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निर्माणाधीन मकान का छज्जा गिरा, तीन मजदूरों की मौत

Updated: IST building Collapses
मौक पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा, जानिए क्या है कहानी

वाराणसी. चौबेपुर थानाक्षेत्र के कादीपुर रेलवे स्टेशन के सामने शुक्रवार को एक दर्दनाक हादसा हो गया है। यहां पर निर्माणाधीन मकान का छज्जा गिरने से तीन मजदूरों की मौत हो गयी है। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
जलनिगम के रिटायर्ड अवर अभियंता जयराम गुप्ता ने कादीपुर रेलवे स्टेशन के सामने परानापुर में जमीन खरीद कर उस पर मकान बनवा रहे थे। मकान का काम ठेके पर दिया गया था झारखंड निवासी सेराज ने ही मकान बनाने का ठेका लिया था और बाहर से मजदूर मंगा कर काम करा रहा था। निर्माणाधीन मकान में चार मजदूर चढ़ कर सेंटरिंग कर रहे थे। इसी समय तेज आवाज के साथ छज्जा नीचे की दीवार पर जा गिरा। छज्जा गिरते ही उसके नीचे तीन मजदूर दब गये। स्थानीय लोगों ने छज्जा का मलबा हटा कर मजदूरों को निकालने का प्रयास किया। लोगों ने ईटे हटा कर मजदूरों को बाहर निकाला। स्थानीय लोगों ने देखा कि झारखंड निवासी अब्बास (30) व मुस्तकीम (38) की मौके पर ही मौत हो गयी थी, जबकि गंभीर रुप से घायल चौबेपुर के गरथौली निवासी रामसेवक प्रजापति उर्फ सेवा लाल (35) की सांस चल रही थी। स्थानीय लोग जब गंभीर रुप से घायल रामसेवक को अस्पताल ले कर जा रहे थे तभी उसने भी दम तोड़ दिया। एक साथ तीन मजदूरों की मौत होने से गांव में मातम का माहौल हो गया है।

मौके से घिसक गया ठेकेदार
छज्जा गिरने के बाद हुई मौत को देखने के बाद ठेकेदार सिराज की हालत भी खराब हो गयी थी। थोड़ी देर तक वह बदहवास रहा। स्थानीय लोगों ने दुर्घटना की सूचना 100 पर दी तो मौके पर पुलिस भी पहुंच गयी। पुलिस के पहुंचने से पहले ही ठेकेदार वहां से खिसक गया था। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

महिला अस्पताल में दीवार गिरने से हुई थी बच्चे की मौत
जिला महिला अस्पताल में कुछ माह पहले दीवार गिरने से एक बच्चा गंभीर रुप से घायल हो गया था। अस्पताल में पश्चिम बंगाल से बुला कर मजदूर लगाये गये थे। गंभीर रुप से घायल बच्चे के माता-पिता दोनों ही अस्पताल में मजदूरी कर रहे थे। बच्चा जब गंभीर रुप से घायल हुआ तो उसे शिवप्रसाद गुप्त मंडलीय अस्पताल में भर्ती कराया गया था यहां पर चिकित्सकों ने बच्चों को ट्रामा सेंटर ले जाने को कहा था, लेकिन पैसा नहीं होने के चलते मजदूर मां-बाप ऐसा नहीं कर पाये थे। वह ठेकेदार का इंतजार कर रहे थे, ताकि पैसा मिले तो वह बच्चों का कही और इलाज कराये। ठेकेदार वहां पर नहीं आया और अंत में बच्चे की जान चली गयी थी।

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