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पाक उच्चायुक्त बोले, सच्ची होती सर्जिकल स्ट्राइक तो मिलता तत्काल जवाब 

Updated: IST pakistani high commissioner and surgical strike
-सर्जिकल स्ट्राइक पर विपक्षी नेताओं से हुई थी पाकिस्तानी हाई कमिश्नर की बातचीत,पढ़िए इंटरव्यू

आवेश तिवारी

वाराणसी । सीमा पर लगातार जारी तनाव और सर्जिकल स्ट्राइक के बाद बने अलग तरह के माहौल के बीच पाकिस्तान को भारत के साथ नए सिरे से बातचीत शुरू होने का इंतजार है। पिछले दिनों लखनऊ में आयोजित पत्रिका के विमर्श समारोह की नोट में भाग लेने आए अब्दुल बासित ने दोनों देशों के रिश्तों पर खुल कर बात की। उन्होंने कहा कि भारत को जबरन बातचीत की मेज पर नहीं बिठाया जा सकता, फिर भी हम इंतजार करेंगे। भारत हमारे लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि आप दोस्त बदल सकते हैं, पड़ोसी नहीं। इस दौरान उनका दर्द भी यह कहकर उभरा कि हमने तानाशाही भी झेली और सीमाओं पर तनाव भी सहा है।

एक पाकिस्तानी राजनयिक के लिए हिन्दुस्तान आना एक दोस्त के यहाँ आने जैसा है, एक पड़ोसी के यहाँ आने जैसा है या एक दुश्मन के यहाँ आने जैसा?

पड़ोसी की जगह कोई नहीं ले सकता। आप दोस्त बदल सकते हैं लेकिन पड़ोसी नहीं बदल सकते हैं । यह अच्छा हो कि हम मिल जुल कर रहें। दो राष्ट्रों के बीच जो ताल्लुक होते हैं उनमे कोई बड़ा छोटा नहीं होता है। अगर हम यह बात माने लें तो सारी समस्याओं का समाधान खुद बखुद निकल जाएगा।

आपने जर्मनी, रूस व न्यूयार्क में भी काम किया है, भारत में काम करना कितना आसान या मुश्किल है?

हिन्दुस्तान हमारे लिए अहम् मुल्क है। निस्संदेह दोनों मुल्कों के बीच तनाव की स्थिति है ऐसे में चुनौतियां भी है। लेकिन यह भी सही है कि चूँकि जुबान एक जैसी है, जान पहचान भी है तो काम करना कुछ आसान भी हो जाता है |

इधर दोनों देशों के बीच कूटनीति के स्तर पर चुनौतियाँ बढती जा रही हैं, आपके यहाँ भी एक कर्मचारी के खिलाफ कारवाई हुई। अभी कुछ दिन पहले इस्लामाबाद से कराची पहुंचे भारतीय राजनयिक बम्बावाला को एक कार्यक्रम में बोलने नहीं दिया गया।

देखिये, मुझे नहीं मालूम वो किस वजह से बोल नहीं पाए। मैं आपको गिनवाना नहीं चाहता हूँ लेकिन मैं पिछले ढाई साल से यहाँ हूँ। बहुत से ऐसे कार्यक्रम हुए जहाँ मैं नहीं जा सका |

अब तक अपने कार्यकाल में आपकी विदेश मंत्री से कितनी मुलाकातें हुई हैं?

हम आपको नहीं बता सकते हैं कि हमारी कितनी बार मुलाकातें हुई हैं, लेकिन यह जरुर है कि विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों से हमारी मुलाक़ात होती रहती है।

पाकिस्तान में सार्क सम्मलेन नहीं हो पाया। बांग्लादेश, भूटान सहित सभी ने विरोध किया। क्या पाकिस्तान को नहीं लगता कि वो दक्षिण एशियाई देशों से कटता जा रहा है ?

अन्य देशों से अलग थलग पड़ने की बात सही नहीं है। सार्क सम्मलेन स्थगित हुआ है, निरस्त नहीं हुआ है। 19वें सार्क सम्मलेन की हम मेजबानी करेंगे। अब यह नहीं कह सकते कि कब तक यह सम्मलेन होगा लेकिन जब भी होगा पाकिस्तान में होगा |

जब आप भारत के लोकतंत्र व अर्थव्यवस्था की तुलना अपने मुल्क के लोकतंत्र और अर्थव्यवस्था से करते हैं तो क्या पाते हैं?

