Patrika Hindi News
UP Election 2017

नामवर सिंह का मस्तक और महाश्वेता के चरण  

Updated: IST memorair of mahashweta devi
-लेखक रंगकर्मी व्योमेश शुक्ल की स्मृतियों में महाश्वेता देवी

-आवेश तिवारी
वाराणसी.बनारस शहर के बीचोबीच स्थित जगतगंज मोहल्ले के एक पुराने से घर में बैठा नौजवान आज उदास है। सामने कुछ तस्वीरें हैं और कुछ पीले पड़ चुके ख़त। मुझे देखते ही अपने माथे और हथेलियों को दिखाता हुआ नौजवान कहता है "यहाँ ,इस जगह चूमा था हमें महाश्वेता देवी ने, कहा था बनारस जल्दी आयेंगे नहीं आई ,अब वो कभी नहीं आएँगी"। 35 साल का यह नौजवान प्रख्यात लेखक आलोचक और रंगकर्मी व्योमेश शुक्ल है। थोड़ी देर की खामोशी के बाद अचानक कह पड़ता है "वामपंथियों को महाश्वेता देवी की हाय ने ख़त्म कर दिया ,कौन कहता है कि साहित्यकार लेखक के साथ भीड़ नहीं होती? जिस जगह महाश्वेता देवी खड़ी हो जाएं दो चार लाख की भीड़ जमा हो जाती थी,सेंगुर ,नंदीग्राम न होते अगर महाश्वेता देवी न होती। व्योमेश पूछता है "कौन लिखेगा हजार चौरासी की माँ ?मैं कहता हूँ "कोई नहीं "।
नबरुण तुम झूठ बोल रहे हो
महाश्वेता देवी के घर हुई अपनी पहली मुलाक़ात से जुड़े संस्मरण को साझा करते हुए व्योमेश कहते हैं "मैं केदारनाथ सिंह , नामवर सिंह ,कृपाशंकर चौबे और अरविन्द चतुर्वेद एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने कोलकाता गए हुए थे तय हुआ कि महाश्वेता देवी से मुलाक़ात की जाए । शाम चार बजे जब घर पहुंचा तो देखा कि एक कमरे में 10,12 साइकिलें रखी हुई हैं और कुछ कुर्सियां रखी है। थोड़ी देर बाद महाश्वेता देवी कमरे में आई तो मैं अचंभित रह गया! साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त नामवर सिंह ने अपने मस्तक को उनके क़दमों में झुका दिया उन्होंने नामवर सिंह को उनका कन्धा पकड़कर उठाया और नामवर सिंह के साथ साथ हम सभी का माथा चूमा। व्योमेश बताते हैं "उसी वक्त कुछ आदिवासी उनसे मिलने आये हुए थे महाश्वेता देवी ने कहा "नामवर इन्तजार करो वो लोग बहुत दूर से पैदल ही आयें हैं उनसे मिलकर आती है "। फिर क्या था एक घंटे का लम्बा इंतजार,करते भी क्यूँ नहीं हम महाश्वेता देवी से मिल रहे थे। फिर महाश्वेता देवी वापस आई और हमने बातचीत शुरू की |व्योमेश कहते हैं किमैं आश्चर्य में था "केवल बांगला नहीं देश की सभी भाषाओं और उसके लेखकों की पुस्तकों के बारे में वो बाते कर रही थी "।इस बातचीत के बीच अचानक उनके पुत्र नबरुण भी आ गए उन्होंने यूँही जिक्र छेड़ा कि एक बार माँ ,मैं और श्रीलाल शुक्ल एक साथ किसी प्रतिनिधिमंडल के साथ पाकिस्तान की यात्रा पर गए तो श्रीलाल शुक्ल सबकी नजर बजाकर एक पहाड़ की ओट में शराब पीने चले गए। नबरुण कह ही रहे थे कि महाश्वेता देवी ने उन्हें टोका और कहा "नबरुण तुम झूठ बोल रहे हो तुम भी उनके साथ गए थे "और पूरा वातावरण ठहाकों से गूँज उठा।व्योमेश कहते हैं मुझे बात में पता चला कि महाश्वेता देवी अपने परिवार वालों यहाँ तक की नबरुण से भी बिलकुल अलग रहती है एक लेखक की जो स्वतंत्रता होती है उसको उन्होंने पूरी तरह से जिया।
जिंदगी एक सफ़र है सुहाना
ऐसी ही एक घटना नामवर सिंह की 75 वें जन्मदिन की मौके पर देश के अलग अलग शहरों में आयोजित किये गए "नामवर के निमित्त" कार्यक्रम के दौरान घटी। कोलकाता में जब यह आयोजन हुआ तो महाश्वेता देवी को मुख्य अतिथि के तौर पर बुलाया गया ,अंत में जब महाश्वेता देवी को समापन भाषण के लिए बुलाया गया तो उन्होंने उपस्थित दर्शकों से कहा आप सब मेरे साथ गाइए "जिंदगी एक सफ़र है सुहाना ,यहाँ कल क्या हो किसने जाना "। बातचीत ख़त्म होती है बार तेज बारिश है ,जाते जाते व्योमेश कहते हैं यह एक दबंग महिला के जाने जैसा है।

यह भी पढ़े :
विवाह प्रस्ताव की तलाश कर रहे हैं ?भारत मैट्रीमोनी में निःशुल्क रजिस्टर करें !
Patrika.com

लेटेस्ट ख़बरें ई-मेल पर पाने के लिए सब्सक्राइब करें

Dus ka Dum
Ad Block is Banned Click here to refresh the page

???? ??????? ?? ??? ???? ????? ???