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कौन हैं देश के दुश्मन,कौन करता है इन्हें सपोर्ट?

Who is supporting india enemies ?

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Who is supporting india enemies ?
8/7/2013 12:58:00 PM
Who is supporting india enemies ?
Who is supporting india enemies ?

जयपुर। जम्मू-कश्मीर के पुंछ इलाके में भारतीय सीमा में घुसकर भारतीय सेना पर हमला करके पांच भारतीय सैनिकों को आतंककारियों ने मौत के घाट उतार दिया। इन पांच सैनिकों के शहीद होने पर पाकिस्तान सरकार ने कहा कि यह पाकिस्तानी सेना ने हमला नहीं किया है, यह हमला आतंककारियों द्वारा किया गया है। इधर, भारत के रक्षामंत्री एके एंटनी ने भी कहा है कि पाकिस्तानी सेना की ड्रेस में आतंकवादी भारतीय सीमा में घुस गए थे। दिखावे के इन बयानों से देश में गुस्सा है। जनमानस में कई सवाल हैं, जिनका जवाब सरकारों के पास नहीं है। बड़ी बात यह है कि आखिर सरकार क्यों पाकिस्तान की इस कायराना हरकत का बचाव कर रही है? दूसरा यह कि, आखिर सीमा पर पाकिस्तानी सेना की आधिकारिक यूनिफॉर्म पहन कर ये आतंकी सीमा पार कर जाते हैं और क्यों पाकिस्तान को इसका पता भी नहीं चलता? पाकिस्तान का आतंककारियों को सहायता देना कोई नई बात नहीं। पूरा करगिल का युद्ध पाकिस्तानी सेना और आतंककारियों की सांठ-गांठ का कभी न मिटने वाला उदाहरण है। फिर बार-बार यह बचाव क्यों? यहां हम बता रहे हैं कि वे कौन से आतंकी संगठन हैं, जो पाक की जमीन से हमारे देश के प्रति अपने नापाक इरादों को अन्जाम दे रहे हैं। कब-कब उन्होंने पाक के इशारों पर हमारे अमन को लूटा और पाकिस्तान में कहां से उन्हें समर्थन मिला?

इंडियन मुजाहिदीन-
रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इंडियन मुजाहिदीन भारत में प्रतिबंधित सिमी और लश्कर का मुखौटा है। सिमी को बैन करने के बाद सिमी में मौजूद आतंककारियों ने इंडियन मुजाहिदीन के नाम से नया संगठन खड़ा किया। जिसे पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई सपोर्ट कर रही है। इसके संस्थापक सद्सयों में आमिर रजा खान का नाम मुख्य तौर पर है। इस संगठन ने भारत में दस से ज्यादा बड़े हमले किए हैं। जिनमें 2005 में दिल्ली के सरोजनी मार्केट में हुए हमले जिसमें 66 लोगों की मौत हो गई थी, 2006 में मुंबई की लोकल ट्रेन में धमाके करने में भी इसी सगंठन का हाथ था जिसमें 187 लोग मारे गए थे, यूपी के कई कोर्ट में सिलेसिलेवार धमाके किए गए, 2008 में जयुपर में विस्फोट किया गया जिसमें 80 लोग मारे गए, 2008 में ही बैंगलोर में धमाके हुए, 2008 में ही अहमदाबाद में सिलसिलेवार धमाके हुए जिसमें 56 लोगों की मौत हो गई, 2008 में दिल्ली के गफ्फार मार्केट सहित कई इलाकों में बम धमाके हुए इसमें भी कई लोगों की जान गई और 2010 में पुणे बेकरी विस्फोट में भी इंडियन मुजाहिदीन का ही हाथ है।

लश्कर ए तैयबा-
लश्कर ए तैयबा जिसे जमात उल दावा के नाम से भी जाना जाता है इस आतंकी संगठन के मुखिया हाफिज मोहम्मद सईद हैं। हाफिज को भारत सरकार ने वांछित आतंकवादी घोषित कर रखा है। सईद पाकिस्तान में खुलेआम घूम रहा है। यह साउथ एशिया का मुख्य आतंकी संगठन है जो कि पाकिस्तान से चलता है। लश्कर ए तैयबा अपने ट्रैनिंग कैम्प पीओके में चलाता है। और अपने आतंककारी पीओके के जरिए से भारत में भेजता रहा है। हाफिज सईद को मुंबई हमले का मास्टर माइंड बताया गया है। इसके अलावा इस संगठन ने ही 2001 में भारतीय संसद पर हमले करवाये थे। इस संगठन को भारत और पाकिस्तान सहित कई देशों में प्रतिबंधित कर रखा है लेकिन पाक की खुफिया एजेंसी आईएसआई इस संगठन की हर संभव मदद करती रही है। यह भारतीय सेना के साथ ही भारतीय नागरिकों को भी अपना शिकार बनाता है। इस संगठन के दूसरे सर्वेसर्वा हैं अब्दूल रहमान मक्की। ये हाफिज सईद का साला हैं और अमरीका सरकार ने इस पर 2 मिलियन डॉलर का इनाम रखा है।


