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UP Election 2017

राजा भैया को लग सकता है झटका, ये राजकुमारी देंगी चुनौती   

Updated: IST raja bhiaya
वर्चस्व के लिए फिर भिड़ेगा प्रतागढ़ का ये दो राजघराना, दिलचस्प होगा मुकाबला...

वाराणसी/प्रतापगढ़. यूपी विधानसभा 2017 चुनाव में प्रतापगढ़ के दो राजनीतिक घराने फिर आमने-सामने हो सकते हैं। लोकसभा चुनाव के बाद अब विधानसभा चुवान में भी कड़ी टक्कर हो सकती है। उत्तर प्रदेश की राजनीति में राजाभैया का एक बड़ा कद है। राजा भैया को अगर कोई चुनौती देता है तो वह कालाकांकर राजघराना। इन दोनों राजघरानों की राजनीतिक अदावत जगजाहिर है। कालाकांकर राजघराना कांग्रेस से जुड़ा है।

खुद राजकुमारी रत्ना सिंह प्रतापगढ़ से चार बार सांसद के लिए चुनी गईं। हालांकि उन्हें हार का सामना भी करना पड़ा, 2004 में भदरी रियासत से जुड़े अक्षय प्रताप सिंह के हाथों हार का सामना करना पड़ा था। दोनों ही घरानों का अपना वजूद है, अपना जनाधार है। लोकसभा चुनावों में एक बार राजाभैया के भदरी घराने ने कलाकांकर रियासत को धूल चटाई तो दूसरी बार रत्ना ने उसी तेवर से अक्षय प्रताप को हराकर करारा जवाब दिया। हालांकि 2014 के चुनाव में किसी राजघराने की नहीं चली और जीत अपना दल के कुंवर हरिवंश सिंह की हुई।

raja bhaiya-akshya-rajkumari ratna singh

दरअसल, प्रतापगढ़ की राजनीति हमेशा ही कुछ अलग पटकथा लिखती रही है। कहा जाता है कि यहां सियासत राजाभैया से शुरू होती है और वहीं खत्म हो जाती है, लेकिन इससे इतर भी जिले में कई बड़े राजनीतिक चेहरे हैं, जिसमें से एक हैं प्रमोद तिवारी और दूसरी राजकुमारी रत्ना सिंह। इन दोनों नेताओं का जलवा किसी से कम नहीं है। यही कारण है कि राजा भैया खेमा कभी नहीं चाहता कि राजकुमारी रत्ना सिंह अथवा उनसे कोई जुड़ा व्यक्ति चुनाव जीते।

गौरतलब है कि प्रतापगढ़ की सियासत राजाभैया और राजकुमारी रत्ना सिंह के इर्द-गिर्द घूमती है। दोनों घरानों की लोगों में अच्छी पैठ है। राजकुमारी रत्ना सिंह कांग्रेस से हैं, जबकि राजा भैया सपा का समर्थन करते हैं। दोनों राजनीतिक घरानों की अदावत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 2004 के लोकसभा चुनाव में राजाभैया ने रत्ना सिंह को हराने के लिए अपने चचेरे भाई अक्षय प्रताप सिंह को सपा के टिकट से मैदान में उतार दिया था।
2009 में राजकुमारी ने लिया हार का बदला
2009 के लोकसभा चुनाव में फिर दोनों राजघराने आमने-सामने हुए। इस बार राजकुमारी रत्ना सिंह ने अक्षय प्रताप को हराकर बदला ले लिया। राजकुमारी रत्ना सिंह ने 2009 में 2004 में हुई हार का बदला लिया। इस चुनाव में एक बार फिर रत्ना सिंह के सामने अक्षय प्रताप थे, लेकिन इतिहास दोहरा नहीं पाया। रत्ना सिंह ने अक्षय प्रताप को हराया। चुनाव में राजकुमारी को 1,69,137, अक्षय प्रताप को 1,21,252 मत मिले। अक्षय चुनाव में तीसरे नंबर पर थे। यह चुनाव इसलिए भी रोचक था कि बाहुबली अतीक अहमद भी मैदान में थे। वे अपना दल के प्रत्याशी थे, लेकिन उन्हें भी इस चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था।

जाने राजकुमारी रत्ना सिंह के बारे में
रत्ना सिंह का जन्म 29 अप्रैल 1959 को हुआ। वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की सदस्य हैं। रत्ना सिंह के पिता राजा दिनेश सिंह भी प्रतापगढ़ से सांसद रह चुके थे। रत्ना सिंह ने कॉमर्स से स्नातक की पढ़ाई की। इनका विवाह श्री जय सिंह सिसोदिया के साथ हुआ। रत्ना सिंह कालाकांकर रियासत की वंशज हैं। उनके पिता दिनेश सिंह इंदिरा गांधी के करीबी थे। नेशनल इलेक्शन वाच के अनुसार राजकुमारी रत्ना सिंह की कुल संपत्ति 67 करोड़ 82 लाख रुपये है।

विधानसभा 2017 में दिलचस्प होगा मुकाबला
जानकारों की माने तो विधानसभा 2017 चुनाव में मुकाबला दिलचस्प होगा। कांग्रेस ने जो रणनीति बनाई है उसके तहत वह अपने पूर्व सांसदों को मैदान में उतारना चाहती है। ऐसे में राजकुमारी रत्ना सिंह भी मैदान में आ सकती हैं। अगर ऐसा हुआ तो राजाभैया खेमा उनको हराने के लिए फिर जोर लगाएगा। ऐसे में प्रतापगढ़ की राजनीति दिलचस्प मोड़ पर पहुंचेगी।

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