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आज नवरात्रि के तीसरे दिन बन रहे हैं ये शुभ योग, आप भी लाभ उठाएं

Updated: IST aaj ki kundali
वैधृति नामक अत्यंत दुधर्ष व उपद्रवकारी योग पूर्वाह्न 11.07 तक, तदन्तर विष्कुंभ नामक नैसर्गिक अशुभ योग हैं

तृतीया जया संज्ञक तिथि रात्रि 11.43 तक, तदुपरान्त चतुर्थी रिक्ता संज्ञक तिथि है। तृतीया तिथि में संगीत, वाद्य, कला कार्य- शिक्षा, अन्नप्राशन, उपनयन, वास्तु, गृहप्रवेश व अन्य द्वितीया तिथि में कथित कार्य शुभ व सिद्ध होते हैं। चतुर्थी तिथि में शत्रुमर्दन, बन्धन, शस्त्र व अग्निविषादिक असद् कार्य सिद्ध होते हैं।

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नक्षत्र: अश्विनी 'क्षिप्र व तिर्यंकमुख' संज्ञक नक्षत्र प्रात: 9.24 तक, तदन्तर भरणी 'उग्र व अधोमुख' संज्ञक नक्षत्र है। अश्विनी नक्षत्र में यथा आवश्यक यात्रा, औषध, अलंकार, विद्या, चित्रकारी, कलादि व विवाहांग के समस्त कार्य करने योग्य हैं। भरणी नक्षत्र में सभी साहसिक कार्य, कुआ, कृषि तथा अग्नि सम्बंधी कार्य प्रशस्त हैं।

योग: वैधृति नामक अत्यंत दुधर्ष व उपद्रवकारी योग पूर्वाह्न 11.07 तक, तदन्तर विष्कुंभ नामक नैसर्गिक अशुभ योग हैं। वैधृति नामक योग में समस्त शुभ व मांगलिक कार्य सर्वथा वर्जित है। विशिष्ट योग: सर्वार्थसिद्धि नामक शुभ योग सूर्योदय से प्रात: 9.24 तक तथा रवियोग नामक शक्तिशाली शुभ योग प्रात: 9.24 से सम्पूर्ण दिवारात्रि है। करण: तैतिल नामकरण दोपहर बाद 1.38 तक, तदुपरान्त गरादि करण रहेंगे।

शुभ विक्रम संवत् : 2074

संवत्सर का नाम : साधारण

शाके संवत् : 1939

हिजरी सन् : 1438

अयन : उत्तरायण

ऋतु : बसन्त

मास : चैत्र। पक्ष - शुक्ल।

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शुभ मुहूर्त : उपर्युक्त शुभाशुभ समय, तिथि, वार, नक्षत्र व योगानुसार आज अश्विनी नक्षत्र में वैधृति दोषयुक्त अति आवश्यकता में उपनयन का अशुद्ध मुहूर्त है। अन्य किसी शुभ व मंगल कृत्यादि के शुभ व शुद्ध मुहूर्त नहीं है।

श्रेष्ठ चौघडि़ए: आज सूर्योदय से प्रात: 7.56 तक शुभ, पूर्वाह्न 11.00 से अपराह्न 3.35 तक क्रमश: चर, लाभ व अमृत तथा सायं 5.07 से सूर्यास्त तक शुभ के श्रेष्ठ चौघडि़ए हैं एवं दोपहर 12.07 से दोपहर 12.56 तक अभिजित नामक श्रेष्ठ मुहूर्त है, जो आवश्यक शुभकार्यारम्भ के लिए अत्युत्तम हैं।

व्रतोत्सव: आज तृतीय नवरात्रा, गणगौर पूजन, मनोरथ तृतीया व्रत, गौरी तृतीया, मत्स्य जयंती, मेला गणगौर (जयपुर में), मेवाड़ उत्सव प्रा. उदयपुर (राज.), मन्वादि, राज. स्थापना दिवस, आंदोलन तृतीया (बिहार में), उर्स मेला अजमेर, मु. मास रज्जब प्रारंभ, शुक्र का बाल्यत्व समाप्त रात्रि 12.45 से तथा वैधृति पुण्यं है। दिशाशूल: दक्षिण दिशा की यात्रा में दिशाशूल रहता है। चंद्र स्थिति के अनुसार पूर्व दिशा की यात्रा लाभदायक व शुभप्रद है। चंद्रमा: चंद्रमा सम्पूर्ण दिवारात्रि मेष राशि में है। राहुकाल: दोपहर बाद 1.30 से अपराह्न 3.00 तक राहुकाल वेला में शुभकार्यारंभ यथासम्भव वर्जित रखना हितकर है।

आज जन्म लेने वाले बच्चे

आज जन्म लेने वाले बच्चों के नाम (ला,लि,लू,ले,लो) आदि अक्षरों पर रखे जा सकते हैं। इनकी राशि मेष है। सभी का जन्म स्वर्णपाद से है। स्वर्णपाद से जन्मे जातकों के हित में कुछ दान, पुण्य, जपादि किया जाना चाहिए। सामान्यत: ये जातक थोड़े असंतोषी, पर विद्वान, बुद्धिमान, धर्मपरायण, हंसमुख, यशस्वी, परोपकारी, सत्यप्रिय व सुमार्गी होते हैं। क्रूर ग्रह की महादशा में चन्द्र, राहु व शनि की अंतर्दशा में कुछ कष्ट व हानि की संभावना रहती है। मेष राशि वाले जातकों को आज अपने क्रोध पर नियंत्रण रखना हितकर रहेगा। सावधानी से व्यवहार करेंगे तो अच्छे धनलाभ के अवसर हैं।

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