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CM योगी की सख्ती, निजी स्कूलों पर शिकंजा कसने को जारी हुई गाइड लाइन

Updated: IST CM Yogi
स्थानीय स्तर पर डीआईओएस ने मांगा शपथ पत्र, जानें क्या-क्या हैं बंदिशेंज्

वाराणसी. पीएम नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी सहित लगभग पूरे प्रदेश में निजी विद्यालयों की मनमानी को रोकने के लिए शासन ने स्थानीय अधिकारियों को सख्त दिशा निर्देश जारी किया है। इसके तहत अब जिला विद्यालय निरीक्षक ने बनारस के सभी मान्यता प्राप्त प्राइवेट स्कूलों को पत्र जारी कर 10 बिंदुओं पर शपथ पत्र मांगा है। इतना ही नहीं जिला विद्यालय निरीक्षक ओपी राय ने निजी स्कूलों की जांच भी शुरू की है। उन्होंने कहा कि निरीक्षण के दौरान या किसी तरह की शिकायत पर जांच होगी और जांच की पुष्टि होने पर विद्यालय की मान्यता छीन ली जाएगी और संबंधित विद्यालय प्रबंधन के विरुद्ध एफआईआर दर्ज होगी। हालांकि ये सारी कवायद तब शुरू हुई जब स्कूलों ने बढ़ी फीस वसूल ली है।

निजी स्कूल प्रबंधनों द्वारा हर साल बढ़ाए जा रहे मनमाने शुल्क के विरोध में वाराणसी में कई दिनों से आंदोलन चल रहा है। चाहे व सुबह-ए-बनारस संस्था हो या स्कूल-कॉलेजों से जुड़े विद्यार्थी। आए दिन इस मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन जारी है। आर्य महिला नागर मल की छात्राओं ने तो सीएम योगी के मंत्री अनिल राजभर से लगायत पीएम मोदी सरकार के एमएचआरडी राज्य मंत्री डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय तक से मिल कर विरोध जताया। छात्राएं जिला विद्यालय निरीक्षक ओपी राय से भी मिली थीं लेकिन तब उन्होंने यह कह कर किनारा कर लिया था कि निजी विद्यालय उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आते। लेकिन मामला बढ़ा। सीएम तक पहुंचा तो उन्होंने भी एक गाइड लाइन जारी कर सभी स्कूल प्रबंधन से शपथ पत्र मांगने की औपचारिकता कर दी है।

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क्या है दिशा निर्देश

- विद्यालय परिसर का व्यावसायिक उपयोग नहीं होगा। जैसे बैग, किताब-कापी, टाई-बेल्ट, जूता-मोजा एवं कैंटीन आदि का संचालन प्रतिबंधित होगा।

- विद्यालय की मान्यता संबंधी संपूर्ण विवरण।

- शुल्क मासिक व वार्षिक का विवरण उपलब्ध कराया जाए। इसमें एकेडमिक शुल्क के अलावा प्रोसेसिंग शुल्क का विवरण भी देना अनिवार्य है।

-पुनः प्रवेश शुल्क नहीं लिया जाएगा।

-अभिभावक संघ के नाम पर कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा।

- एनसीईआरटी या बोर्ड द्वारा निर्धारित पुस्तकों का ही प्रयोग किया जाएगा।

- बसों, वाहनों के संसाधन एवं उसके नियम का पालन किया जाएगा।

- छात्रों को दी गई सुविधा जैसे खेलकूद, वाचनालय, कंप्यूटर लैब आदि की सुविधा होने पर ही शुल्क लिया जाएगा।

- विद्यालय की मान्यता एवं उससे संबंधित शिक्षकों का विवरण बोर्ड या दीवाल पर पेस्ट कराकर डिस्प्ले किया जाएगा। शपथ पत्र में इसका विवरण भी देना है।

- अपने विद्यालय में अमान्य विद्यालयों के छात्रों को संबद्ध नहीं किया जा सकेगा। साथ ही विद्यालय को जिस स्तर की मान्यता प्राप्त हो उसी स्तर की कक्षाएं परिसर में संचालित की जाएंगी। किसी भी सूरत में किसी दूसरे विद्यालय के छात्र-छात्राओं का संबद्धीकरण नहीं करेंगे।

क्या कहते हैं स्वयंसेवी कार्यकर्ता

निजी विद्यालयों की मनमानी के विरुद्ध अभियान चलाने वाले स्वयंसेवी संस्था के संचालक बल्लभाचार्य पांडेय ने पत्रिका को बताया कि साझा संस्कृति मंच अन्य एनजीओ के साथ मिल कर लगातार लोगों को प्रेरित करने में जुटा है। इन निजी स्कूलों में खुले कैंटीन, कापी किताब, जूता मोजा की दुकानों, बसों आदि के व्यावसायिक उपयोग पर लगातार चोट की जा रही है। उन्होंने कहा कि स्कूल चलाने के लिए सोसाइटी एक्ट के तहत इन्हें पूरी छूट है। गृह कर आदि में भी रियायत है। ट्रांसपोर्टेशन में छूट है। इन सभी का ये गलत इस्तेमाल कर रहे हैं। इनके विरुद्ध कार्रवाई होनी ही चाहिए। उन्होंने जिला विद्यालय निरीक्षक के इस गाइड लाइन को महज औपचारिकता करार दिया। कहा कि इतना शपथ पत्र तो ये विद्यालय प्रबंधन दे ही देंगे। इससे कुछ नहीं होने वाला कार्रवाई के लिए सख्ती से जांच हो और अनियमितता बरतने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई हो तभी ये सुधरेंगे।

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