जैश ए मोहम्मद-
यह आतंकी संगठन कश्मीर का बड़ा आतंकी संगठन है, यह कश्मीर को भारत से अलग करने को लेकर लोगों को उकसाता रहा है। इसने कश्मीर में कई हमले भी किए हैं। इसके बाद पाकिस्तान ने इस संगठन पर 2002 में प्रतिबंध लगा दिया था। लेकिन इसका नाम खद्दम उल इस्लाम बदलकर पाकिस्तान में यह संगठन अभी भी काम कर रहा है। यह संगठन अलकायादा से जुड़ा हुआ है।


आईएसआई
इंटर सर्विस इंटेलिजेंस पाकिस्तान की प्रमुख खुफिया एजेंसी है। आईएसआई आतंकी संगठनों की सहायता करके भारत पर हमले करवाती रही है। यह एजेंसी पाकिस्तान में मौजूद हर एक आतंकी संगठन को सहायता करती रही है। और इस एजेंसी ने भारत पर हमला करने के लिए आतंकियों को उकसाने के आरोप हैं। एजेंसी काम मुख्य मकसद अपने दुश्मन देशों में आतंकी हमले करवाकर उनकी शांति भंग करना।


अलकायदा और तालिबान
अलकायदा कई पाकिस्तानी आतंकी संगठनों से मिला हुआ है जो कि भारत पर हमले करते रहे हैं। अलकायदा इन आतंकी संगठनों को मदद करता रहा है। और इन्हें जेहाद के लिए ना केवल लड़ाके उपलब्ध कराता है बल्कि आर्थिक तौर पर मदद करता रहा है।


जब सामने आई मिलीभगत
करगिल युद्ध के दौरान पाक सरकार, आतंकी और आईएसआई की मिलीभगत सामने आई। जब करगिल में आतंकियों ने भारत सेना पर हमला किया और भारतीय सेना ने उन पर जवाबी हमला किया तो उधर से पाकिस्तानी सेना ने गोलीबारी शुरू कर दी। इससे इन तीनों का चोली-दामन का साथ जगजाहिर हो गया।


भारत पर हमले के पीछे इनकी मंशा
इन सभी आतंकी संगठनों का भारत में आतंक फैलाने का अलग-अलग मकसद है। अधिकतर संगठन चाहते हैं कि भारत कश्मीर से अपना अधिकार हटा दे। वे कश्मीर को स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में देखना चाहते हैं ताकि वे अपनी आतंकी गतिविधियां स्वतंत्र रूप से अंजाम दे सके और कश्मीर पर शासन कर सके। कई आतंकी संगठन कश्मीर को हथियाने के लिए आतंक फैला रहे हैं। वहीं कई आतंकी संगठनों का इरादा है कि वह भारत में हिंसा करके शांति का भंग करें। कई संगठनों का कहना है कि भारत इस्लाम का विरोधी है। सूत्रों की माने तो चाहे पाकिस्तान इन आतंकी संगठनों में अपनी दखलअंदाजी से हमेशा मना करता रहे। लेकिन पाकिस्तानी सरकार, सेना और पाक खुफिया एजेंसी आईएसआई हमेशा इन आतंकी संगठनों को सपोर्ट करती रही है।


कौन करता है इन आतंकियों को सपोर्ट
पाकिस्तान की राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने इस्लामाबाद में कांफ्रेंस के दौरान खुद स्वीकार किया है कि पाकिस्तान ने अपने रणनीतिक एजेंडे के तहत कई आतंकी संगठनों को पैदा किया। पाकिस्तान का आतंकी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप इसके पड़ोसी देशों अफगानिस्तान, इरान, बांग्लादेश, भारत और कई पड़ोसी देश जैस यूएसए और यूके ने कई बार लगाए हैं। पाकिस्तान की अफगानिस्तान के लगती सीमा के कबाइली इलाके को आतंकियों की पनाहगाह माना जाता है। पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई अपने दुश्मनों के खात्मे के लिए इन आतंकी संगठनों का इस्तेमाल कर रही है। 2010 में पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्फ ने स्वीकार किया था कि पाकिस्तानी सेना ने आतंकियों को कश्मीर में भारतीय सेना से लड़ने के लिए ट्रेंड किया था।


विश्व के कई पत्रकारों और लेखकों ने पाक की खुफिया एजेंसी को ही आतंकवाद के लिए जिम्मेदार ठहराया है। पाक आतंकियों को सपोर्ट कर रहा है, इसके साथ ही आईएसआई ही इनकी आर्थिक मदद के साथ-साथ हथियार भी मुहैया करवा रही है। पाकिस्तानी सेना के कई वरिष्ठ अधिकारी और आईएसआई के अधिकारी और अन्य सेना बलों के अधिकारी इन्हें पूरी तरह से सहयोग दे रहे हैं।


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