हर देश अपने आप में अलग है। जो आपकी समस्याएं है वो हमारे यहाँ नहीं है। यह जो तुलना करना है वो ठीक नहीं है | आपने आतंरिक चुनौतियां उतनी नहीं सही हैं जितनी हमने सही हैं। हमने तानाशाही भी देखी है। पूर्वी और पश्चिमी सीमायें तनाव पूर्ण रही हैं। पिछले 15 सालों में जितना विकास किया है उतना आप सोच भी नहीं सकते। हमारी न्यायिक प्रणाली, मीडिया, सिविल सोसायटी ने खासा विकास किया है। हमारा मीडिया तो आपको मीडिया से भी आगे है। वो पाकिस्तान सरकार की सुबह शाम आलोचना करती है। दरअसल भारत से संबंधों से लेकर पूरी विदेश नीति तक, हम एक प्रक्रिया से गुजर रहे हैं। इसमें निस्संदेह समय लगेगा। वैसे भी भारत की अपनी ताकत व कमजोरियां हैं और हमारी अपनी।

29 सितम्बर को भारत द्वारा की गई सर्जिकल स्ट्राइक से आपने साफ़ इनकार कर दिया। पाकिस्तानी मीडिया व आप अलग-अलग बात कह रहे हैं। क्या हुआ था उस दिनय़

देखिये आपके यहाँ के मीडिया का भी एक हिस्सा सर्जिकल स्ट्राइक पर सवाल खड़ा कर रहा है और कह रहा है कि कोई सर्जिकल स्ट्राइक नहीं हुई। हमारा मानना है कि अगर कोई सर्जिकल स्ट्राइक होती तो पाकिस्तान उसका जवाब तुरंत देता इसमें कोई सवाल ही नहीं उठता कि पाकिस्तान जवाब नहीं देता | देखिये आपके डीजीएमओ का जो आधिकारिक बयान है उसमे साफ़ कहा गया है कि सर्जिकल स्ट्राइक नियंत्रण रेखा पर हुई न कि नियंत्रण रेखा के पार हुई |

आप भारत के साथ बातचीत के लिए पहल करने जा रहे हैं या इन्तजार करने जा रहे हैं ?

हम इन्तजार कर रहे हैं। बातचीत के लिए पकड़ कर के भारत को बातचीत की मेज पर नहीं लाया जा सकता है। हाँ हमारी कोशिशें जारी है। हम तो कहते ही रहते हैं कि केवल बातचीत से ही भारत और पाकिस्तान के उलझे हुए मसले सुलझ सकते हैं। हमें तय करना होगा कि हमेशा यह स्थिति बनी रहेगी या सुधरेगी। देखिये भारत के साथ संबंध ठीक होंगे तो हमारे लिए आसानी होगी। अगर भारत तैयार नहीं होता तो यह स्थिति आगे भी जारी रहेगी |

सर्जिकल स्ट्राइक को लेकर आप भारत के अन्य राजनैतिक दलों से बात हुई है कि नहीं?

देखिये आप मिनट्स पूछ रहे हैं (हँसते हुए )। हाँ बातचीत होती रहती है, अन्य मुद्दों पर भी बातचीत होती है। हमारे काउंटरपार्ट बाम्बावाला भी पाकिस्तान में अलग अलग दलों से बातचीत करते होंगे

आपने पाकिस्तानी आजादी के मौके पर बुरहान वानी और कश्मीर की आजादी को लेकर बेहद विवादित बयान दिया था? नवाज शरीफ ने भी यूएन में उसे हीरो बना दिया?

जम्मू और कश्मीर का मुद्दा एक सच्चाई है। इसी की वजह से भारत और पाकिस्तान ने युद्ध लड़े और तल्खियाँ रही हैं | अगर बुरहान वानी की मैयत में दो लाख लोग निकलकर आ रहे हैं तो कोई तो बात होगी? आप कश्मीर में जाकर किसी से पूछ लीजिये कि बुरहान वानी कौन था, उनके वालिद से पूछ लीजिये |

2014 में जब आप आये थे तो भारत पाकिस्तान के बीच बातचीत की सम्भावना बनी थी लेकिन उसी बीच आपने शब्बीर शाह से मुलाक़ात कर ली ?आपको नहीं लगता पाकिस्तान एक मौका चूक गया ?

मुलाकातें तो लम्बे समय से जारी थी और होती रहेंगी। हमने कोई नया काम नहीं किया था । कोई नया काम होता या हम पहली बार मुलाक़ात कर रहे होते तो नाराजगी वाजिब थी। सच्चाई यह है कि जिनका विरोध किया जा रहा है, पिछले 20 सालों से उन्हें भारत सरकार खुद भी मान्यता देती आयी है।

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