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जब तड़तड़ायी थी एके-47 और बदल गया था छात्रसंघ का नियम

Updated: IST AK-47
छात्रसंघ चुनाव वही लड़ सकता था जो बाहुबली होने के साथ धनवान हो।

वाराणसी. महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में 26 सितम्बर को छात्रसंघ चुनाव होने वाले है। वैसे तो विश्वविद्यालय में छात्रसंघ चुनाव होना आम बात है लेकिन काशी विद्यापीठ में एक बार ऐसा चुनाव हुआ था कि छात्रसंघ की नियमावली ही बदलनी पड़ गयी।
काशी विद्यापीठ में वर्ष 2000 के पहले दबंग छात्र राजनीति का महत्व रहता था। छात्रसंघ चुनाव वही लड़ सकता था जो बाहुबली होने के साथ धनवान हो। आम छात्र तो पुस्तकालय मंत्री पद तक ही सिमट कर रह जाते थे और दबंग छात्रनेताओं का ही अध्यक्ष, उपाध्यक्ष व महामंत्री जैसे पदों पर कब्जा रहता था। काशी विद्यापीठ के छात्रसंघ चुनाव के पहले या बाद में गोली-बम चलना आम बात मानी होती थी। मतदानद के दिन अगर बम न चले तो कहा जाता था कि इस बार चुनाव हुआ ही नहीं। किसी छात्रनेता को एक बार चुनाव में कामयाबी नहीं मिलती थी उसे पांच से छह बार चुनाव लडऩा पड़ता था तब जाकर वह चुनाव जीतता था। काशी विद्यापीठ का छात्रसंघ चुनाव वर्ष 1997अप्रैल में प्रदेश भर की सुर्खिया बन गया था जब नवनिर्वाचित छात्रसंघ अध्यक्ष रामप्रकाश पाण्डेय बाबा, पूर्व अध्यक्ष सुनील राय, मुन्ना राय व भोनू मल्लाह की नरिया चौराहे पर एक-47 से हत्या कर दी गयी थी। जबकि मारूति वैन में सवार एक अन्य छात्रनेता राजू द्विवेदी ही बच पाया था। पूर्वांचल में हुए अपराध में इस घटना को सबसे चर्चित माना जाता है जब अभिलाष सिंह की मौत का बदला लेने के लिए मोनू सिंह ने अपने साथियों के साथ नरिया चौराहे पर घटना को अंजाम दिया था। एक साथ कई एके-47 तड़तड़ायी थी। काशी विद्यापीठ के नवनिर्वाचित अध्यक्ष की मौत के बाद परिसर में इसी पद पर जून 1997 में फिर से उपचुनाव हुआ था जिसमे नन्दू सिंह ने अध्यक्ष पद पर बाजी मारी थी।

जानिए क्यों बदलना पड़ा नियम
काशी विद्यापीठ में पहले छात्रसंघ चुनाव में जीते प्रत्याशियों को शपथ लेने के लिए कई दिनों का इंतजार करना पड़ा था। प्रत्याशी एक बड़ा सामारोह करते थे और फिर शपथ लेते थे लेकिन अब ऐसा नहीं होता है। काशी विद्यापीठ के नवनिर्वाचित अध्यक्ष रामप्रकाश पाण्डेय बाबा की मौत के बाद छात्रसंघ पर संवैधानिक संकट आ गया था यदि रामप्रकाश पाण्डेय बाबा ने शपथ ली होती तो छात्रसंघस उपाध्यक्ष को ही अध्यक्ष का चार्ज दे दिया जाता। इस घटना के बाद काशी विद्यापीठ प्रशासन ने चुनाव परिणाम आने के तुरंत बाद ही प्रत्याशियों को शपथ दिलाने की परम्परा शुरू कर दी थी। नवनिर्वाचित पदाधिकारियों को शपथ दिलाने के बाद पुलिस सुरक्षा में उनके आवास पर छोड़ा जाता है ताकि फिर कभी छात्रसंघ पर संवैधानिक संकट न आये। वाराणसी के अन्य विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों में भी नये नियम का पालन किया जाता है।

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