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UP Election 2017

नीतीश कुमार के पीएम मोदी समर्थन से मतदाता परेशान, विधानसभा चुनाव में किधर जायेंगे वोटर

Updated: IST CM Nitish Kumar
पीएम के गढ़ में लगी सबकी निगाहे, जानिए क्या है मामला

वाराणसी. पीएम नरेन्द्र मोदी ने 8 नवम्बर को 500 व 1000 रुपये की नोटबंदी की है जिसके बाद से देश में कोहराम मचा हुआ है। विपक्षी दलों ने इसे जनता विरोधी बताया है जबकि सीएम नीतीश कुमार की जदयू ऐसी पार्टी है जिसने खुल कर नोटबंदी का समर्थन किया है। यूपी विधानसभा लडऩे की तैयारी कर रही पार्टी के समर्थक अब परेशान हो गये हैं उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि वह किधर जाये।
पीएम नरेन्द्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी से ही बिहार के सीएम जदयू ने चुनावी शंखनाद किया है। यहां पर नीतीश कुमार की पार्टी जदयू ने शराबबंदी को मुख्य मुद्दा बनाया है। नीतीश कुमार ने अपनी जनसभा में यूपी सरकार पर उतने हमले नहीं किये थे जितना कि मोदी सरकार और आरएसएस पर किये थे। पिंडरा में हुई रैली में नीतीश कुमार ने आरएसएस मुक्त भारत बनाने की मांग तक कर दी थी लेकिन पिछले कुछ दिनों से नीतीश कुमार ने नोटबंदी को लेकर पीएम मोदी को जो समर्थन किया है उससे जदयू से जुडऩे को तैयार वोटर बहुत परेशान हो चुके हैं। उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि वह क्या करे।

पटेल वोटरों को हो रही सबसे अधिक परेशानी

यूपी में वर्ष 2017 में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। ऐसे में पटेल वर्ग के वोटरों को अपनी तरफ करने के लिए सपा, बसपा, कांग्रेस व बीजेपी ने खुद दांव चले हैं। इसी वर्ग के वोटरों के भरोसे सीएम नीतीश कुमार की पार्टी जदयू ने भी चुनाव लडऩे का ऐलान किया है। अभी तक पटेल वोटरों की स्थिति स्पष्ट थी कि कि उन्हें किधर जाना है लेकिन बीजेपी व नीतीश कुमार की बढ़ती सक्रियता के चलते अब यह वोटर परेशान हो गये हैं।

जानिए वोटर क्यों हो रहे परेशान

जदयू ने यूपी चुनाव लडऩे की घोषणा की है। दूसरी तरफ मीडिया में यह बातें भी सामने आ रही है कि नीतीश कुमार व बीजेपी में फिर से दोस्ती हो सकती है हालांकि अभी तक दोनों ही दल ने इस संदर्भ में कुछ नहीं कहा है। बिहार की पूर्व सीएम राबड़ी देवी ने मंगलवार को पीएम नरेन्द्र मोदी व सीएम नीतीश कुमार को लेकर बेहद आपत्तिजनक बयान भी दिया है जिसमे राबड़ी देवी की हताशा झलक रही है। वाराणसी के वोटरों को यह लग रहा है कि यदि यूपी चुनाव के बाद बीजेपी व जदयू में फिर से गठबंधन हो जाता है तो यूपी में जदयू को दिया गया वोट बेकार हो जायेगा। जदयू के समर्थक काफी असमंजस में है और उनकी निगाहे अब नीतीश कुमार पर टिकी हुई है ताकि वह यूपी चुनाव के पहले गठबंधन को लेकर स्थिति स्पष्ट कर दे।

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