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Photo Icon पीएम मोदी से आगे निकले सीएम योगी, पहले ही कर दिया ये काम

Updated: IST Cm Yogi Adityanath
सभी अधिकारियों से 1 मई तक छिन जाएगा वीआईपी स्टेटस

वाराणसी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार ने 1 मई से सभी प्रकार के सरकारी वाहनों पर लालबत्ती लगाने पर पाबंदी लगा दी है। केंद्रीय कैबिनेट के निर्णय पर राज्य में अमल हुआ तो प्रदेश के साढ़े चार सौ से अधिक वीवीआइपी व वीआइपी गाड़ियों से लाल-नीली बत्ती हट जायेगी। लाल और पीली बत्ती हटने वालों में सरकार के मंत्री, विधानमंडल के विभिन्न कमेटियों के सभापति और अनुमंडल से सचिवालय में बैठे आइएएस और आइपीएस अधिकारी भी शामिल हैं।

 Keshav Prasad Maurya

उपमुख्यमंत्री समेत सरकार के सभी मंत्रियों की गाड़ियों से लाल बत्ती हट जायेगी। मोदी के इस फैसले से कई मंत्री नाखुश भी हैं। उनके नाराज होने की वजह है उनके पास से वीआईवी स्टेटस का छिनना और उनके रुतबे में कमी आना।

वहीं केंद्र की मोदी सरकार के इस फैसले के बाद उत्तर प्रदेश में भी गुरुवार की देर रात लाल-नीली बत्ती प्रतिबंधित कर दी गई। तत्काल प्रभाव से यह फैसला प्रभावी हो जाएगा। गुरुवार की सुबह से ही मंत्रियों में अपनी गाड़ी से लालबत्ती उतारने की होड़ लग गई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने केंद्र सरकार के इस फैसले का स्वागत किया तो मंत्री भी उनकी राह पर चल पड़े।

वीआइपी कल्चर खत्म करने के केन्द्र के फैसले के 24 घंटे के भीतर उत्तर प्रदेश में उसका व्यापक असर देखने को मिला। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में मंत्रियों ने गुरुवार देर रात शास्त्री भवन में यह फैसला किया। सिर्फ एंबुलेंस, सेना, फायर बिग्रेड और पुलिस के वाहनों पर ही बत्ती का प्रयोग हो सकेगा। वहीं उपमुख्यमंत्री और फुलपूर लोकसभा के सांसद केशव प्रसाद मौर्या ने अपनी गाड़ी से लाल बत्ती निकलवा दी है।

इमरजेंसी सेवाओं पर नीली बत्ती की छूट
उपसचिव स्तर के जो अधिकरी हैं वह सिर्फ नीली बत्ती का इस्तेमाल करते हैं। हालांकि जो इमरजेंसी सेवाएं जैसे एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड की गाड़ियां हैं वो नीली और लाल बत्ती का इस्तेमाल कर सकती हैं।

लाल बत्ती और नीली बत्ती के अलावा पीली बत्ती भी होती है। लेकिन इसका इस्तेमाल इनकम टैक्स कमिश्नर, रिवेन्यू कमिश्नर, डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक ही करते हैं। हालांकि पुलिस अधिकारियों और रक्षा मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों को लाल बत्ती लगाने की छूट है।

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28 साल पुराना है लाल बत्ती की परम्परा
लाल बत्ती हटाने के आदेश के साथ ही 28 साल पुरानी परंपरा खत्म हो गई है। एक मई के बाद कोई भी कार पर लाल बत्ती नहीं लगा पाएगा। सरकार ने लाल बत्ती हटाने के लिए मोटर व्हीकल एक्ट से वो नियम ही हटा दिया है जिसके तहत केंद्र और राज्य सरकारें वीआईपी लोगों को लाल बत्ती लगाने की इजाजत देती है।

सितंबर 2013 में ही सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक फैसले में लाल बत्ती के सीमित इस्तेमाल की पैरवी की थी। प्रधानमंत्री के आदेश के बाद अब एक मई से किसी भी कार में लाल बत्ती नहीं दिखेगी- देश में वीआईपी कल्चर खत्म करने की दिशा में ये बड़ा कदम है। प्रधानमंत्री खुद कह रहे हैं कि देश का हर आदमी अब वीआईपी है।

लाल बत्ती लगाने का इन्हें था अधिकार
मोटर व्हीकल एक्ट के मुताबिक, देश में लाल बत्ती इस्तेमाल करने वाले प्रमुख लोगों में राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, लोकसभा के अध्यक्ष, प्रधानमंत्री, सभी कैबिनेट मंत्री औऱ कुछ कैबिनेट सचिव के अलावा कुछ सचिव स्तर के अधिकारी हैं।

केवल राज्यमंत्री करते हैं लाल बत्ती का इस्तेमाल
राष्ट्रपति से लेकर कैबिनेट स्तर के सचिव लाल बत्ती के साथ हूटर का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके अलावा राज्यों के मुख्यमंत्री, राज्यपाल और कैबिनेट मंत्री भी लाल बत्ती के साथ हूटर का इस्तेमाल करते हैं। जबकि राज्यमंत्री केवल लाल बत्ती का इस्तेमाल करते हैं।

नीली बत्ती लगाने का इन्हें था अधिकार
सभी प्रधान सचिव, पुलिस-अपर पुलिस महानिदेशक, सरकार के सचिव, महानिबंधक-निबंधक उच्च न्यायालय, प्रमंडलीय आयुक्त, पुलिस महानिरीक्षक, क्षेत्रीय पुलिस महानिरीक्षक, राज्य परिवहन आयुक्त, क्षेत्रीय पुलिस उप महानिरीक्षक , जिला व सत्र न्यायाधीश, प्रधान न्यायाधीश, समकक्ष, जिला पदाधिकारी, अपर जिला व सत्र न्यायाधीश, उप विकास आयुक्त, अपर जिला दंडाधिकारी, मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी, अनुमंडल पदाधिकारी, अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी।

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