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BIG BREAKING-बाहुबली मुख्तार अंसारी को तगड़ा झटका, गले की फांस बन रहा इस विधायक के मर्डर का आरोप

Updated: IST Mukhtar Ansari
एक बार फिर टूटा सपना, जानिए क्या है कहानी

वाराणसी. बाहुबली मुख्तार अंसारी को एक बार फिर तगड़ा झटका लग गया है। मऊ की सदर सीट के विधायक बाहुबली मुख्तार अंसारी ने बसपा ज्वाइन करके इसी सीट से नामांकन किया है। चार मार्च को होने वाले चुनाव के लिए मुख्तार अंसारी ने जेल से बाहर आकर प्रचार करने का सपना देखा था और सीबीआई कोर्ट से मुख्तार अंसारी को 15 दिन की पैरोल मिल गयी थी लेकिन दिल्ली हाईकोर्ट ने पैरोल पर रोक लगा कर मुख्तार अंसारी का सपना एक बार फिर तोड़ दिया है।
बाहुली मुख्तार अंसारी पर बीजेपी विधायक कृष्णानंद राय की हत्या करने का आरोप है। इसी आरोप के चलते वह लंबे समय से जेल में बंद है। वर्ष 2012 में हुए विधानसभा चुनाव में मुख्तार अंसारी को आठ दिन की पैरोल मिली थी लेकिन जिला प्रशासन ने चुनाव क्षेत्र में नहीं आने दिया था। इसके बाद भी मुख्तार अंसारी कुछ हजार वोटों से चुनाव जीत गये थे। इस बार मुख्तार अंसारी को उम्मीद थी कि पैरोल पर निकल कर अपने क्षेत्र में चुनाव प्रचार कर सकेंगे। फिलहाल हाईकोर्ट ने मुख्तार अंसारी के पैरोल पर रोक लगा कर एक बार सपना तोड़ दिया है।

भारी पड़ रहा बीजेपी विधायक की हत्या का आरोप

बाहुबली मुख्तार अंसारी पर बीजेपी विधायक कृष्णानंद राय की हत्या का आरोप भारी पड़ रहा है। वर्ष 2005 को 29 नवम्बर को मोहम्मदाबाद बीजेपी विधायक कृष्णानंद राय सहित छह लोगों की हत्या की गयी थी। हत्या का आरोप बाहुबली मुख्तार अंसारी, मुन्ना बजरंगी सहित अन्य लोगों पर लगा है। लगभग 10 साल से अधिक का समय बीत चुका है लेकिन अभी मुख्तार अंसारी पर लगे आरोपों पर कोर्ट का निर्णय नहीं आ पाया है।

कृष्णानंद राय की हत्याकांड से जल उठा था पूर्वांचल

बीजेपी विधायक कृष्णानंद राय सहित छह लोगों की हत्या से पूर्वांचल जल उठा था। कृष्णानंद राय की हत्या करने के लिए एक साथ कई एक-47 चलायी गयी थी। घटना इतनी सनसनीखेज थी कि मृतकों के शरीर से पोस्टमार्टम के दौरान दर्जनों गोली निकाली गयी थी। इसके बाद बीजेपी ने बड़ा आंदोलन किया था और बाद में मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गयी है।

बेटे को दे रखी है चुनाव प्रचार की कमान

मुख्तार अंसारी ने पहले ही चुनाव प्रचार की कमान अपने बेटे अब्बास अंसारी को देर रखी है। मुख्तार के समर्थकों को विश्वास है कि उनके नेता को पैरोल मिलेगी और वह जेल से बाहर आकर चुनाव प्रचार करेंगे। इसी बीच पैराल पर रोक लगने से मुख्तार के समर्थकों को भी तगड़ा झटका लगा है।

चार मार्च को होना है मतदान

मुख्तार अंसारी खेमा के पास अधिक समय नहीं बचा है। चार मार्च को मऊ की सदर सीट पर चुनाव होना है। ऐसे में अंसारी बंधु चाहते हैं कि मुख्तार अंसारी को जेल से बाहर आने का मौका मिले और वह चुनाव प्रचार की कमान संभाल ले। फिलहाल अंसारी बंधु को भी झटका लग चुका है। अब सभी लोगों की निगाहे कोर्ट पर टिकी हुई है।

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