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UP Election 2017

न झंडा पोस्टर न लाउडस्पीकर, आयोग की दहशत में दम तोड़ रहा चुनावी माहौल 

Updated: IST election and election commission
-आयोग की दहशत से उत्तर प्रदेश में अब तक नहीं चुनावी माहौल

आवेश तिवारी
वाराणसी- गोंडा में हुए एक कवि सम्मेलन में एक कवि ने कैबिनेट मंत्री विनोद सिंह उर्फ पंडित सिंह की शान में कविता पढी। एक कविता के बोल थे - सब दुखों में हैं सुखदायक पंडित सिंह , बनेंगे फिर इस बार विधायक पंडित सिंह, जैसे ही यह बात फ्लाइंग स्क्वाड के मजिस्ट्रेट को पता चली उन्होंने कवि और कवि सम्मेलन के आयोजक दोनों पर आचार संहिता के उल्लंघन का मुकदमा थानें में दर्ज करा दिया।यह कोई एक घटना नहीं है,अचार संहिता के उल्लंघन के नाम पर चुनाव आयोग जिस तरह की कारवाईयाँ कर रहा है वो बेहद हास्यास्पद है। दुखद है कि आयोग की जो उर्जा मतदाताओं को जागरूक करने में लगानी चाहिए उस उर्जा का इस्तेमाल घरों और वाहनों से झंडा उतरवाने और उम्मीदवारों को छोटी छोटी गलतियों पर नोटिस भेजने में जाया हो रही है।
लोकतंत्र के उत्सव में आयोग का मर्सिया
देश के सर्वाधिक शक्तिशाली प्रदेश में नयी सरकार का गठन होने को है ,एक बार फिर चुनावी महाभारत में जनता को अपने मताधिकार के अस्त्रों का प्रयोग करना है। प्रथम चरण के मतदान में अब जबकि मात्र एक महीने का समय रह गया है लेकिन अब तक पुरे देश में चुनाव का माहौल कहीं नजर नहीं आ रहा है ,अलबत्ता समूचे प्रदेश में विकास और कल्याण की योजनाओं पर पाबंदी जरुर लग गयी है।आचार संहिता लागू होने से प्रत्याशियों और पार्टियों का वास्तविक खर्च कम हुआ है या नहीं हुआ है ये तो अलग विषय है लेकिन जनता के लिए मुश्किलों का एक और दौर शुरू हो गया है। आलम ये है की लोकतंत्र का उत्सव चुनाव आयोग की नीतियों की वजह से आम हिन्दुस्तानियों का मर्सिया बना गया है।वरिष्ठ समाजवादी नेता विजय बहादुर कहते हैं चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था होते हुए भी नौकरशाहों द्वारा ही संचालित होती है .भारत में नौकरशाही हर मामले में दमनकारी और दंडात्मक प्रक्रिया अपनाती है |चुनावों के मामले में भी यही हो रहा है।
यह कैसी आचार संहिता
उत्तर प्रदेश के भदोही जनपद में समूचे विधान सभा क्षेत्र में पेयजल की समस्या काफी चर्चा में है बताया जाता है कि सूखे हुए और टूटे हुए हैण्ड पम्पों की मरम्मत का काम पुलिस ने रोक दिया ,जल निगम के वाहनों को मरम्मत के सामान सहित थाने में खडा कर दिया गया ,इस इलाके में दो माह तक हैण्ड पम्प सूखे रहेंगे।ये तो केवल एक बानगी है समूचे देश में बुनियादी जरूरतों को लेकर हाहाकार की स्थिति है ,अगले दो महीनो तक आचार संहिता के नाम पर आम नागरिक के सीने पर मूंग दरी जायेगी और ये हालत बने रहेंगे।यह बात काबिलेगौर हैं कि क्या हैण्ड पम्पों की मरम्मत से भी आचार संहिता का उल्लंघन होता है ?क्या दूर दराज के गांवों में डाक्टर्स के जाने से आचार संहिता का उल्लंघन होता है ?
कैसे होगा चुनाव प्रचार
चुनाव प्रचार के प्रमुख उपकरण हैं झंडे ,पोस्टर ,बैनर ,पर्चे , ध्वनि विस्तारक यन्त्र आदि ,हम सब पर पाबंदी है।यदि हम किसी पार्टी के समर्थक है तो हमें अपने घर पर झंडा लगाने से क्यों रोका जाना चाहिए ?पूरे विश्व में चुनाव प्रचार के दौरान झंडों का प्रयोग किया जाता है ,सार्वजानिक जगहों पर पूरे मंच साल तक होर्डिंग्स लगते हैं।अभी चुनावों की घोषणा से ठीक पहले पूरे लखनऊ शहर में केवल नरेन्द्र मोदी और अखिलेश यादव ही नजर आ रहे थे ,लेकिन अब इन सबके पोस्टर तो गायब हो ही गए हैं कहीं किसी शहर में चुनाव जैसा कोई माहौल नजर नहीं आता। आश्चर्यजनक यह है कि लोग अपने घरों में झंडे लगाने से डर रहे हैं तो उम्मीदवार पम्पलेट छपवाने से भी बच रहा है। | इस दहशत भरे माहौल में चुनाव कैसे होंगे यह देखने वाली बात है।

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