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मंदिरों के शहर बनारस में अवैध मंदिर 

Updated: IST illegal religious site
स्मार्ट सूची में शामिल काशी के वाशिंदे अतिक्रमण के लिए लेते हैं ऊपर वाले का सहारा

वाराणसी. अति प्राचीन शिवनगरी काशी को मंदिरों का शहर कहा जाता है। शहर के पुराने इलाकों में शायद ही कोई ऐसा मकान हो जिसके घर के बाहर छोटा सा ही सही, मंदिर न हो। अब आप कहेंगे कि जब बनारस को मंदिरों का शहर कहा ही जाता है तो फिर यहां धार्मिक स्थल कैसे अवैध हो गए।

देश में अवैध तरीके से बन रहे धार्मिक स्थलों को लेकर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए वर्ष 2012-13 में सुप्रीम कोर्ट ने देश भर में सार्वजनिक भूमि, पार्क, सड़क किनारे बने अवैध धार्मिक स्थलों को चिन्हित करने का आदेश दिया था। सर्वेक्षण के दौरान उत्तर प्रदेश के 75 जिलों में 45152 धार्मिक स्थल अवैध पाए गए थे। प्रमुख पर्यटन स्थल व मंदिरों के शहर वाराणसी में पहले सर्वे में 949 और दूसरे सर्वेक्षण में लगभग 800 धार्मिक स्थल अवैध पाए गए। इन धार्मिक स्थलों का फसली 1956 के रिकार्ड में कोई नाम नहीं था।

वाराणसी में जिला प्रशासन आंखें मूंदकर बैठा रहा और लोगों ने अपनी सहूलियत के लिए धार्मिक स्थलों का निर्माण कर लिया। सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार राज्य सरकार को इन अवैध धार्मिक स्थलों को हटाना था। मायावती सरकार ने कुछेक धार्मिक स्थल तोड़वाए भी लेकिन तब तक सरकार बदल गई। सपा सरकार ने इस मामले में खास रूचि नहीं दिखाई जिसके चलते वाराणसी समेत प्रदेश के अन्य स्थलों पर अवैध धार्मिक स्थलों का निर्माण होता रहा। सूत्रों और सरकारी अभिलेखों की पड़ताल में पता चलता है कि स्थानीय सर्किट हाउस परिसर में अवैध तरीके से धीरे-धीरे बन रहे एक धार्मिक स्थल पर भी कार्रवाई करने की जिला प्रशासन हिम्मत नहीं जुटा सका। सूबे की चर्चित आईएएस दुर्गा नागपाल ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के क्रम में गौतमबुद्ध नगर में एक अवैध निर्माणाधीन धार्मिकस्थल की दीवार गिरवा दी जिसको लेकर खासा बवाल हुआ और अंत में दुर्गा नागपाल को वहां से हटना पड़ा। दुर्गा नागपाल पर सरकार की कार्रवाई ने सूबे के अन्य अधिकारियों के हाथ-पैर ऐसा बांधा कि अब तक अधिकारी इस ओर पहल करने की हिम्मत नहीं जुटा सके।

काशी में आपको अधिकतर अवैध धार्मिक स्थल सड़कों के किनारे मिलेंगे। अतिक्रमणकारी पहले कुछ लोगों के साथ मिलकर सड़क किनारे मौजूद किसी पेड़ को निशाना बनाते हैं और वहां किसी धार्मिक स्थल की नींव रखते हैं। उसके बाद भंडारा-पूजा आदि का ढोंग किया जाता है और फिर एक छोटा सा धार्मिक स्थल तैयार हो जाता है। धार्मिक स्थल का निर्माण होने के साथ ही मंदिर के इर्द-गिर्द चाय-पान-मसाला आदि की दुकानें खुल जाती हैं। एक ओर धार्मिक स्थल तो दूसरी ओर उसी उपासना स्थल के इर्द-गिर्द दुकानें।

अतिक्रमणकारियों ने अपने स्वार्थ के लिए भगवान को इस कदर मोहरा बनाया कि आज कई धार्मिक स्थल चौड़ीकरण के चलते सड़क के बीच में आ गए हैं। चौकाघाट फ्लाईओवर के समीप भी एक ऐसा ही मंदिर था। उक्त धार्मिक स्थल को हटाने के साथ ही लोक निर्माण व सिंचाई राज्यमंत्री ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश की धज्जियां उड़ाते हुए फ्लाईओवर के नीचे ही उक्त धार्मिक स्थल को स्थापित करा दिया। लंका-रविंद्रपुरी मार्ग पर अस्सी को जाने वाले रास्ते के समीप ही चौड़ीकरण में एक मंदिर सड़क के बीचोंबीच आ गया है जो अब डिवाइडर का काम करता है।

जिला प्रशासन व पुलिस महकमा जानता सब है लेकिन शहर के विकास में बाधा बने इन अवैध धार्मिक स्थलों को हटाने के लिए कोई कदम आगे नहीं बढ़ाता। अब जब शहर बनारस स्मार्ट सूची में शामिल हो गया है तो शहर के विकास को लेकर चिंतित बुद्धिजीवियों को आस जगी है कि धर्म की आड़ में अतिक्रमण करने वालों की दुकानें बंद होंगी। विभिन्न धर्म से जुड़े उपासना स्थलों को उचित सम्मान व स्थान मिलेगा।

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