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पीएम के गढ़ में सपा-कांग्रेस गठबंधन को लग चुका झटका, बीजेपी व बसपा को फायदा

Updated: IST Congress and SP aliance
जानिए क्यों बदल रहे समीकरण

वाराणसी. सपा और कांग्रेस गठबंधन में बिखराव का सीधा लाभ बीजेपी व बसपा को मिल रहा है। पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र में गठबंधन बिखरने से बीजेपी बहुत खुश है। कांग्रेस व सपा के नेताओं ने गठबंधन की ताकत दिखाने के लिए एक साथ मिल कर दोनों दलों के प्रत्याशियों का नामांकन किया था लेकिन अब अलग-अलग प्रत्याशियों के मैदान में उतराने से गठबंधन का धागा खुलने लगा है।
पीएम नरेन्द्र मोदी के संसदीय क्षेत्र की कैंट विधानसभा सीट की लड़ाई अब सबसे दिलचस्प हो चुकी है। यहां पर सबसे पहले बीेजेपी में प्रत्याशी की सूची जारी होने के बाद बगावत हुई थी। बीजेपी में बगावत शांत भी नहीं हुई थी कि सपा और कांग्रेस गठबंधन ने कांग्रेसी नेता अनिल श्रीवास्तव को प्रत्याशी बना कर बीजेपी की परेशानी को बढ़ा दिया था। इसी बीच इसी सीट से सपा के सिंबल पर रीबू श्रीवास्तव ने पर्चा दाखिल करके लड़ाई दिलचस्प बना दी है। इस सीट पर फिलहाल सपा, कांग्रेस, बीजेपी व बसपा के प्रत्याशियों की बीच लड़ाई होनी है। सपा के जिन वोटरों को गठबंधन रास नहीं आ रहा था उनको भी एक मौका मिल गया है। फिलहाल नाम वापसी के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पायेगी। इतना तो साफ हो गया है कि एक सीट पर गठबंधन में दरार हो चुकी है जिसका विरोधी दलों को लाभ मिलना तय है।

अन्य सीटों पर भी पड़ेगा असर

यदि कैंट विधानसभा में गठबंधन का बिखराव नहीं रुकता है तो इसका असर अन्य सीटों पर भी होगा। सपा के अब्दुल समद अंसारी को कांग्रेस ने शहर उत्तरी से प्रत्याशी बनाया है। जबकि शहर दक्षिणी की सीट पर पूर्व सांसद डा.राजेश मिश्र गठबंधन के तहत चुनाव लड़ रहे हैं। सेवापुरी व रोहनिया में भी सपा और कांग्रेस गठबंधन मिल कर चुनाव लड़ रहा है। ऐसे में एक सीट पर बिखराव होने का असर गठबंधन की अन्य सीटों पर पडऩा तय है।

जनता तय करेगी कि किसे होगा लाभ

विधानसभा की जनता तय करेगी कि गठबंधन के बिखराव का लाभ किस विरोधी दल को पड़ेगा। बीजेपी अपनों की बगावत से परेशान है। जबकि बसपा में बगावत नहीं है। ऐसे में गठबंधन में बिखराव का लाभ किस दल को मिलता है यह चुनाव परिणाम ही बतायेगा।

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