आयोग की रिपोर्ट के बाद राज्यपाल राम नाइक ने उनकी सदस्यता समाप्त कर दी। काफी कम समय में उमाशंकर सिंह ने ठेकेदारी से लेकर राजनीति तक का सफर तय किया, इसलिये उनके सियासी विरोधी भी बने। विधायक बनते ही सियासी दुश्मन लामबन्द हुए और अंतत उमाशंकर सिंह को अपनी विधानसभा सदस्यता से हाथ धोना ही पड़ा।

पट्टीदार सुभाष सिंह क्रान्ति ने की थी पहली शिकायत
विधायक उमाशंकर सिंह के खिलाफ पहली शिकायत उनके पट्टीदार सुभाष सिंह क्रान्ति ने ही की थी। यह शिकायत थी कि वह एक साथ दो लाभ के पदों का फायदा उठा रहे हैं। सुभाष सिंह की शिकायत की छोटी सी चिंगारी उमाशंकर सिंह के सियासी दुश्मनों के लिये बड़ा आग लगाने का बड़ा सामान साबित हुआ।

चुनाव जीतने के साथ ही बढ़ा सियासी विरोध
उमाशंकर सिंह ने 2012 में बलिया की रसड़ा विधानसभा से एमएलए का चुनाव जीता। यह चुनाव जीतकर उन्होंने अपने सियासी विरोधियों को बड़ी मात दी। इसके बाद तो उनके विरोधी और लामबन्द हुए। उनके सियासी विरोधियों में पूर्व विधायक सनातन पाण्डेय व सपा विधायक जियाउद्दीन रिजवी का नाम आगे आता है। बताया जाता है कि इन विधायकों व बलिया के दूसरे राजनीतिक दिग्गजों ने उमाशंकर सिंह के खिलाफ शिकायतों की झड़ी लगवा दी। इसके बाद चुनाव आयोग व लोकायुक्त तक मामला पहुंच गया।

हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट से भी नहीं मिली राहत
बसपा विधायक उमाशंकर सिंह के खिलाफ शिकायत मिलने के बाद लोकायुकत और चुनाव आयोग दोनों ने तेवर कड़े कर लिये। उनके खिलाफ उमाशंकर सिंह को पहले हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट जाना पड़ा। उत्तर प्रदेश के लोकायुक्त न्यायमूर्ति एनके मेहरोत्रा ने शिकायत के आधार पर सरकारी ठेके लेने के आरोप में विधायक उमाशंकर सिंह को दोषी पाया और मुख्यमंत्री को अपनी जांच रिपोर्ट भेज दी, जिसे सीएम ने राज्यपाल को भेजा। राज्यपाल ने निर्वाचन आयोग को अभिमत के लिये संदर्भित कर दिया। इसके बाद तीन जनवरी 2015 को अभिमत मिला तो उमाशंकर सिंह ने राज्यपाल से मिलकर अपना पक्ष रखने का अनुरोध किया। वह 16 जनवरी 2015 को मुलाकात कर राज्यपाल ने उनका पक्ष सुना।

राज्यपाल ने भी आरोपों को सही पाया और उमाशंकर सिंह के विधायक निर्वाचित होने की तारीख छह मार्च 2012 से विधानसभा की सदस्यता से अयोग्य घोषित कर दिया थ। इस फैसले के खिलाफ उमाशंकर हाईकोर्ट गए, पर 28 मई 2016 को हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग को प्रकरण में खुद जांच कर राज्यपाल को अवगत कराने का आदेश दिया। राज्यपाल को इस प्रकरण में अनुच्छेद 192 के तहत अपना निर्णय लेना था। 14 सितम्बर को राज्यपाल ने चुनाव अयोग को पत्र लिखकर जांच के निर्णय से अवगत कराने को कहा था। इसक बाद चुनाव आयोग से मिले पत्र के बाद राज्यपाल ने शनिवार 14 जनवरी 2017 को अपना फैसला सुनाते हुए विधायकी खत्म कर दी।

यह भी पढ़े :
अपने विवाह के सपने को भारत मैट्रीमोनी पर साकार करे।- निःशुल्क रजिस्ट्रेशन करे!
LIVE CRICKET SCORE
Patrika.com

लेटेस्ट ख़बरें ई-मेल पर पाने के लिए सब्सक्राइब करें

Dus ka Dum
Ad Block is Banned Click here to refresh the page

???? ??????? ?? ??? ???? ????? ???