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इस्तीफा देने का ऐलान करके मायावती ने खेला बड़ा दांव, बिगड़ सकता बीजेपी का खेल

Updated: IST Mayawati
एक झटके से निकाली हवा, जानिए क्या है कहानी

वाराणसी. बसपा सुप्रीमो मायावती ने राज्य सभा से इस्तीफा देने की पेशकश कर बीजेपी का दांव बिगाडऩे की तैयारी की है। बसपा सुप्रीमो ने खास कारणों से ऐसा किया है। वह जानती है कि बीजेपी का दांव चल गया तो यूपी में बसपा का फिर से मजबूत होना कठिन हो जायेगा।

बसपा लगातार बीजेपी पर दलित उत्पीडऩ करने का आरोप लगाती रहती है। रोहित वेमूला, गुजरात व सहारनपुर सभी जगहों पर हुई घटना के लिए मायातवी ने बीजेपी को जिम्मेदार ठहराया है। इसको लेकर मायावती ने बीजेपी पर जमकर हमला बोला है। मायावती के आरोपो का असर हुआ है और बीजेपी भी बैकफुट पर आ गयी है। ऐसे में बीजेपी ने नया दांव खेला है, जिसके चलते ही मायावती ने इस्तीफा देने की बात तक कह डाली।

बीजेपी ने खेला है यह दांव, मायावती को करना पड़ा इस्तीफा देने का ऐलान

बीजेपी ने अपने उपर लगे दलित विरोधी आरोपों को धोने के लिए रामनाथ कोविंद को राष्ट्रपति पद का प्रत्याशी बनाया है और बीजेपी के प्रत्याशी की जीत तय मानी जा रही है। बीजेपी के इस दांव को बसपा सुप्रीमो मायावती समझ चुकी है। वह जानती है कि यदि राष्ट्रपति प्रत्याशी को लेकर दलित वर्ग में बीजेपी के प्रति सहानुभूति हो जाती है तो बसपा को बड़ा नुकसान होना तय है। ऐसे में बसपा सुप्रीमो मायावती ने सहारनपुर का मुद्दा उठाते हुए इस्तीफा देने की बात कह दी। जबकि सहारनपुर का अब ठंडे बस्ते में चला गया। मायावती ने यह भी कहा कि वह अपने समाज के हित के लिए कोई भी पद छोड़ सकती है। इससे साफ हो जाता है कि बसपा सुप्रीमो यह बताना चाहती है कि बीजेपी के राज्य में दलितों के साथ इंसाफ नहीं हो सकता है ओर दलित सम्मान के लिए मायावती पद भी छोड़ सकती है।

सपा नहीं बसपा को हुआ है सबसे अधिक नुकसान

वर्ष 2014 संसदीय चुनाव फिर यूपी विधानसभा 2017 में सबसे अधिक नुकसान बसपा को पहुंचा है। संसदीय चुनाव में बसपा को एक सीट नहीं मिली। विधानसभा चुनाव में बसपा को 19 विधायक मिल पाये। जिन दलित वोटरों के बल पर मायावती यूपी में विजयी पताका फहराती थी उसी वोट बैंक का एक बड़ा हिस्सा बीजेपी को मिल गया। मायावती की निगाहे अब 2019 में होने वाले संसदीय चुनाव पर है। मायावती जानती है कि इस चुनाव में भी उन्हें हार मिलती है तो प्रदेश की राजनीति में उनका हाल चौधरी अजीत सिंह जैसा हो जायेगा। ऐसे में मायावती अपने प्रमुख प्रतिद्वंदी दल सपा से हाथ मिलने को भी तैयार है। बसपा सुप्रीमो के मन में बीजेपी का जो डर बैठता जा रहा है वह बसपा के लिए अच्छा संकेत नहीं है।

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पूर्वांचल की राजनीति पर होगा बड़ा असर

मायावती अगर बीजेपी पर दलित विरोधी पार्टी होने का दाग लगा देती हैं तो इसका असर पूर्वांचल की राजनीति पर पड़ेगा। बसपा जानती है कि एक बार उसका जनाधार पूर्वांचल में मजबूत हो गया तो लखनऊ की सत्ता पर कब्जा करने से कोई नहीं रोक सकता है इसलिए बसपा सुप्रीमो ने खुद इस्तीफा देने की बात कहते हुए बीजेपी को झटका दिया है।

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